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फिल्म ‘हनुमान अंश’ के गाने से वायरल हुई बुंदेली भाषा, इस बोली के पीछे छिपा है बुंदेला राजपूतों का इतिहास

Published: Sat, 05 Sep 2026 01:07 PM (IST)

हनुमान अंश फिल्म का गाना 'जब जिद्द पे आ गईं पार्वती' बुंदेली बोली में गाया गया है।

बुंदेली बोली के गीत करते हैं लोगों के दिलों पर राज (AI Generated Image)

बुंदेली बोली के गीत करते हैं लोगों के दिलों पर राज (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। फिल्म हनुमान अंश का गाना ‘जब जिद्द पे आ गईं पार्वती’ इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है और लोगों की जुबां पर छाया हुआ है। नीम करोली बाबा के जीवन पर बनी इस फिल्म का ये गाना अपनी बोली के कारण लोगों को काफी पसंद आ रहा है। 

इस गाने को बुंदेली बोली में गाया गया है, जो अपने आप में बहुत दिलचस्प बोली है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बोली जाने वाली ये बोली बहुत मीठी होती है और अपने बोलने के खास अंदाज के कारण जानी जाती है, लेकिन ये बुंदेलखंड के इतिहास और संस्कृति के बारे में भी काफी कुछ बयां करता है। आइए जानें हनुमान अंश का वायरल गाना जिस बोली में गाया गया है, उसके बारे में कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं। 

बुंदेला राजपूतों के साम्राज्य में शुरू हुई बुंदेली

बुंदेली बोली मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बोली जाती है। उत्तर प्रदेश का झांसी, महोबा, जालौन, ललितपुर, हमीरपुर और मध्य प्रदेश के सागर, पन्ना, जबलपुर, दतिया, टीकमगढ़ और छतरपुर दैसे जिलों में बोली जाती है। 

बुंदेलखंड को उसका नाम लगभग 14वीं शताब्दी के पास मिला, जब बुंदेला राजपूतों ने इस क्षेत्र में अपना साम्राज्य स्थापित किया। बुंदेला राजपूतों के संरक्षण में बुंदेली बोली काफी फली-फूली और राजकाज से लेकर आम लोगों की बोली का हिस्सा बन गई।

क्यों खास है बुंदेली बोली?

बुंदेली बोली की सबसे बड़ी खासियत उसकी मिठास है। यहां अजनबी को भी दाऊ, भैया या काका कहकर संबोधित किया जाता है। ये बोली का उच्चारण और शब्द बहुत ही आसान हैं इसलिए लोगों की जुबां पर आसानी से आ जाते हैं। 

कई लोग बुंदेली और ब्रज बोली को एक ही समझ लेते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें काफी समानता देखने को मिलती है। यूं समझ लीजिए कि इन दोनों बोलियों में 19-20 का फर्क है। इसलिए अगर आप इन बोलियों को नहीं जानते, तो हो सकता है आप भी इन्हें एक ही समझने की भूल कर बैठें। हालांकि, ब्रज के गीतों में भक्ति रस ज्यादा देखने को मिलती है, वहीं बुंदेली लोकगीतों में भक्ति के साथ-साथ वीर रस भी सुनाई देता है।  

वीर रस और आल्हा गायन

बुंदेली बोली वीरों की भी भाषा है। बुंदेलखंड का मशहूर आल्हा गायन भी बुंदेली में गाया जाता है, जो पूरे देश में मशहूर है। इन गीतों में आल्हा और ऊदल की वीरता की कहानियां सुनाई जाती हैं, जो सुनने वालों के रोंगटे खड़े कर देता है।

बुंदेली लोकगीतों की झलक

बुंदेली लोकगीतों की बात करें, तो आपको एक पर एक गीत सुनने को मिल जाएंगे, जिनमें प्रेम, उलाहना, उत्सव और भक्ति जैसी भावनाएं सुनने को मिल जाएंगी। 

बुंदेलखंड का ददरा शैली में गाया गीत ‘बर जावै पन्ना को बाजार, हमरी ननद हिराय गई बटुआ सी रे…’ और ‘सैया रोटी जबई बनहै, पैले करधोनी ले आओ…’ पति-पत्नी के प्यार, नोंक-झोंक और शादीशुदा जीवन की तस्वीर पेश करते हैं। 

हनुमान अंश में छाया बुंदेली बोली का गाना

फिल्म हनुमान अंश में जब जिद्द पे आ गईं पार्वती में बुंदेली बोली और लोकधुनों का इस्तेमाल हुआ है। ये गाना भले ही इस फिल्म के लिए बनाया गया है, लेकिन इसमें इस्तेमाल हुए बुंदेली के शब्द और धुन इसे बहुत खास बनाते हैं, जो सुनने में काफी अच्छे लग रहे हैं। यहीं वजह भी है कि लोगों की जुबां पर ये गाना छा गया है।