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'कभी-कभार खाने से कुछ नहीं होगा...' ऐसा सोचने वाले संभल जाएं! डाइट में 10% जंक फूड भी बढ़ाता है कैंसर का खतरा

By Dr. Rajesh Kumar JainEdited By: Nikhil Pawar
Published: Mon, 03 Aug 2026 03:51 PM (IST)

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, हमारी थालियां धीरे-धीरे रेडी-टू-ईट स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड फूड्स से भर गई हैं।

कहीं आपका पसंदीदा पैकेज्ड फूड आपको कैंसर की तरफ तो नहीं धकेल रहा? (Image Source: AI-Generated)

कहीं आपका पसंदीदा पैकेज्ड फूड आपको कैंसर की तरफ तो नहीं धकेल रहा? (Image Source: AI-Generated) 

HighLights

  1. 10% जंक फूड से 12% कैंसर का खतरा बढ़ता है

  2. युवाओं में कोलन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं

  3. ताजे फल-सब्जियां और देसी खाने से कैंसर से बचें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल की तेज रफ्तार जिंदगी में हम सबने शॉर्टकट अपना लिए हैं, खासकर खाने-पीने के मामले में। भूख लगी तो तुरंत रेडी-टू-ईट स्नैक्स खोल लिए या कोल्ड ड्रिंक पी ली, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सहूलियत देने वाली ये चीजें हमारी सेहत से कितना बड़ा खिलवाड़ कर रही हैं?

आइए, जानते हैं कि कैसे ये 'अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स' चुपचाप हमारे युवाओं में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की वजह बन रहे हैं।

फैक्ट्री में बना खाना और उसकी हकीकत

सीधे शब्दों में कहें तो ये अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स, खाने-पीने की वो चीजें हैं जिन्हें फैक्ट्रियों में कई तरह के केमिकल्स के साथ तैयार किया जाता है। इनकी उम्र लंबी करने और इन्हें लत लगाने लायक स्वादिष्ट बनाने के लिए इनमें भारी मात्रा में चीनी, अनहेल्दी फैट, आर्टिफिशियल कलर, फ्लेवर और इमल्सीफायर मिलाए जाते हैं।

फ्रोजन पिज्जा, चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स और फोर्टिफाइड ब्रेड व सीरियल्स जैसी चीजें इसी लिस्ट में आती हैं। आज स्थिति यह है कि हमारे घरों से ताजी रोटियां, सब्जियां और फल गायब हो रहे हैं। उनकी जगह सड़क किनारे मिलने वाले पैकेटबंद पाव-भाजी मिक्स और बच्चों के फ्लेवर्ड वेफर्स ने ले ली है।

कैंसर और जंक फूड का खतरनाक रिश्ता

रिसर्च के आंकड़े डराने वाले हैं। अगर आप अपनी डाइट में सिर्फ 10% अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना बढ़ाते हैं, तो आपको कैंसर का खतरा लगभग 12% और ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम 11% तक बढ़ जाता है।

यह खाना हमारे शरीर को अंदर से कैसे खोखला करता है, इसे ऐसे समझें:

  • प्रोसेस्ड मीट में मौजूद 'नाइट्रेट' और तली हुई चीजों में पाया जाने वाला 'एक्रिलामाइड' सीधे हमारे डीएनए को नष्ट कर सकता है।
  • लगातार जंक फूड खाने से शरीर में इन्फ्लेमेशन बढ़ती है, इम्युनिटी गिर जाती है और हमारा शरीर कैंसर पैदा करने वाले तत्वों की चपेट में आसानी से आ जाता है।

युवाओं पर मंडराता खतरा

आज 20 से 30 साल के युवाओं में कोलन कैंसर के मामले आम होते जा रहे हैं, जो पहले शायद ही कभी सुने जाते थे। हेमेटोलॉजिस्ट भी मानते हैं कि 40 साल से कम उम्र के लोगों में कैंसर के बढ़ते ग्राफ के पीछे यही पैकेटबंद खाना और शारीरिक आलस सबसे बड़े कारण हैं।

प्रदूषण और तनाव इस आग को और भड़काते हैं, लेकिन बीमारियों की असली जड़ हमारी रोजमर्रा की डाइट है। इसके अलावा, जिन शहरों में ये फूड्स ज्यादा बिकते हैं, वहां मोटापा और डायबिटीज भी तेजी से फैल रहा है, जो आगे चलकर पैंक्रियाटिक, फेफड़ों, कोलन और ब्रेस्ट कैंसर का कारण बनते हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए साल 2025 में आई एक रिपोर्ट में यह साफ कहा गया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना देश की सेहत को बर्बाद कर रहा है। इस रिपोर्ट में ऐसी कंपनियों की मार्केटिंग और लेबलिंग पर कड़े नियम लागू करने की वकालत की गई है।

सेहत सुधारने के कारगर तरीके

इस खतरे से बचने के लिए बहुत बड़े या मुश्किल बदलाव नहीं करने हैं। आप छोटी-छोटी शुरुआत से बेहतरीन नतीजे पा सकते हैं:

  • देसी ड्रिंक्स अपनाएं: सोडा या कोल्ड ड्रिंक की जगह नींबू पानी या छाछ को चुनें।
  • असली अनाज खाएं: पैकेट वाले इंस्टेंट ओट्स के बजाय बाजरा जैसे साबुत अनाज अपनी डाइट में शामिल करें।
  • किचन में ताजी शुरुआत: रेडी-मिक्स मसालों और पैकेट्स के बजाय, ताजी सब्जियों को बहुत कम तेल में पकाकर खाएं।
  • लेबल पढ़ने की आदत डालें: अगर पैकेट के पीछे लिखे इंग्रीडिएंट्स की लिस्ट बहुत लंबी है और उसमें अजीबोगरीब केमिकल्स के नाम हैं, तो उसे न खरीदें।
  • प्लेट को रंगीन बनाएं: रोजमर्रा के खाने में ताजी दालें, हरी सब्जियां और ढेर सारे फल शामिल करके एक 'रेनबो प्लेट' तैयार करें।

सुपरमार्केट की बोरिंग लाइनों में डिब्बाबंद खाना ढूंढने के बजाय, वीकेंड पर परिवार के साथ ताजी सब्जियों के बाजार जाएं। इससे सेहत भी बनेगी और मजा भी आएगा।

कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने के लिए डरने की नहीं, बल्कि जागरूक होने की जरूरत है। सहूलियत की आदत छोड़ें और आज ही असली व ताजे खाने को अहमियत दें। यकीन मानिए, कल आपका शरीर इसके लिए आपका शुक्रिया अदा करेगा।

(डॉ. राजेश कुमार जैन, बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के जाने-माने कैंसर विशेषज्ञ हैं।)

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