पुरुषों से ज्यादा घर खरीद रहीं सिंगल महिलाएं, लेकिन इस सफलता के आड़े क्यों आ रहा है मर्दों का अहंकार
आज महिलाएं हर क्षेत्र में तरक्की कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। इसके कारण उन्हें अपने रिश्तों में काफी तनाव का सामना करना पड़ रहा है। ...और पढ़ें
-1779623534659_m.webp)
रिश्तों पर भारी पड़ रही महिलाओं की कामयाबी! (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी का परचम लहरा रही हैं। वे आर्थिक रूप से किसी पर निर्भर नहीं हो रही हैं और अपनी जिंदगी से जुड़े कई बड़े फैसले अब खुद रहे रही हैं, लेकिन यह सफलता उनके रिश्तों के आड़े आ रही है।
जी हां, करियर में सफलता और आर्थिक रूप से स्वतंत्रता हासिल करने के बावजूद महिलाओं को अपने रिश्तों में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, पुरुषों में महिलाओं की यह सफलता असुरक्षा का कारण बन रही है।
दोगुनी रफ्तार से घर खरीद रही हैं महिलाएं
बदलते दौर में आज सिंगल महिलाएं पुरुषों से ज्यादा घर खरीद रही हैं। घर खरीदने वाली सिंगल महिलाओं की दर लगभग 25% है, वहीं सिंगल पुरुषों की दर लगभग 10% है। आज की महिलाएं अपनी जिंदगी के अहम फैसले लेने के लिए या अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किसी जीवनसाथी का इंतजार नहीं कर रही हैं। वे बिना शादी किए भी अपने दम पर प्रॉपर्टीज खरीद रही हैं और अपना भविष्य बना रही हैं।
पुरुषों के अहंकार को पहुंचती चोट
महिलाओं की यह सफलता कई बार पुरुषों के पारंपरिक कमाने वाले होने के अहंकार को ठेस पहुंचाती है। जैसे ही महिलाएं आत्मनिर्भर होकर खुद का घर खरीदती हैं, पुरुषों में एक अजीब सी असुरक्षा की भावना जागने लगती है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, पुरुषों के अंदर एक अपना वर्चस्व खोने का डर होता है।
जब महिलाएं आर्थिक रूप से ज्यादा सफल होने लगती हैं, तो पुरुषों को लगता है कि उन्होंने समाज और रिश्ते में अपना दबदबा खो दिया है। कई आंकड़े बताते हैं कि जब पत्नियां घर की कुल आय का 40% से ज्यादा कमाने लगती हैं, तो पुरुष ज्यादा तनाव महसूस करने लगते हैं। असल मुद्दा घर खरीदने का नहीं, बल्कि उस घर से जुड़े सामाजिक प्रतीक का है, जो लंबे समय से पुरुषों के एकाधिकार का हिस्सा रहा है।
खबरें और भी

(AI Generated Image
शोषण के मामले बढ़ जाते हैं
जब महिलाएं पैसे और इज्जत के मामले में आगे निकल जाती हैं, तो पुरुषों में बेवफाई और भावनात्मक या शारीरिक शोषण करने की दर भी बढ़ जाती है। वे छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा जाहिर करने लगते हैं और रिश्ते में अपनी पारंपरिक भूमिका को खतरे में देखने लगते हैं।
पैसे के अलावा रिश्ते में क्या?
एक लंबे समय तक महिलाओं को बैंक खाता खोलने या अपने नाम पर संपत्ति रखने का कानूनी अधिकार नहीं था, जिसकी वजह से वे पूरी तरह पुरुषों पर निर्भर थीं। वहीं आज जब महिलाएं बिना किसी समझौते के अपने दम पर आगे बढ़ रही हैं, तो पुरुष इस नए बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
उन्हें समझ नहीं आता कि अगर महिला को उनके पैसे की जरूरत नहीं है, तो वे पैसे के अलावा इस रिश्ते में और क्या योगदान दे सकते हैं। अजीब तर्क भी दिए जाते हैं कि अगर घर भी महिला ही खरीद लेगी, तो पुरुष के लिए क्या बचेगा?
आजादी और सुकून चुन रही महिलाएं
इस कड़वे सामाजिक अनुभव और पुरुषों की असुरक्षा का सामना करने के बजाय, अब कई महिलाओं ने मैट्रीमोनी साइट्स और डेटिंग ऐप्स से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। वे किसी ऐसे रिश्ते में घुटने के बजाय अपनी आजादी और मानसिक सुकून को चुन रही हैं।