सिगरेट का धुआं सिर्फ फेफड़े नहीं, आपकी दिमागी क्षमता को भी कर रहा है बर्बाद; डॉक्टर की चेतावनी
डॉक्टर बताते हैं कि धूम्रपान दिमाग की कार्यक्षमता घटाता है, याददाश्त कमजोर करता है और तनाव बढ़ाता है। ...और पढ़ें

नॉन-स्मोकर्स से ज्यादा तनाव में रहते हैं सिगरेट पीने वाले (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। भागदौड़ भरी व्यस्त जिंदगी में मानसिक तनाव को कम करने के चक्कर में उपयोग में लाई जा रही सिगरेट हकीकत में सिर्फ एक लत है। इससे मानसिक शांति नहीं मिलती बल्कि निकोटिन की लत के कारण अस्थायी राहत होती है। डाक्टरों का कहना है कि मानसिक तनाव के दौरान जितना अधिक धूमपान से दूरी बनाकर रहेंगे उतना अधिक अपने आप को तनाव से लड़ने के लिए मजबूत बना सकेंगे।
सिगरेट छोड़ते ही क्यों होती है बेचैनी?
डाक्टरों का कहना है कि सिगरेट पीने से मिलने वाली राहत असल में निकोटिन की कमी से उत्पन्न बेचैनी को कुछ समय के लिए कम कर देती है। जब शरीर में निकोटिन का स्तर घटता है तो व्यक्ति चिड़चिड़ापन, घबराहट और बेचैनी महसूस करता है।
सिगरेट पीने के बाद ये लक्षण थोड़ी देर के लिए कम हो जाते हैं। इससे व्यक्ति को भ्रम होता है कि उसे मानसिक शांति मिल रही है, जबकि वास्तव में निकोटिन दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। कई लोगों को लगता है कि सिगरेट पीने से फोकस और एकाग्रता बढ़ती है, लेकिन यह भी एक गलत धारणा है।
निकोटिन थोड़े समय के लिए दिमाग को उत्तेजित कर सकता है। इससे व्यक्ति खुद को अधिक सतर्क महसूस करता है, लेकिन लंबे समय तक धूम्रपान करने से दिमाग की कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ता है। इससे याददाश्त कमजोर हो सकती है और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
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धूमपान करने वाले अधिक होते हैं तनाव ग्रस्त
धूम्रपान करने वालों में तनाव और चिंता का स्तर नान - स्मोकर्स की तुलना में अधिक पाया जाता है। निकोटिन की लत के कारण एक ऐसा चक्र बन जाता है जिसमें निकोटिन की कमी से बेचैनी बढ़ती है और सिगरेट पीने से वह थोड़ी देर के लिए कम हो जाती है।
धूमपान की लत के यह हैं मुख्य कारण
जागरूकता बढ़ने के बावजूद युवाओं में सिगरेट और वेपिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इसके पीछे दोस्तों का दबाव, इंटरनेट मीडिया और फिल्मों का प्रभाव, आकर्षक पैकेजिंग और मार्केटिंग, वेपिंग को कम हानिकारक समझने की गलत धारणा व जिज्ञासा और खुद को परिपक्व दिखाने की चाह जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं।
इन बीमारियों का रहता है खतरा
तंबाकू के धुएं में हजारों हानिकारक रसायन होते हैं, जिनमें कई कैंसर पैदा करने वाले तत्व शामिल हैं। फेफड़ों का कैंसर, मुंह और गले का कैंसर, भोजन नली का कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर, क्रानिक ब्रोंकाइटिस, एम्फायसेमा व सीओपीडी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ये बीमारियां धीरे-धीरे विकसित होती हैं और इसी कारण धूमपान एक साइलेंट हेल्थ क्राइसिस का रूप ले चुका है।

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जमीनी स्तर पर सख्त नियमों का पालन, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध का प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक जन-जागरूकता अभियान तंबाकू सेवन को कम करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
- प्रो. व डॉ. पायल जैन, विभागाध्यक्ष जनरल मेडिसिन विभाग, जिम्स
लगभग 20-30 प्रतिशत मरीज सीधे या परोक्ष रूप से तंबाकू और धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित होते हैं। इनमें लगातार खांसी, सांस फूलना, सीओपीडी, हृदय रोग, मुंह के घाव और कैंसर के शुरुआती लक्षण जैसे मामले शामिल होते हैं। जागरूकता ही बचाव का रास्ता है।
- डॉ. पुनीत गुप्ता, हेड पल्मोनोलाजी, यथार्थ हास्पिटल, ग्रेनो वेस्ट
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