क्यों 'लेगोंग नृत्य' को देखने दूर-दराज से Bali पहुंचते हैं टूरिस्ट? बिना इसके समझिए अधूरी है आपकी ट्रिप
इंडोनेशिया का बाली द्वीप अपनी शानदार कला और संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। ...और पढ़ें

क्या आप जानते हैं कैसे शुरू हुआ बाली का लेगोंग नृत्य? (Image Source: AI-Generated)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इंडोनेशिया का बाली द्वीप अपनी बेजोड़ संस्कृति के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। इसी शानदार विरासत का एक अनमोल मोती है 'लेगोंग नृत्य'। यह बाली का एक पारंपरिक शास्त्रीय नृत्य है, जो अपने खास अंदाज और भावनाओं को मंच पर हूबहू पेश करने की कला के लिए मशहूर है।

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महलों से लेकर मंदिरों तक का सफर
इस कला का जन्म बहुत पहले प्राचीन काल में हुआ था। शुरुआत में इसे केवल राजाओं के दरबारों और बड़े शाही आयोजनों में ही पेश किया जाता था, लेकिन वक्त के साथ यह आम जनता के बीच भी लोकप्रिय हो गया। आज यह स्थानीय मंदिरों में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है और पूरी दुनिया में बाली की मुख्य पहचान माना जाता है।
बीमारी में देखा गया वह अनोखा सपना
इस नृत्य की शुरुआत से जुड़ी एक बहुत ही दिलचस्प लोककथा है। कहा जाता है कि सुकावती इलाके के एक राजकुमार एक बार बहुत बीमार पड़ गए थे। अपनी उस बीमारी के दौरान उन्होंने एक सपना देखा, जिसमें 'गमेलन' संगीत बज रहा था और दो युवतियां उस धुन पर नाच रही थीं। जब राजकुमार की तबीयत ठीक हुई, तो उन्होंने अपने उसी सपने को हकीकत में बदलने का फैसला किया और ऐसे नृत्यों का आयोजन शुरू करवाया।
इशारों में छिपी होती है पूरी कहानी
लेगोंग की सबसे खास बात इसकी सधी हुई और बेहद बारीक गतियां हैं। इसमें हिस्सा लेने वाली नर्तकियां अपने हाथों, उंगलियों और आंखों के इशारों से अपने जज्बात बयान करती हैं। उनके हर एक शारीरिक इशारे का एक खास मतलब होता है, जिससे पूरी कहानी बिना कुछ बोले ही दर्शकों के दिलों तक पहुंच जाती है। अक्सर इस नृत्य को पेश करने के लिए छोटी उम्र की बच्चियों को खास ट्रेनिंग दी जाती है।
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पारंपरिक संगीत और शाही पहनावा
इस डांस में पूरी तरह से जान डालने का काम 'गमेलन' नाम का पारंपरिक संगीत करता है। यह खास संगीत धातु से बने कई वाद्य यंत्रों को एक साथ बजाकर पैदा किया जाता है, जो नृत्य के भावों को एकदम जीवंत कर देता है। इसके साथ ही, नर्तकियों का पहनावा भी दर्शकों का ध्यान खींचता है। वे पारंपरिक बाली कपड़े पहनती हैं, जिन्हें सुनहरे आभूषणों और सिर पर सजे एक बेहद खूबसूरत मुकुट से निखारा जाता है।
मनोरंजन से बढ़कर है यह कला
लेगोंग केवल लोगों का मन बहलाने का साधन नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक ज्ञान बांटने का भी एक सशक्त तरीका है। इस नृत्य के जरिए पुरानी पौराणिक कथाओं, प्राचीन घटनाओं और राजाओं की कहानियों को मंच पर दिखाया जाता है। यही वजह है कि दुनिया के कोने-कोने से आने वाले पर्यटक इस नृत्य को देखकर बाली की मान्यताओं और उसकी पुरानी परंपराओं को बेहद करीब से समझ पाते हैं।