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    वैज्ञानिकों ने तैयार किया मॉडिफाइड 'विटामिन B12', ब्रेन ट्यूमर के मरीजों के लिए बन सकता है संजीवनी

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 08:00 AM (IST)

    वैज्ञानिकों ने ग्लियोब्लास्टोमा जैसे घातक ब्रेन कैंसर के लिए संशोधित विटामिन B12 विकसित किया है। ...और पढ़ें

    विटामिन B12 का नया रूप सीधे ट्यूमर पर करेगा वार (Image Source: AI-Generated)

    विटामिन B12 का नया रूप सीधे ट्यूमर पर करेगा वार (Image Source: AI-Generated) 

    HighLights

    1. संशोधित विटामिन B12 घातक ग्लियोब्लास्टोमा के लिए नई आशा

    2. रक्त-मस्तिष्क अवरोध पार कर सीधे ट्यूमर पर हमला

    3. मौजूदा उपचारों के साथ मिलकर बेहतर परिणाम देता है

    एएनआई, नई दिल्ली। Brain Cancer का नाम सुनते ही मन में डर पैदा होना स्वाभाविक है, खासकर जब बात 'ग्लियोब्लास्टोमा' जैसे सबसे घातक रूप की हो, लेकिन विज्ञान की दुनिया से एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है।

    क्या आपने कभी सोचा था कि शरीर को स्वस्थ रखने वाला विटामिन B12 कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ एक बड़ा हथियार बन सकता है? हाल ही में हुए एक शोध ने कुछ ऐसी ही उम्मीद जगाई है। आइए इस आर्टिकल में समझते हैं कि यह नई खोज क्या है और यह ब्रेन कैंसर के मरीजों के लिए क्यों एक 'संजीवनी' साबित हो सकती है।

    क्यों इतना खतरनाक है ग्लियोब्लास्टोमा?

    ग्लियोब्लास्टोमा मल्टीफार्म मस्तिष्क में होने वाले सबसे घातक और जटिल ट्यूमर्स में से एक है। यह उपचार-प्रतिरोधी होता है, जिसका मतलब है कि दवाओं का इस पर आसानी से असर नहीं होता।

    • जीवित रहने की कम संभावना: सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी जैसे तमाम आधुनिक इलाजों के बावजूद, मरीज आमतौर पर इस बीमारी का पता चलने के बाद 15 महीने से भी कम समय तक जीवित रह पाते हैं।
    • रक्त-मस्तिष्क अवरोध: इसका इलाज इतना मुश्किल इसलिए है क्योंकि हमारे मस्तिष्क में एक सुरक्षा कवच होता है जिसे 'रक्त-मस्तिष्क अवरोध' कहते हैं। यह कवच कई जीवनरक्षक दवाओं को मस्तिष्क के ट्यूमर ऊतकों तक पहुंचने ही नहीं देता।

    नया 'विटामिन B12' कैसे कर रहा है चमत्कार?

    विज्ञानियों ने विटामिन B12 का एक संशोधित रूप तैयार किया है, जिसे नाइट्रोसिलकोबालामिन नाम दिया गया है। इसे संक्षेप में एनओ-सीबीआई भी कहा जा रहा है।

    'ओन्कोसाइंस' पत्रिका में प्रकाशित इस नए अध्ययन के अनुसार, यह खास विटामिन B12 एक 'डिलीवरी बॉय' की तरह काम करता है। यह मस्तिष्क के उस मजबूत सुरक्षा कवच को आसानी से पार कर लेता है और नाइट्रिक ऑक्साइड को सीधे कैंसर की ट्यूमर कोशिकाओं के अंदर तक पहुंचा देता है।

    किसने किया यह शोध?

    इस ऐतिहासिक शोध का नेतृत्व जोसेफ ए. बाउर ने किया है। वे 'नाइट्रिक ऑक्साइड सर्विसेज, एलएलसी' और 'क्लीवलैंड क्लिनिक फाउंडेशन टास्सिंग कैंसर सेंटर' से जुड़े हुए हैं।

    चूहों और प्रयोगशाला में हुआ सफल परीक्षण

    शोधकर्ताओं ने इस नए यौगिक की ताकत परखने के लिए कई तरह के प्रयोग किए:

    • कैंसर सेल्स पर असर: NCI-60 मानव ट्यूमर सेल लाइन पैनल पर इसका परीक्षण किया गया, जहां इसने विभिन्न प्रकार के कैंसर के खिलाफ जबरदस्त एंटी-ट्यूमर गतिविधि दिखाई।
    • चूहों पर प्रयोग: जब ग्लियोब्लास्टोमा ट्यूमर वाले चूहों को यह दवा दी गई, तो सबसे बड़ी सफलता हाथ लगी। यह दवा रक्त-मस्तिष्क बाधा को पार करके सीधे ग्लियोब्लास्टोमा टिश्यू में जमा हो गई।
    • लंबा असर: सामान्य ऊतकों में इस दवा का स्तर तेजी से गिर गया, लेकिन ट्यूमर के अंदर यह काफी लंबे समय तक सक्रिय रही। उपचार के बाद कम से कम 24 घंटे तक ट्यूमर के अंदर नाइट्रेट का स्तर बहुत ऊंचा बना रहा। इसका सीधा मतलब है कि यह दवा सीधे ट्यूमर के माइक्रोएनवायरनमेंट को अपना निशाना बनाती है।

    मौजूदा इलाजों के साथ मिलकर दिखा 'दोगुना असर'

    क्या यह नया विटामिन B12 पुरानी कैंसर दवाओं के साथ मिलकर काम कर सकता है? इस सवाल का जवाब भी वैज्ञानिकों ने खोज लिया है।

    खबरें और भी

    • प्रयोगशाला में U87 और D54 ग्लियोब्लास्टोमा कोशिकाओं पर इसका परीक्षण किया गया।
    • जब एनओ-सीबीआई को ग्लियोब्लास्टोमा के मौजूदा उपचारों, जैसे ट्रेल या टेमोजोलोमाइड के साथ मिलाकर दिया गया, तो नतीजे चौंकाने वाले थे।
    • अकेले दवा देने की तुलना में, इन दोनों के मिश्रण ने ट्यूमर कोशिकाओं की वृद्धि को कहीं अधिक मजबूती से दबा दिया।

    यह नया अध्ययन स्पष्ट करता है कि विटामिन B12 का यह संशोधित रूप भविष्य में ग्लियोब्लास्टोमा जैसे लाइलाज समझे जाने वाले ब्रेन कैंसर के इलाज की दिशा बदल सकता है। यह उन हजारों मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक नई उम्मीद की किरण है, जो इस खतरनाक बीमारी से जंग लड़ रहे हैं।

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