खराब रिश्ते को ढोने से लाख गुना अच्छा है सिंगल रहना, विज्ञान ने भी लगा दी मुहर
एक नए शोध के अनुसार, खराब रिश्ते में रहने से बेहतर है अकेला रहना। यह अध्ययन बताता है कि रिश्ते की गुणवत्ता ही खुशी का फैसला करती है, न कि सिर्फ रिश्ते ...और पढ़ें

खराब रिश्ते से बेहतर है अकेलापन (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बचपन से ही हमने 'परफेक्ट लव स्टोरी' और 'हैप्पी एंडिंग' की न जाने कितनी कहानियां सुनी हैं। हमें अक्सर यही समझाया जाता है कि जिंदगी का सबसे अहम पड़ाव एक जीवनसाथी तलाशना है, लेकिन क्या अकेलेपन के डर से किसी भी रिश्ते में बंध जाना सही है?
'पर्सनैलिटी एंड इंडिविजुअल डिफरेंसेस' जर्नल में छपी एक नई और गहरी रिसर्च इस पुरानी सोच को पूरी तरह से नकारती है। आइए जानते हैं कि विज्ञान इस बारे में क्या कहता है।

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रिश्ते में होने से ज्यादा जरूरी है 'रिश्ते में दम होना'
हमारा समाज सिंगल लोगों पर हमेशा 'सेटल' होने का दबाव बनाता है। लेकिन विज्ञान की दुनिया की सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।
इस विषय पर यूनिवर्सिटी ऑफ निकोसिया के डॉ. मेनेलॉस एपोस्टोलौ और हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ यरुशलम के प्रोफेसर एलियाकिम किस्लेव की टीम ने एक अहम अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने जर्मनी के लगभग 12,000 लोगों के 'पेयरफैम स्टडी' के 13 अलग-अलग चरणों के डेटा को खंगाला।
शीशे की तरह साफ हो गई बात
अगर आप एक बहुत अच्छे और प्यार भरे रिश्ते में हैं, तो यकीनन आपकी खुशियां बढ़ जाती हैं। लेकिन, अगर आपका रिश्ता सिर्फ कामचलाऊ या खराब है, तो वह आपकी मानसिक शांति छीन लेता है। ऐसे रिश्ते में घुटने से कहीं ज्यादा सुकून भरा है अपना अकेलापन अपनाना।
क्यों भारी पड़ती है गलत रिश्ते की कीमत?
प्रोफेसर एलियाकिम किस्लेव बताते हैं कि इस रिसर्च की सबसे खास बात यह थी कि इसमें लोगों की खुशियों को कई सालों तक परखा गया, खासकर तब जब उनका 'रिलेशनशिप स्टेटस' बदला।
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नतीजा यही निकला कि सिर्फ 'कपल' कहलाना ही आपकी इमोशनल हेल्थ के लिए काफी नहीं है। आपके रिश्ते की गुणवत्ता ही यह तय करती है कि आप कितने खुश रहेंगे:
- खराब या औसत रिश्ता: ऐसे रिश्तों में फंसे लोगों की जीवन के प्रति संतुष्टि और सकारात्मक ऊर्जा, सिंगल लोगों की तुलना में बहुत कम थी।
- बेहतरीन रिश्ता: वहीं जो लोग एक स्वस्थ और मजबूत रिश्ते में थे, वे सिंगल लोगों के मुकाबले कहीं ज्यादा खुशहाल पाए गए।
यानी, सिर्फ रिश्ते के नाम पर किसी रिश्ते को खींचना समझदारी नहीं है।

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अकेलेपन को लेकर किसका क्या है हाल?
अध्ययन में यह भी देखा गया कि 'सिंगल' होने के एहसास को पुरुष और महिलाएं अलग-अलग तरीके से लेते हैं:
- जब बात नकारात्मक भावनाओं की आती है, तो सिंगल होने पर महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ऐसी भावनाएं थोड़ी ज्यादा देखी गईं। हालांकि, यह अंतर बहुत बड़ा नहीं था।
- दूसरी तरफ, अगर बात 'सुरक्षा की भावना' की करें, तो सिंगल पुरुषों की तुलना में सिंगल महिलाएं खुद को थोड़ा कम सुरक्षित महसूस करती हैं।
क्या है इस पूरी रिसर्च का सबक?
इस रिसर्च का सबसे बड़ा सबक यही है कि 'घर बसाने' और मजबूरी में 'समझौता करने' में बहुत बड़ा फर्क होता है। किसी के साथ मिलकर एक खूबसूरत जिंदगी बनाना आपका अपना चुनाव होना चाहिए, लेकिन सिर्फ इसलिए किसी के साथ जुड़ जाना क्योंकि आपको अकेले रहने से डर लगता है, यह आपके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए एक बहुत बुरा सौदा है। इसलिए, अगर आपके जीवन में कोई 'फेयरी-टेल' हैप्पी एंडिंग नहीं है, तो भी घबराने की कोई बात नहीं है। कभी-कभी अकेले चलना ही सबसे सही फैसला होता है।