तरनतारन में दर्दनाक हादसा; कोयले की गैस से पति-पत्नी और दो माह के मासूम की मौत, एक घायल
तरनतारन के अलीपुर गांव में कड़ाके की ठंड से बचने के लिए कमरे में कोयला जलाने से दर्दनाक हादसा हुआ। ...और पढ़ें

शवों के पास बैठे परिजन विलाप करते हुए।
HighLights
बंद कमरे में कोयले से दम घुटने से हादसा।
पति, पत्नी और दो माह के बच्चे की मौत।
एक व्यक्ति गंभीर, अस्पताल में भर्ती।
जागरण संवाददाता, तरनतारन। तरनतारन के पट्टी विधानसभा हलके के गांव अलीपुर में शनिवार की रात एक दर्दनाक हादसा घटा, जिसने पूरे इलाके को शोक में डूबो दिया। गांव के रहने वाले गुरसाहिब सिंह के परिवार के लिए यह रात काल बनकर आई, जब उनके बेटे अर्शदीप सिंह (21), बहू जशनदीप कौर (20) और दो माह के मासूम पोते गुरबाज सिंह की दम घुटने से मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार, कड़ाके की ठंड से बचाव के लिए अर्शदीप सिंह ने कमरे के अंदर लोहे के पीपे में लकड़ी के कोयले जलाकर रखे थे। रात को परिवार सो गया, लेकिन इसी दौरान पीपे से उठने वाला धुआं और कार्बन मोनोऑक्साइड कमरे में फैल गई। जहरीली गैस के कारण तीनों की मौके पर ही सांस रुक गई।
हादसे के वक्त कमरे में मौजूद अर्शदीप का साला किशन सिंह भी गैस के प्रभाव में आकर बेहोश हो गया। परिवार के सदस्यों ने सुबह जब दरवाजा खटखटाया और कोई जवाब नहीं मिला, तो परिजनों ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। अंदर का दृश्य देखकर सभी सदमे में आ गए। तीनों के शव बिस्तर पर पड़े थे, जबकि किशन सिंह अचेत अवस्था में मिला।
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मृतक परिवार की फाइल फोटो।
किशन की हालत नाजुक
परिजनों ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि किशन सिंह की हालत नाजुक है और उसका इलाज जारी है। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बंद कमरे में कोयला जलने से उत्पन्न कार्बन मोनोऑक्साइड ही मौत का कारण बनी।
गांव में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि अर्शदीप और जशनदीप की शादी को एक साल से भी कम समय हुआ था और हाल ही में उनका बेटा गुरबाज पैदा हुआ था। परिवार पर अचानक टूटा यह दुख का पहाड़ हर किसी को भावुक कर रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ठंड के दौरान कमरे में कोयला या अंगीठी जलाकर न सोएं, क्योंकि इससे जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।
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अंगीठी जलाने से पहले रहें अलर्ट
कोयला जलने से कार्बन के अलावा कई जहरीली गैसें निकलती हैं। इससे वातावरण से कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है और ऑक्सीजन का लेवल घट जाता है। यह कार्बन, ब्रेन पर सीधे असर डालता है और सांसों के जरिए बॉडी के अंदर भी पहुंचता है। ब्रेन पर असर होने से कमरे में सोया कोई भी इंसान बेहोश हो सकता है।
घर में वेंटिलेशन हो तभी हीटर जलाएं। हीटर जलाकर उसके पास न सोएं। यदि रात में हीटर, ब्लोअर या अंगीठी का इस्तेमाल करते हैं, तो सोने से पहले अंगीठी रूम से बाहर निकाल दें और हीटर या ब्लोअर का प्लग स्विच से निकाल दें।
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