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    डेटिंग भी अब लगने लगी है ऑफिस के काम जैसी बोझिल, क्यों युवा हो रहे हैं ‘डेटिंग बर्नआउट’ का शिकार

    Updated: Thu, 19 Mar 2026 11:01 AM (IST)

    डेटिंग ऐप्स पर नए लोगों से मिलना, बात करना और फिर अलग हो जाना मानसिक रूप से काफी थकाने वाला है, जिसे डेटिंग बर्नआउट कहते हैं। ...और पढ़ें

    डेटिंग ऐप्स बढ़ा रहे हैं मानसिक थकान? (Picture Courtesy: Freepik)

    डेटिंग ऐप्स बढ़ा रहे हैं मानसिक थकान? (Picture Courtesy: Freepik)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में परफेक्ट पार्टनर की तलाश केवल एक स्वाइप दूर है। तमाम डेटिंग ऐप्स पर आपको अपनी पसंद जैसे कई मैच मिल जाएंगे, लेकिन क्या आपने कभी महसूस किया है कि डेटिंग ऐप्स पर घंटों बिताने के बाद भी आपको खुशी महसूस नहीं हो रही है, बल्कि खालीपन, चिड़चिड़ापन या थकान महसूस हो रही है?  

    इसे ही डेटिंग बर्नआउट कहते हैं। डेटिंग ऐप्स पर नए लोगों से मिलने, खुद को अपने परफेक्ट दिखाना और फिर रिजेक्शन का सामना करना मानसिक रूप से काफी थकाने वाला हो सकता है। इसलिए कई युवा अब डेटिंग बर्नआउट का भी शिकार हो रहे हैं। आइए समझते हैं इस बारे में। 

    डेटिंग बर्नआउट क्या है?

    आसान शब्दों में कहें तो जब डेटिंग का उत्साह एक काम या बोझ जैसा लगने लगे, तो उसे डेटिंग बर्नआउट कहते हैं। यह वैसी ही थकान है जैसी ज्यादा काम करने से ऑफिस में महसूस होती है। इसमें व्यक्ति को लगने लगता है कि वह एक साइकिल में फंस गया है। यानी प्रोफाइल बनाना, मैच ढूंढना, बातचीत शुरू करना, पहली डेट पर जाना और फिर सब कुछ खत्म हो जाना।

    Dating Burnout Signs

    (AI Generated Image)

    युवाओं पर इसका प्रभाव

    आज की युवा पीढ़ी इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित है। 

    • आत्म-सम्मान में कमी- बार-बार घोस्टिंग या रिजेक्शन का सामना करने से युवाओं को अपनी काबिलियत पर शक होने लगता है। उन्हें लगता है कि शायद उनमें ही कोई कमी है।
    • मानसिक तनाव और एंग्जायटी- हर बार एक नए व्यक्ति के सामने अपनी पूरी कहानी दोहराना और फिर निराशा हाथ लगना तनाव का कारण बनता है। यह डेटिंग फटीग एंग्जायटी और डिप्रेशन की ओर भी ले जा सकता है
    • मल्टीपल ऑप्शन- डेटिंग ऐप्स के एल्गोरिदम युवाओं को यह यकीन दिला देते हैं कि उनके पास ऑप्शन्स की भरमार है, जिसे चॉइस ओवरलोड कहा जाता है। इस चक्कर में वे कभी किसी एक व्यक्ति के साथ गहरा रिश्ता नहीं बना पाते।
    • भावनाओं का खत्म होना- लगातार असफलता के बाद, कई लोग इमोशनली नम्ब हो जाते हैं। वे नए लोगों से मिलते तो हैं, लेकिन किसी से जुड़ने की इच्छा खो देते हैं।

    इस बर्नआउट से कैसे बचें?

    • डेटिंग डिटॉक्स- कुछ समय के लिए सभी डेटिंग ऐप्स को अनइंस्टॉल कर दें। यह ब्रेक आपके दिमाग को रिसेट करने में मदद करेगा।
    • क्वालिटी बनाम क्वांटिटी- हर किसी से मैच करने के बजाय, केवल उन लोगों पर ध्यान दें जिनके विचार आपसे मिलते हों।
    • खुद पर ध्यान दें- डेटिंग को अपनी जिंदगी का सेंटर बनाने के बजाय अपनी हॉबी, करियर और दोस्तों को समय दें।
    • ऑफलाइन मीटिंग- कभी-कभी किसी वर्कशॉप, जिम या सामाजिक कार्यक्रम में लोगों से मिलना ऐप्स के मुकाबले ज्यादा असली और कम थकाऊ होता है।

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