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    अपनों के साथ बॉन्डिंग मजबूत बनाता है 'स्लीपओवर', युवाओं के बीच बढ़ रहा है ट्रेंड

    Updated: Sat, 31 Jan 2026 10:59 AM (GMT+05:30)

    आज की दिखावटी डिजिटल दुनिया में 'स्लीपओवर' का ट्रेंड हमारी मेंटल हेल्थ के लिए किसी 'वरदान' से कम नहीं है। असल में, यह सिर्फ सोने या किसी के घर ठहहने क ...और पढ़ें

    जानिए क्यों बढ़ रहा है 'स्लीपओवर' का क्रेज (Image Source: AI-Generated)

    जानिए क्यों बढ़ रहा है 'स्लीपओवर' का क्रेज (Image Source: AI-Generated) 


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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपको अपने बचपन के वो दिन याद हैं जब दोस्तों के घर रात रुकना, देर रात तक बिना वजह हंसना और ढेर सारी बातें करना सबसे बड़ी खुशी होती थी? जैसे-जैसे हम बड़े हुए, काम और जिम्मेदारियों के बोझ ने हमसे वो मस्ती छीन ली।

    हालांकि, साल 2026 में यह ट्रेंड (Sleepover Trend) एक बार फिर जोर-शोर से लौट आया है। अब 30 से 40 साल के युवा भी अकेलेपन को दूर भगाने के लिए दोस्तों के साथ 'स्लीपओवर' का सहारा ले रहे हैं।

    Benefits of sleepovers for mental health

    (Image Source: AI-Generated) 

    मेंटल हेल्थ के लिए किसी वरदान से कम नहीं

    मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि आज की भागदौड़ भरी डिजिटल दुनिया में, जहां किसी से मिलना महज एक औपचारिकता बन गया है, वहां स्लीपओवर हमारी मेंटल हेल्थ के लिए किसी वरदान जैसा है। यह केवल दोस्तों के घर सोने के बारे में नहीं है, बल्कि उन अनौपचारिक और सुकून भरी बातों के बारे में है, जो किसी रेस्तरां में 2 घंटे के लंच या डिनर के दौरान मुमकिन नहीं हो पातीं।

    दिखावे की दुनिया में सुकून के पल

    अपनी किताब 'हैंगिंग आउट' में मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर शीला लिमिंग बताती हैं कि आज दोस्ती काफी हद तक दिखावटी हो गई है, जैसे सिर्फ वॉट्सएप पर रिप्लाई करना या औपचारिक कॉफी पर मिलना।

    इसके ठीक उलट, स्लीपओवर में समय की कोई पाबंदी नहीं होती। दोस्तों का साथ एक 'टॉनिक' जैसा काम करता है। यहां आप घंटों साथ बैठकर खामोशी में टीवी देख सकते हैं या फिर रात के 3 बजे अपनी पसंदीदा डिशेज पर चर्चा कर सकते हैं। यह वो आजादी है जो औपचारिक मुलाकातों में नहीं मिलती।

    भीतर के 'बच्चे' से जुड़ने का मौका

    मनोवैज्ञानिक डॉ. एमिली क्रॉस्बी के अनुसार, दोस्तों के साथ इस तरह वक्त बिताना हमें हमारे बचपन से फिर से जोड़ देता है। पुरानी यादों को ताजा करना बेहद सुखद होता है और यह हमें 'इमोशनल सिक्योरिटी' का एहसास कराता है। जब हम अपने दोस्तों के साथ सुरक्षित महसूस करते हैं, तो चिंता और घबराहट अपने आप कम हो जाती है।

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    भारत में भी बढ़ रहा चलन

    दोस्तों के साथ रात बिताने का यह तरीका अब एक बड़े बाजार का रूप भी ले रहा है:

    • लंदन के 'रॉयल लैंकेस्टर' जैसे पांच सितारा होटल 50,000 रुपये तक के स्लीपओवर पैकेज दे रहे हैं, जिसमें स्पा किट, लग्जरी पायजामे और कॉकटेल शामिल हैं।
    • स्लीपओवर हैशटैग वाले वीडियो का ट्रेंड होना यह साबित करता है कि लोग फिर से बच्चा बनकर जीना चाहते हैं।
    • भारत के बड़े महानगरों जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और पुणे में 'अकेलेपन की महामारी' से लड़ने के लिए फ्रेंड्स ग्रुप अब इसे एक संगठित रूप दे रहे हैं।

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