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पुराने दर्द को भुलाकर दोबारा घर बसाने को राजी हो रहे भारतीय, 30% शादियों में एक पार्टनर तलाकशुदा

Published: Tue, 09 Jun 2026 07:54 AM (IST)

भारतीय समाज में तलाक और दूसरी शादी को लेकर नजरिया बदल रहा है, जहां लोग जीवन को नया मौका दे रहे हैं।

भारत में क्यों तेजी से बढ़ रहा है दूसरी शादी का चलन? (Image Source: AI-Generated)

भारत में क्यों तेजी से बढ़ रहा है दूसरी शादी का चलन? (Image Source: AI-Generated)

HighLights

  1. दूसरी शादी के लिए तलाश में 43% की वृद्धि

  2. हर छठी शादी अब एक दूसरी शादी होती है

  3. परिवार और समाज का नजरिया सकारात्मक रूप से बदला

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। एक खूबसूरत दुल्हन अपनी शादी के लिए तैयार हो रही है। उसके इर्द-गिर्द माता-पिता और सहेलियों के साथ-साथ उसकी छोटी सी बेटी भी उसे सजाने में खुशी-खुशी मदद कर रही है। वहीं, दूल्हा भी अपनी नई जीवनसाथी के साथ उसकी बच्ची को पूरे प्यार और सम्मान के साथ अपना रहा है। देश के एक जाने-माने ज्वेलरी ब्रांड के वेडिंग कलेक्शन का यह विज्ञापन सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि हमारे समाज में तलाक और दूसरी शादी को लेकर बदलती हकीकत की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर है।

अब भारत में किसी रिश्ते का टूटना या जीवनसाथी का साथ छूट जाना जिंदगी का 'फुल-स्टॉप' नहीं माना जाता। लोग यह समझ चुके हैं कि एक असफल रिश्ता जीवन का अंत नहीं है। अब दूसरी शादी सिर्फ कोई सामाजिक फर्ज निभाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी व्यक्तिगत खुशी, भावनात्मक संतुलन और जिंदगी को एक नया मौका देने के लिए की जा रही है।

second marriage in India

(Image Source: AI-Generated)

अब छिपकर नहीं, हक से चुन रहे हैं हमसफर

चाहे महानगर हों या छोटे शहर और गांव, अब विधवा, विधुर और तलाकशुदा लोग दोबारा अपना हमसफर चुनने में हिचकिचाते नहीं हैं। दूसरी शादी अब समाज को दिखाने का कोई फर्ज नहीं है। यह अपनी खुशी, मानसिक शांति और जीवन को एक और मौका देने का फैसला है। आज के समय में 'मिश्रित परिवार' का कॉन्सेप्ट भी काफी सामान्य हो गया है, जहां बच्चे, नए रिश्ते और साझा जिम्मेदारियां मिलकर एक खुशहाल परिवार की नींव रख रहे हैं।

हर 6 में से 1 शादी है 'दूसरी शादी'

मैट्रिमोनियल साइट 'जीवनसाथी' की एक ताजा रिपोर्ट इस बदलते ट्रेंड की गवाही देती है। पिछले 10 सालों के भीतर दूसरी शादी के लिए पार्टनर ढूंढने वालों की तादाद में 43% का भारी उछाल आया है।

  • 2016 के आंकड़े: उस वक्त 11% लोग दूसरी शादी की तलाश में थे।
  • 2025 के आंकड़े: अब यह संख्या बढ़कर 16% हो चुकी है।

आज सफल होने वाली हर छठी शादी दरअसल एक Second Marriage ही होती है।

पहली बार शादी करने वाले भी दे रहे हैं साथ

हैरानी की बात यह है कि तलाकशुदा लोगों के साथ घर बसाने में वो लोग भी पीछे नहीं हैं जिनकी यह पहली शादी है। लगभग 15% ऐसे लोग, जो पहली बार शादी के बंधन में बंध रहे हैं, तलाकशुदा प्रोफाइल में अपनी रुचि दिखा रहे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो शहरों में होने वाली 30% शादियों में कम से कम एक पार्टनर ऐसा होता है जिसकी पहले शादी हो चुकी होती है।

मैचमेकिंग ऐप 'रिबाउंस' के एक सर्वे में सामने आया है कि 28% तलाकशुदा व्यक्ति अपने पुराने दर्द को भुलाकर नई शुरुआत करने को पूरी तरह राजी हैं। टियर-1 शहरों में 35% से ज्यादा तलाकशुदा महिलाएं खास मैचमेकिंग ऐप्स के जरिए अपने लिए दूसरा मौका तलाश रही हैं। बता दें, रिश्ते की शुरुआत में ही 'कपल थेरेपी' को लेकर 41% लोग खुलकर चर्चा करते हैं।

जीवनसाथी खोजने के नए डिजिटल विकल्प

अब हमसफर की तलाश सिर्फ परिवारों या बिचौलियों के भरोसे नहीं है। दूसरी शादी के लिए इंटरनेट पर कई खास प्लेटफॉर्म मौजूद हैं, जैसे- सेकंडशादी.कॉम, डाइवर्सीमैट्रिमोनी.कॉम और सेकंडसूत्रा.कॉम। इसके अलावा, आम मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स और ऐप्स पर भी सेकेंड मैरिज के लिए अलग सेक्शन बनाए गए हैं। यही नहीं, तलाकशुदा लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खास डेटिंग ऐप्स भी चलन में आ चुके हैं।

अपनों का साथ और मैरिज काउंसलिंग का बढ़ता दायरा

कुछ सालों पहले तक शादी टूटने पर दोबारा घर बसाना काफी मुश्किल भरा होता था, लेकिन अब समाज का नजरिया पूरी तरह से बदल चुका है।

  • काउंसलिंग में बदलाव: 3 से 4 साल पहले जहां दूसरी शादी के लिए सलाह लेने वाले लोग न के बराबर थे, वहीं अब शादी से जुड़ी काउंसलिंग के लिए आने वाले हर 10 में से 2 या 3 लोग तलाकशुदा, विधुर या विधवा होते हैं।
  • परिवार का भरपूर सपोर्ट: सबसे सकारात्मक बदलाव यह है कि अब इन लोगों को अपने परिवारों का भी साथ मिल रहा है। कई मामलों में सास-ससुर खुद अपनी कम उम्र की विधवा बहू को दूसरी शादी करने की हिम्मत दे रहे हैं। वहीं, बड़ी उम्र के बुजुर्गों को भावनात्मक सहारे के लिए उनके अपने बेटे-बेटियां दोबारा शादी करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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