दूध उबलकर बर्तन से बाहर गिर जाता है, लेकिन पानी नहीं; समझें इस आम घटना के पीछे छिपा साइंस
दूध उबलने पर बर्तन से बाहर गिर जाता है, जबकि पानी नहीं। इसके पीछे दूध की बनावट और इवापोरेशन का साइंस छिपा है। ...और पढ़ें

उबलकर बाहर क्यों गिरता है दूध? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गैस पर दूध उबलने के लिए रखा हो और एक कुछ सेकंड के लिए भी ध्यान हटे, तो वह तुरंत बर्तन से बाहर उफान मारकर गिर जाता है। वहीं, अगर पानी उबलने के लिए रखा जाए, तो उसे कितनी देर भी खौलाया जाए, वह बर्तन से बाहर नहीं छलकता। कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है?
दूध उबलकर बाहर गिरना और पानी के न गिरने के पीछे बहुत सिंपल साइंस छिपा है। आइए जानें क्यों दूध उबलने पर बाहर निकल जाता है।
दूध और पानी में अंतर
उबलते समय दूध और पानी के बीच का अंतर समझने के लिए इनकी बनावट के अंतर को समझना जरूरी है। पानी हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के एटम्स से मिलकर बना होते है। वहीं दूध इमल्शन और ससपेंस होता है। इसमें लगभग 87% पानी होता है, जबकि बाकी हिस्सा प्रोटीन, फैट और लैक्टोज आदि से बना होता है। इन दोनों के बीच की बनावट का ये अंतर ही सबसे बड़ी वजह है दूध उबलने पर बाहर आ जाता है।
दूध उबलने की प्रक्रिया
दूध उबालते समय इसमें मौजूद प्रोटीन और फैट ऊपर की तरफ आने लगते हैं और ऊपरी स्तह पर पहुंचकर आपस में जुड़ते हैं और मलाई की परत बना लेते हैं। जब दूध का पानी उबलने के तापमान पर पहुंचता है, तो उसका भाप मलाई की इस परत के कारण बाहर नहीं निकल पाती है और वहां हवा फंस जाती है। जैसे-जैसे नीचे भाप बनती है और वह ऊपर जमी मलाई की परत पर दबाव डालती है, भाप उस परत को गुब्बारे की तरह ऊपर धकेलती है। जब यह दबाव बहुत बढ़ जाता है, तब दूध बर्तन के किनारों से बाहर निकलकर छलक जाता है।
पानी उबलने पर बाहर क्यों नहीं गिरता?
पानी में कोई प्रोटीन या फैट नहीं होता। इसलिए जब पानी उबलता है, तो भाप के बुलबुले बिना किसी रुकावट के आसानी से हवा में उड़ जाते हैं। ऊपर मलाई जमा न होने के कारण पानी के अंदर कोई प्रेशर नहीं बनता और वह बर्तन के अंदर ही उबलता रहता है, बाहर नहीं छलकता।
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दूध और पानी की बनावट का असली कारण है कि उबालने पर दूध बर्तन से बाहर छलक जाता है, लेकिन पानी को कितनी भी देर उबालते रहें, वह बाहर नहीं छलकता।