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    क्या बच्चे सच में हमारी जिंदगी में खुशियां लाते हैं? रिसर्च में दावा- फीका पड़ जाता है रोमांस

    Updated: Sun, 14 Jun 2026 03:33 PM (IST)

    हमेशा से कहा जाता है कि बच्चे घर में खुशियां लेकर आते हैं। समाज की उम्मीदों से लेकर फिल्मों तक, हर जगह माता-पिता बनने के एहसास को बहुत ही खूबसूरत और ख ...और पढ़ें

    टूटता रिश्ता बचाने के लिए बेबी प्लान करने की न करें भूल (Image Source: AI-Generated)

    टूटता रिश्ता बचाने के लिए बेबी प्लान करने की न करें भूल (Image Source: AI-Generated)

    HighLights

    1. बच्चे होने से खुशी की गारंटी नहीं मिलती

    2. पेरेंटिंग से पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव बढ़ सकता है

    3. पेरेंटिंग को अपनी खुशी का साधन न समझें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हमेशा से हमें यही बताया गया है कि बच्चों की किलकारियों से घर में खुशियां आती हैं। समाज और फिल्मों ने भी माता-पिता बनने के सफर को इतना 'परफेक्ट' और जादुई बना दिया है कि हर कोई इसे जिंदगी का सबसे खूबसूरत पड़ाव मान लेता है, लेकिन सच तो ये है कि बच्चों की परवरिश करना कोई बच्चों का खेल नहीं है। पेरेंटिंग के दौरान हर वक्त खुश रहने वाली बात हकीकत से काफी दूर है।

    जी हां, इसमें कोई शक नहीं कि माता-पिता बनने का अपना एक अलग अहसास है, लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि असल जिंदगी रुपहले पर्दे जैसी बिल्कुल नहीं होती।

    baby planning

    (Image Source: AI-Generated)

    खुशी की गारंटी नहीं है बच्चा होना

    शायद आपको जानकर हैरानी हो, लेकिन यह आम सोच बिल्कुल गलत है कि बच्चा पैदा होने से जिंदगी में अपने आप स्थायी खुशी और संतुष्टि आ जाती है। कई बार यह फैसला आपकी उम्मीदों के बिल्कुल उलट काम कर सकता है।

    'इवोल्यूशनरी साइकोलॉजी' जर्नल में पब्लिश हुई एक नई स्टडी ने इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया है। रिसर्च में यह बात सामने आई है कि माता-पिता बनने से इंसान की खुशी या लाइफ में संतुष्टि का ग्राफ ऊपर नहीं जाता। इसके बजाय, यह पति-पत्नी के रोमांटिक रिश्ते में तनाव जरूर पैदा कर सकता है।

    रिश्ते सुधारने के लिए बच्चे का सहारा?

    आखिर एक इंसान बच्चे को दुनिया में क्यों लाता है? समाज के दबाव या जीवन के किसी बड़े लक्ष्य के अलावा, इसके पीछे कई छिपी हुई वजहें भी होती हैं। कई कपल्स अपना टूटता हुआ रिश्ता बचाने के लिए या उसमें स्थिरता लाने के लिए बेबी प्लान करते हैं। कुछ लोग यह मान बैठते हैं कि बच्चा होने के बाद उनका लापरवाह या गैर-जिम्मेदार पार्टनर अचानक से बदल जाएगा और रिश्ते को लेकर सीरियस हो जाएगा।

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    हालांकि, स्टडी इन सभी बातों को सिरे से खारिज करती है। बच्चों के पास कोई जादुई ताकत नहीं होती कि वो पैदा होते ही आपके सारे इमोशनल खालीपन को भर दें। यूनिवर्सिटी ऑफ निकोसिया के एक रिसर्चर ने इस स्टडी पर बात करते हुए साफ किया, "हमारे नतीजे इस बात का बिल्कुल भी समर्थन नहीं करते कि पेरेंटिंग से इंसान के अंदर सकारात्मक भावनाएं या जीवन की संतुष्टि बढ़ती है।"

    रोमांटिक रिश्ते पर पड़ता है सीधा असर

    रिसर्च के मुताबिक, बच्चा होने का इंसान की खुशी पर कुल मिलाकर असर 'न्यूट्रल' ही रहता है, लेकिन इसका एक बड़ा नुकसान यह है कि माता-पिता के बीच का आपसी प्यार और उनका रोमांटिक बॉन्ड प्रभावित हो सकता है। जिम्मेदारियों और तनाव के बोझ के कारण कपल्स के बीच की दूरियां बढ़ने का खतरा रहता है।

    Parenting study

    (Image Source: AI-Generated)

    क्या है इस पूरी रिसर्च का निचोड़?

    अगर आप सोच रहे हैं कि यह स्टडी बच्चों के खिलाफ है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। इस रिसर्च का मुख्य उद्देश्य हमें पेरेंटिंग की असलियत से रूबरू कराना है:

    • खुशी का लेवल बराबर: रिसर्च के प्रयोग में यह साबित हुआ कि माता-पिता और बिना बच्चों वाले लोगों की खुशी और जीवन की संतुष्टि का स्तर लगभग एक बराबर ही होता है। बस माता-पिता को अपनी जिंदगी में थोड़ा ज्यादा 'मकसद' महसूस होता है, लेकिन यह फर्क भी बहुत ही मामूली है।
    • खुद की खुशी का जरिया नहीं: एक नए इंसान को दुनिया में लाना और उसकी परवरिश करना आपकी अपनी भावनात्मक जरूरतों से कहीं ऊपर है।
    • जिम्मेदारी को समझें: पेरेंटिंग को अपनी खुशी हासिल करने का कोई साधन मानने के बजाय, इसे देखभाल, अनुशासन और कमिटमेंट से जुड़ी एक गंभीर जिम्मेदारी के रूप में देखना चाहिए।

    माता-पिता बनना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन हमें इसे लेकर थोड़ा प्रैक्टिकल होने की जरूरत है। बच्चा पैदा करने को 'खुशियां पाने का जादुई तरीका' मानना अब बंद कर देना चाहिए।

    Source: Evolutionary Psychology

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