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    रात को सोने से पहले क्यों दिमाग में घूमने लगती हैं दुनियाभर की बातें, क्या है ओवरथिंकिंग की असली वजह?

    Updated: Thu, 28 May 2026 02:45 PM (IST)

    क्या बिस्तर पर लेटते ही आपका दिमाग भी तेजी से दौड़ने लगता है। रात को ओवरथिंकिंग के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। ...और पढ़ें

    क्या है रात में ज्यादा ओवरथिंकिंग की वजह? (Picture Courtesy: Freepik)

    क्या है रात में ज्यादा ओवरथिंकिंग की वजह? (Picture Courtesy: Freepik)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। रात को हम दिनभर की थकान भूलकर आराम करना चाहते हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसी समय हमारे दिमाग में सबसे ज्यादा शोर रहता है। जैसे ही कमरे की लाइट्स बंद होती है, हमारे दिमाग में दुनियाभर के ख्यालों की बाढ़ आ जाती है। 

    आंख बंद करके हम भविष्य की चिंता और पुरानी यादों में खो जाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सोते समय आप ओवरथिंक क्यों करते हैं? हमने इस सवाल का जवाब डॉ. गायत्री भाटिया (सीनियर कंसल्टेंट, सायकाइट्री, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानने की कोशिश की। आइए जानें ऐसा क्यों होता है। 

    बाहरी दुनिया का शांत होना

    दिन के समय हमारा ऑफिस के काम, फोन कॉल्स, सोशल मीडिया, बातचीत और ट्रैफिक के शोर में उलझा रहता है। इन सबके बीच हमें सोचने का वक्त ही नहीं मिलता, लेकिन रात में जब बाहरी शोर और डिजिटल नोटिफिकेशन्स बंद हो जाते हैं, तो दिमाग को बाहरी दुनिया से ब्रेक मिलता है। जब ध्यान बाहर लगना बंद हो जाता है, तो यह हमारे अंदर दबी भावनाओं पर फोकस करता है, जिससे हमें छोटी परेशानी भी बड़ी लगती है। 

    Stress and white hair

    (AI Generated Image

    इमोशनल ओवरलोड

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपने इमोशन्स को प्रोसेस करने का समय नहीं निकालते। जब भी कोई तनाव या दुख होता है, हम काम या सोशल मीडिया से अपना ध्यान भटकाते हैं, लेकिन रात के समय हमारा दिमाग इन अधूरी और अनसुलझी भावनाओं को बाहर निकालता है। साइकोलॉजी में इसे रुमिनेशन कहा जाता है, यानी एक ही नेगेटिव बात को बार-बार दोहराना। दिनभर का दबा हुआ यह तनाव ही रात की बेचैनी बनकर उभरता है।

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    गैजेट्स का इस्तेमाल 

    सोने से ठीक पहले फोन, लैपटॉप या टीवी देखना इस समस्या को और गंभीर बना देता है। इन स्क्रीन्स से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के बनने को रोकती है। इससे हमारा दिमाग कन्फ्यूज हो जाता है कि अभी दिन है और वह पूरी तरह एलर्ट रहता है और हम ओवरथिंकिंग के जाल में फंसते जाते हैं।

    इस ओवरथिंकिंग का असर क्या होता है?

    सोने से पहले लगातार ओवरथिंकिंग करना सिर्फ नींद ही नहीं खराब करता, बल्कि स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाता है। जब आप सो नहीं पाते, तो मानसिक तनाव बढ़ता है। अगले दिन चिड़चिड़ापन, फोकस में कमी और थकान महसूस होती है। लंबे समय तक ऐसा होने से एंग्जायटी, कमजोर इम्युनिटी और दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

    रात को ओवरथिंकिंग से कैसे बचें?

    • डिजिटल डिटॉक्स- सोने से कम से कम 30-45 मिनट पहले फोन और स्क्रीन से दूरी बना लें।
    • जर्नलिंग- सोने से पहले डायरी में अपने उन विचारों को लिख लें जो आपको परेशान कर रहे हैं। 
    • ब्रीदिंग एक्सरसाइज- गहरी और धीमी सांस लेने से हमारे नर्वस सिस्टम को सुरक्षित महसूस होता है और दिमाग शांत रहता है।
    • कैफीन से दूरी- शाम के बाद चाय या कॉफी न पिएं, क्योंकि यह दिमाग को एलर्ट रखती है।