1947 की वो घटना जिसने बदल दी इतिहास की किताबें! बकरी खोजने निकले चरवाहे के हाथ लगे थे 'डेड सी स्क्रॉल्स'
1947 में एक चरवाहे ने अपनी खोई बकरी ढूंढते हुए कुमरान गुफाओं में 2000 साल पुराने 'डेड सी स्क्रॉल्स' खोज निकाले थे। ...और पढ़ें

इजरायल के म्यूजियम में आज भी महफूज हैं 'डेड सी स्क्रॉल्स' (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इतिहास के पन्नों में कई ऐसे रहस्य दर्ज हैं, जिनकी खोज किसी योजना के तहत नहीं, बल्कि एक इत्तेफाक से हुई। मृत सागर के उत्तर-पश्चिमी छोर पर मौजूद 'कुमरान गुफाओं' की कहानी भी बिल्कुल ऐसी ही है।
यह दुनिया के सबसे अहम पुरातात्विक स्थलों में गिना जाता है, जहां से मिले 2000 साल पुराने दस्तावेजों ने बाइबिल अध्ययन, धर्म और पुरातत्व की पूरी दिशा ही बदल दी। आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं कि कैसे एक आम सी घटना ने दुनिया को ऐतिहासिक 'डेड सी स्क्रॉल्स' का तोहफा दिया।

(Image Source: AI-Generated)
जब एक पत्थर ने खोला सदियों पुराना राज
साल 1947 की बात है। एक चरवाहा अपनी भटकी हुई बकरी की तलाश में इन गुफाओं के करीब पहुंच गया। अंधेरी गुफा में उसने यह देखने के लिए एक पत्थर उछाला कि कहीं बकरी अंदर तो नहीं है। पत्थर के टकराते ही किसी मिट्टी के बर्तन के चकनाचूर होने की आवाज गूंजी।
जब वह शख्स अंदर दाखिल हुआ, तो उसकी आंखें फटी रह गईं। वहां मिट्टी के लंबे और बड़े घड़ों के भीतर चमड़े और पैपाइरस के पन्नों पर लिखे बेहद प्राचीन दस्तावेज रखे हुए थे। यह कोई मामूली खोज नहीं थी। इसके बाद पुरातत्वविदों ने 1956 तक इस इलाके की 11 गुफाओं की बारीकी से खुदाई की, जहां से उन्हें सैकड़ों ग्रंथ और हजारों पांडुलिपियों के टुकड़े मिले।
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चूना पत्थर की गुफाओं में कौन रहता था?
इन दस्तावेजों का अध्ययन करने वाले पुरातत्वविदों का मानना है कि आज से करीब दो हजार साल पहले इस इलाके में एक यहूदी धार्मिक समुदाय बसा करता था।
- कई जानकार मानते हैं कि यह लोग 'एसेंस' समुदाय के थे, हालांकि सभी विद्वान इस बात पर एकमत नहीं हैं।
- यह समुदाय सदियों तक कुमरान की इन चूना पत्थर वाली गुफाओं का इस्तेमाल करता रहा।
- यह इलाका बहुत ज्यादा सूखा है और यहां बारिश न के बराबर होती है। इसी रूखे और खुश्क मौसम ने एक प्राकृतिक 'तिजोरी' का काम किया और इन दस्तावेजों को हजारों सालों तक गलने या खराब होने से बचाए रखा।
क्या लिखा है इन हजारों साल पुराने पन्नों में?
वैज्ञानिकों ने जब इन दस्तावेजों की कार्बन-डेटिंग की और लिखावट को परखा, तो पता चला कि इन्हें 250 ईसा पूर्व से 70 ईस्वी के दौरान लिखा गया था।
इन पांडुलिपियों की सबसे दिलचस्प बातें:
- ये अनमोल ग्रंथ मुख्य रूप से हिब्रू भाषा में रचे गए हैं, लेकिन कुछ दस्तावेज अरामी और यूनानी में भी मिले हैं।
- 11 गुफाओं से मिली 900 से ज्यादा पांडुलिपियों में उस दौर के नियम-कानून, पूजा के तरीकों और आम जीवनचर्या का जिक्र है।
- इनमें भविष्यवाणियां, भजन, प्रार्थनाएं और बाइबिल की किताबों पर की गई टिप्पणियां शामिल हैं।
- इन्हें लिखने वालों ने इतनी सावधानी से काम किया था कि अलग-अलग लिपियों के बीच बेहद मामूली अंतर ही देखने को मिलता है।
इन दस्तावेजों के मिलने से धार्मिक ग्रंथों का इतिहास अचानक एक हजार साल और पुराना हो गया। इससे दुनिया को यह समझने का मौका मिला कि शुरुआती ईसाई धर्म की शुरुआत से ठीक पहले प्राचीन यहूदी समाज का रहन-सहन और उनकी धार्मिक सोच कैसी थी।
आज कहां महफूज है यह ऐतिहासिक खजाना?
अगर आप सोच रहे हैं कि कुमरान की गुफाओं से निकली वे प्राचीन मूर्तियां, कलाकृतियां और पांडुलिपियां अब कहां हैं, तो इन्हें बहुत ही हिफाजत के साथ यरुशलम में स्थित इजरायल म्यूजियम में रखा गया है।
- 1965 में बना यह इजराइल का सबसे बड़ा और राष्ट्रीय संग्रहालय है।
- यहां यहूदी संस्कृति, ललित कला और पुरातत्व से जुड़े 5 बहुत ही खास संग्रह मौजूद हैं।
- संग्रहालय के अंदर एक विशेष जगह है जिसे 'श्राइन ऑफ द बुक' कहा जाता है। इसी जगह पर मशहूर 'डेड सी स्क्रॉल्स' को सुरक्षित रखा गया है।
- कुमरान गुफाओं का महत्व इतना ज्यादा है कि इसके ऐतिहासिक मूल्य को देखते हुए इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की टेंटेटिव लिस्ट में भी जगह दी गई है।
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