M K Stalin Result: जो स्टालिन के लिए बूथ मैनेज करता था; आज उसी ने दी पटखनी, तमिलनाडु CM की कोलाथुर से बड़ी हार
Kolathur Election Result 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में Chief Minister M.K. Stalin को कोलाथुर सीट से TVK उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने 8795 वोटों स ...और पढ़ें

कोलाथुर विधानसभा सीट रिजल्ट 2026। फाइल फोटो
HighLights
एमके स्टालिन कोलाथुर सीट पर जीत का चौका लगाएंगे?
TVK और AIADMK से मिल रही कड़ी चुनौती।
स्टालिन का लंबा राजनीतिक सफर और चुनावी इतिहास।
डिजिटल डेस्क, दिल्ली। (Updated 7:20PM) तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में DMK की बुरी हार हुई है। खास बात ये है कि मुख्यमंत्री MK Stalin अपनी सीट भी नहीं बचा पाए हैं। DMK का गढ़ रही कोलाथुर सीट से उन्हें विजय की पार्टी TVK के उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने 8795 वोटों से हरा दिया है।
कोलाथुर सीट से DMK की यह पहली हार (MK Stalin Loses Kolathur) है। 2011 में अस्तित्व में आई सीट से लगातार 15 साल एम के स्टालिन जीतकर विधायक बनते रहे हैं। 1996 में जे. जयललिता की हार के बाद यह पहली बार है, जब किसी सिटिंग मुख्यमंत्री को अपनी सीट गंवानी पड़ी है।
अपने ही पुराने सिपाही से मिली हार
स्टालिन को हराने वाले वीएस बाबू पहले (2006-2011) पुरसावक्कम सीट से DMK पार्टी के ही विधायक थे और 2011 के विधानसभा चुनाव में वह कोलाथुर सीट से MK स्टालिन के चुनाव के इंचार्ज थे, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ दी और AIADMK में शामिल हो गए।
हालांकि इसी साल 7 फरवरी 2026 को उन्होंने एक बार फिर पलटी मारी और विजय थलपति की पार्टी TVK में शामिल हो गए। अब इसी पार्टी से उम्मीदवार हैं। कोलाथुर सीट पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
स्टालिन ने कम मार्जिन से जीता था पहला चुनाव
कोलाथुर विधानसभा साल 2011 में विल्लिवक्कम का कुछ भाग और पुरासावक्कम विधानसभा को मिलाकर बनाई गई। जब से ये विधानसभा बनी है, तब से यहां के विधायक MK स्टालिन हैं।
खास बात ये है कि उन्होंने कोलाथुर विधानसभा का पहला चुनाव (Kolathur Assembly Election 2011) AIADMK उम्मीदवार सैदई दुराईस्वामी से मात्र 2734 के अंतर से जीता था, लेकिन इसके बाद साल 2016 में AIADMK उम्मीदवार जेसीडी प्रभाकर को 37,730 वोट से हराया और 2021 का चुनाव वह AIADMK के आदिराजराम से 70,384 वोटों से जीते थे।
खबरें और भी
10वां विधानसभा चुनाव, अब तक 7 बार जीत चुनाव
2011 के विधानसभा चुनावों से पहले, स्टालिन थाउजेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते थे। यहां से वह साल 1984 में अपना पहला चुनाव हार गए थे, लेकिन 1989 में वापसी की।
हालांकि 1991 का चुनाव वह फिर हार गए, लेकिन 2001 से अब तक वह अजेय थे। थाउजेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र से स्टालिन 4 बार चुनाव जीते और तीन बार कोलाथुर सीट से।
इस तरह वे अब तक 7 बार विधायक बन चुके हैं। इस दौरान वह चेन्नई के मेयर, पिता एम करुणानिधि की सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री और उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। वहीं, 2016 में नेता प्रतिपक्ष का पद संभाला और 2021 से राज्य के मुख्यमंत्री हैं।
खाटी राजनीतिक विरासत
तमिलनाडु की राजनीति में एम. के. स्टालिन का नाम दिग्गज नेताओं में शामिल है। वे तमिलनाडु के पांच बार के मुख्यमंत्री रहे एम. करुणानिधि और उनकी दूसरी पत्नी दयालु अम्मल के बेटे हैं। वर्तमान में एम.के. स्टालिन द्रमुक (डीएमके) पार्टी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
एम. के. स्टालिन के राजनीतिक करियर पर एक नजर
1967: 14 साल की उम्र में पार्टी के लिए प्रचार शुरू किया।
1973: स्टालिन को DMK की जनरल कमेटी के लिए चुना गया।
1976: आपातकाल के दौरान मीसा अधिनियम के तहत गिरफ्तार हुए।
1984: DMK की युवा शाखा के सचिव बने और पहला विधानसभा चुनाव हारे।
1989: स्टालिन पहली बार विधायक चुने गए।
1991: चुनाव में दूसरी बार हार का मुंह देखना पड़ा।
1996: चेन्नई के मेयर चुने गए।
2001: दूसरी बार चेन्नई के मेयर बने।
2006: चौथी बार विधायक चुने गए।
2009: तमिलनाडु के पहले उपमुख्यमंत्री बने.
2011: कोलाथुर से विधायक बने।
2016: तमिलनाडु विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बने।
2017: DMK के कार्यकारी अध्यक्ष चुने गए।
2018: एम. करुणानिधि के निधन के बाद DMK का अध्यक्ष पद संभाला।
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