'एकला चोलो रे' से कहीं आगे है बंगाल का असली संगीत, सुनते ही सीधा दिल में उतर जाता है यहां का म्यूजिक
बंगाल का लोक संगीत काफी विविध है और यहां की संस्कृति का अहम हिस्सा है।

पश्चिम बंगाल के लोक संगीत की कहानी (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बंगाली गानों के नाम पर आपके दिमाग में 'एकला चोलो रे' जैसे गाने आते होंगे, लेकिन क्या आप बंगाल के असली लोक संगीत के बारे में जानते हैं? यहां का लोक संगीत सिर्फ मनोरंजन से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह बंगाल की संस्कृति को पेश करता है।
यहां के लोकगीत की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें कई शैलियों के गाने शामिल हैं। हर क्षेत्र का अपना खास लोकगीत है और अलग-अलग मौकों से जुड़े गीत हैं। आइए जानें पश्चिम बंगाल के लोक संगीत के बारे में।
बाउल संगीत
बाउल संगीत बंगाल की अध्यात्मिक लोक पंरपरा का प्रतीक है। इसे यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता हासिल है। इन गीतों के बोल अध्यात्म से जुड़े होते हैं, जो इंसान को ईश्वर से जोड़ने के लिए गाए जाते हैं। बाउल संगीत को एकतारा, खमख और दुतारा बजाते हुए गाया जाता है।
झुमुर
ये गीत पुरुलिया, बांकुरा और पश्चिम मेदिनीपुर के आदिवासी गाते हैं। ढोल की थाप और बांसुरी पर गाए जाने वाले ये गीत बदलते मौसम, फसल की कटाई और सामुदायिक उत्सवों से जुड़े होते हैं।
भवाईया
बंगाल का भवाईया संगीत जलपाईगुड़ी और कोच बिहार के क्षेत्रों से शुरू हुआ है, जो मुख्य रूप से कामकाजी वर्ग से जुड़ा है। इन गीतों में प्रेम, विरह और गांव के मुश्किल जीवन को बहुत खूबसूरती से बयां किया जाता है।
गंभीरा
ये संगीत लोक नाटक और व्यंग्य से जुड़ा है। यह सामाजिक बुराइयों पर प्रहार करता है। इसमें कलाकार संवादों और गीतों के जरिए आम जनता की समस्याओं और समाज की कुप्रथाओं को मंच पर पेश करता है।
भाटियाली
यह बंगाल के नौका चालकों से जुड़ा संगीत है। नदियों में नाव चलाते समय अकेलापन दूर करने के लिए मांझी गीत गाते, जिससे भाटियाली संगीत की शुरुआत हुई। इन गीतों की तान बहुत लंबी और धीमी होती है। साथ ही, इनमें प्रेम और विरह से जुड़ी भावनाएं जाहिर की जाती हैं। इसके अलावा, जिंदगी में आगे बढ़ते रहने से जुड़े गीत भी भाटियाली में शामिल होते हैं।
रवींद्र संगीत
रवींद्र संगीत को लोक संगीत नहीं कह सकते, लेकिन यह बंगाल की संस्कृति में बसा हुआ है। नोबेल पुरुस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के 2000 से ज्यादा गीतों के संग्रह से यह संगीत बना है। यह संगीत आमतौर पर बंगाल के पढ़े-लिखे वर्ग और उच्च समाज के लोगों के बीच प्रचलित है।
