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    आप भी बिना कारण महसूस करती हैं थकान? शरीर के इन संकेतों को इग्नोर करना महिलाओं को पड़ सकता है भारी

    Updated: Tue, 09 Jun 2026 04:00 PM (GMT+05:30)

    लंबी उम्र अच्छे स्वास्थ्य की गारंटी नहीं होती। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की औसत आयु अधिक तो होती है, पर सेहत की चुनौतियां भी गंभीर होती हैं। ...और पढ़ें

    महिलाओं की सेहत के लिए जरूरी बातें (Picture Courtesy: Freepik)

    महिलाओं की सेहत के लिए जरूरी बातें (Picture Courtesy: Freepik)

    HighLights

    1. महिलाएं अक्सर अपनी सेहत पर कम ध्यान देती हैं

    2. 15-49 वर्ष की उम्र की 57% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं

    3. महिलाओं में कमर के निचले हिस्से में दर्द की समस्या भी रहती है

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या बिना किसी कारण के थकान महसूस करती हैं? सिर भारी, जोड़ों में दर्द के साथ रोजमर्रा का कामकाज बोझिल लग रहा है? संभव है कि इन सबसे रोजमर्रा के कामकाज व जीवन की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही हो। ध्यान रहे कि किसी भी समस्या की शुरुआत कुछ ऐसे छोटे लक्षणों से होती है, जिन पर अक्सर ध्यान नहीं जाता। 

    जैसे, थकान को अक्सर तनाव या नींद की कमी बता दिया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो यह एनीमिया या थायरॉइड विकार भी हो सकता है। आप रोजमर्रा के जीवन में होने वाले थकान को पोषण संबंधी कमियों का संकेत मान सकते हैं।

    इन्हें सामान्य मानने या अनदेखा करने की आदत दीर्घकालिक समस्याओं का बड़ा कारण भी बन सकती है। बेल्जियम के घेंट विश्वविद्यालय के अनुसार, महिलाओं की प्रतिरोधक क्षमता पुरुषों से बेहतर होती है, पर प्रकृति के इस उपहार को पाने के बाद भी वे जीवन भर क्रोनिक व पीड़ादायक समस्याओं से जूझती रहती हैं।

    कारणों में ढूंढ़ें निदान

    लांसेट की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कमर के निचले हिस्से का दर्द एक ऐसी पीड़ा है, जो दुनियाभर की महिलाओं को बड़े स्तर पर प्रभावित कर रही हैं। नहीं भूलना चाहिए कि लिंग भेद कम होने के दावों के बीच भी आज भी अनेक परिवारों में छोटी उम्र से ही उन्हें पोषण संबंधी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। साथ ही, बीते कुछ वर्षों में 15 से 49 वर्ष की महिलाओं में मोटापा 24 प्रतिशत से बढ़कर, 30.7 प्रतिशत हो गया है।

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    राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत में 57 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। ये सभी 15-49 वर्ष की उम्र की हैं जो कि प्रजनन अवधि है। गर्भ में बच्चे के साथ एनीमिया उनके पूरे जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। उनकी खराब सेहत का एक कारण उन्हें समय पर उचित सहायता नहीं मिलना भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जिन महिलाओं को वकर्प्लेस में सपोर्ट नहीं मिलता, उनमें बर्नआउट का खतरा 50 प्रतिशत अधिक रहता है। 

    मानसिक समस्या केवल मानसिक नहीं

    द लैंसेट के ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 1990 के बाद एंग्जाइटी से जुड़े मामलों में 123 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। ध्यान रहे कि मानसिक परेशानी शरीर, व्यवहार, नींद, हार्मोन और दिल की सेहत तक को प्रभावित करने वाली एक गंभीर स्थिति है।

    महिलाओं की प्रमुख चुनौतियां

    • लोअर बैक पेन (कमर दर्द)
    • सिरदर्द
    • डिप्रेशन
    • एंग्जाइटी
    • जोड़ों व मांसपेशियों के विकार

    अपने लिए निकालना होगा समय

    कसरत नहीं करने के लिए समय नहीं है या घर के कामकाज तो करते ही हैं, ऐसे तर्क से दूरी बरतें। रोजाना अपने लिए समय निकालें। ध्यान रहे कि टहलना और कसरत आपकी दिनचर्या में जरूर शामिल हो।

    कसरत केवल कैलोरी नहीं जलाता, बल्कि रक्तसंचार बढ़ाने के साथ, आक्सीजन को पूरे शरीर में पहुंचाता है। पाचन सुधार सकता है, प्रजनन सेहत बेहतर करता है। हड्डियों को मजबूत करता है, प्राणशक्ति को बढ़ाकर मानसिक सेहत को बेहतर बनाने जैसे अनेक लाभ देता है।

    इन बातों का रहे ध्यान

    • जंक फूड या बाहर के खाने को कम से कम शामिल करें। आहार में हरी सब्जियां, फल, दालें, दूध, नट्स रोजाना लें।
    • लीन प्रोटीन, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा लें।
    • अपने खाने का समय और मात्रा निर्धारित करें और फैटी फूड लेने की जगह पोषक तत्वों से भरपूर चीजों का सेवन करें।
    • खाने में पौधों आधारित कच्चे खाने यानि सलाद, अंकुरित अनाज लें। इनसे भोजन पचने में आसानी रहती है।

    अच्छी नींद जरूरी

    यदि सुबह के समय कसरत और टहलने की आदत है, तो रात की नींद भी अच्छी होगी। अच्छी नींद के लिए देर रात तक मोबाइल या टीवी का प्रयोग कम करें। सोने से एक घंटे पूर्व गैजेट्स से दूर रहने की आदत का विकास करें।  

    छोटे कदमों से करें शुरुआत

    डॉ. नीलम सूरी, स्त्री रोग विशेषज्ञ, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, दिल्ली बताती हैं कि छोटी उम्र से ही जंक फूड, मोबाइल और इंटरनेट मीडिया पर बढ़ती निर्भरता महिलाओं को मोटापे की ओर धकेल रही है। यही बच्चियां आगे जाकर पीसीओएम से जूझ रही हैं। इन्फर्टिलिटी की चुनौती बढ़ रही है।

    देरी से शादी से मां बनने का निर्णय भी उनकी सेहत को प्रभावित कर रहा है। बीते वर्षों में पर्यावरण में हो रहे बदलाव भी कैंसर जैसे रोगों के प्रमुख कारक बनकर उभर रहे हैं। हालांकि जो हमारे नियंत्रण में नहीं है उन्हें अधिक न सोचें। छोटे छोटे कदमों से सेहत में बड़े बदलाव के प्रयास करें।

    40 बाद की सेहत को लेकर सतर्कता

    डॉ. रूपाली मलिक, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली कहती हैं कि महिलाओं की सेहत केवल मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य पर ही केंद्रित नहीं होना चाहिए। इससे बढ़ती उम्र में महिलाओं को होने वाली क्रोनिक बीमारियों की अनदेखी हो सकती है। खासकर, 40 की उम्र के बाद एस्ट्रोजन की कमी भी उनकी प्रमुख चुनौती है। 

    यह हार्मोन मासिक चक्र नियमित करने से लेकर कैल्शियम का स्तर बेहतर रखने, हृदय की रक्तवाहिकाओं को लचीला बनाने आदि सभी कार्य के लिए जरूरी है। इसका उम्र के साथ कम होना स्वाभाविक है, पर खराब जीवनशैली भी इसका बड़ा कारक है। महिलाओं में हृदय रोग की आशंका बीते वर्षों में तेजी से बढ़ी है। ऐसे में पोषण के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का महत्व समझें। मांसपेशियों की सेहत को अनदेखा न करें।