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    सुख-सुविधाओं के बाद भी गायब है सुकून? एक्सपर्ट ने बताया क्यों आज के युवा हो रहे डिप्रेशन के शिकार

    Updated: Tue, 07 Apr 2026 07:01 AM (IST)

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    इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं डिप्रेशन और एंग्जायटी के मामले? (Image Source: AI-Generated)

    इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं डिप्रेशन और एंग्जायटी के मामले? (Image Source: AI-Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सभी इतने व्यस्त हो गए हैं कि हमने अपने मानसिक सुकून को कहीं पीछे छोड़ दिया है। एशियन हॉस्पिटल में साइकेट्री विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. मीनाक्षी मनचंदा के अनुसार, आजकल युवाओं और नौकरीपेशा लोगों में एंग्जायटी और डिप्रेशन के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। यह एक ऐसी गंभीर समस्या बन चुकी है जिसे अब हम बिल्कुल भी अनदेखा नहीं कर सकते।

    Youth Depression causes

    (Image Source: AI-Generated)

    सुख-सुविधाएं बढ़ीं पर गायब हो रहा सुकून

    एक्सपर्ट के अनुसार इसके पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है हमारे काम का बढ़ता हुआ भारी दबाव और करियर को लेकर अनिश्चितता। आज की कॉर्पोरेट दुनिया में टारगेट्स पूरे करने की होड़ और नौकरी जाने का डर लोगों को मानसिक रूप से बुरी तरह थका रहा है, जिससे बर्नआउट और तनाव पैदा हो रहा है।

    इसके अलावा, सोशल मीडिया भी इसमें एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। हम अक्सर अपनी असल जिंदगी की तुलना इंटरनेट पर दूसरों की 'परफेक्ट' दिखने वाली जिंदगी से करने लगते हैं। यह तुलना हमारे अंदर असंतोष और हीन भावना पैदा करती है।

    वहीं दूसरी, शहरीकरण ने हमें सुख-सुविधाएं तो दी हैं, लेकिन इसने हमें अकेला भी कर दिया है। लोगों के बीच आपसी रिश्ते कम हो रहे हैं और यह सामाजिक दूरी या अकेलापन डिप्रेशन का एक बहुत बड़ा कारण बन रहा है। हमारी खराब दिनचर्या, देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन से चिपके रहना और नींद पूरी न करना भी हमारे मानसिक स्वास्थ्य को अंदर ही अंदर कमजोर कर रहा है।

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    Digital burnout

    (Image Source: AI-Generated)

    अंदर से खालीपन और छोटी बातों पर घबराहट?

    इसके कुछ साफ लक्षण हैं जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर आपको लगातार उदासी या अंदर से खालीपन महसूस होता है, छोटी-छोटी बातों पर घबराहट होने लगती है, या फिर बहुत ज्यादा थकान और एनर्जी की कमी लगती है, तो ये खतरे के संकेत हैं। नींद बिल्कुल न आना या जरूरत से ज्यादा सोना और किसी भी काम में मन न लगना भी इसके प्रमुख लक्षण हैं। अगर ये परेशानियां लंबे समय तक बनी रहें, तो तुरंत मदद लेनी चाहिए।

    दुर्भाग्य से, हमारे देश में आज भी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर काफी झिझक है। लोग जागरूकता की कमी के कारण डिप्रेशन को एक बीमारी न मानकर कमजोरी समझ लेते हैं। समाज में 'लोग क्या कहेंगे' का डर अक्सर मरीजों को सही समय पर डॉक्टर के पास जाने से रोकता है। यही झिझक और डर इस बीमारी को समय के साथ और भी गंभीर बना देता है।

    how to deal with loneliness

    (Image Source: AI-Generated)

    अपनों का साथ है सबसे जरूरी

    इस परेशानी से बाहर निकलना नामुमकिन नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अपनी जीवनशैली में कुछ छोटे और आसान बदलाव करके हम खुद को स्वस्थ रख सकते हैं। रोजाना व्यायाम या योग करना, भरपूर और अच्छी नींद लेना तथा सोशल मीडिया का कम से कम इस्तेमाल करना इसके बेहतरीन उपाय हैं। इसके अलावा, अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं और उनसे अपने दिल की बात शेयर करें। यदि फिर भी जरूरत महसूस हो, तो किसी अच्छे काउंसलर या थेरेपी से मदद लेने में बिल्कुल न हिचकिचाएं।

    याद रखें, आपका मानसिक स्वास्थ्य भी आपके शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। अगर कोई भी व्यक्ति तनाव, उदासी या घबराहट में है, तो उसे इसे छिपाने के बजाय खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए। इसमें परिवार और समाज का साथ बहुत जरूरी है, ताकि पीड़ित व्यक्ति बिना किसी डर के अपनी परेशानी बता सके। सही समय पर समस्या की पहचान और सही इलाज से डिप्रेशन व चिंता को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। अब वक्त आ गया है कि हम जागरूक बनें, खुलकर बात करें और एक स्वस्थ समाज का निर्माण करें।

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