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    बठिंडा में सरकारी विभागों की देनदारी पहुंची 40 करोड़ के पार, पावरकाम के सामने बड़ा वित्तीय संकट

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 07:15 AM (GMT+05:30)

    बठिंडा जिले में सरकारी विभागों पर मई 2026 तक पावरकाम के 40.10 करोड़ रुपये बिजली बिल बकाया हैं। सबसे अधिक देनदारी स्थानीय निकाय, ग्रामीण विकास एवं पंचा ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. बठिंडा में सरकारी विभागों पर 40.10 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया।

    2. स्थानीय निकाय, ग्रामीण विकास, जल विभाग पर सबसे अधिक देनदारी।

    3. पावरकॉम को वित्तीय संकट, बिजली खरीद और रखरखाव में दिक्कत।

    जागरण संवाददाता, बठिंडा। बठिंडा जिले में सरकारी विभागों पर पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड का बिजली बिल लगातार बढ़ता जा रहा है। मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार विभिन्न सरकारी विभागों पर करीब 40.10 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। सबसे अधिक बकाया राशि स्थानीय निकाय विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग तथा जल सप्लाई एवं सेनिटेशन विभाग पर है।

    इन विभागों पर करोड़ों रुपये की देनदारी होने के कारण पावरकाम के लिए राजस्व वसूली एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जारी सूची के अनुसार स्थानीय निकाय विभाग पर सबसे अधिक 15.67 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। इसके बाद ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग पर 10.12 करोड़ रुपये तथा जल सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग पर 9.24 करोड़ रुपये की देनदारी है।

    केवल इन तीन विभागों पर ही लगभग 35 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है, जो कुल बकाया राशि का अधिकांश हिस्सा है। सूची में अन्य श्रेणी में भी 1.63 करोड़ रुपये बकाया दर्शाया गया है। वहीं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पर 1.37 करोड़ रुपये का बिजली बिल लंबित है। खेल एवं युवा सेवा विभाग पर 0.93 करोड़ रुपये, जबकि सामान्य प्रशासन विभाग पर 0.34 करोड़ रुपये का बकाया दर्ज किया गया है।

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    कई विभागों की लाखों रुपए की राशि लंबित

    इसके अलावा हाउसिंग एवं शहरी विकास विभाग पर 0.21 करोड़ रुपये, स्कूल शिक्षा विभाग पर 0.12 करोड़ रुपये, कृषि विभाग पर 0.10 करोड़ रुपये तथा गृह मामले एवं जेल विभाग पर 0.08 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। कई अन्य विभागों पर भी लाखों रुपये की राशि लंबित है, जो मिलकर करोड़ों रुपये का आंकड़ा पार कर जाती है।

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    सूची में पशुपालन, सहकारिता, रक्षा सेवा कल्याण, वन एवं वन्य जीव संरक्षण, उद्योग एवं वाणिज्य, विधिक एवं विधायी मामले, बिजली, लोक निर्माण, तकनीकी शिक्षा, सिंचाई, सीवरेज बोर्ड तथा अन्य विभागों पर भी लाखों रुपये का बकाया दर्ज है। हालांकि कई विभाग ऐसे भी हैं, जिन पर इस अवधि में कोई बकाया नहीं दिखाया गया है। पावरकाम अधिकारियों के अनुसार सरकारी विभागों से समय पर भुगतान न मिलने से निगम के वित्तीय प्रबंधन पर असर पड़ता है।

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    बकाया बिलों से बढ़ीं पावरकाम की मुश्किलें

    बिजली खरीद, रखरखाव और नई परियोजनाओं के लिए पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराने में भी कठिनाई आती है। निजी उपभोक्ताओं के बकाया पर कार्रवाई करने वाला विभाग सरकारी संस्थानों से भुगतान के लिए संबंधित विभागों को लगातार पत्र और रिमाइंडर भेजता रहता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकारी विभाग समय पर बिजली बिल का भुगतान करें तो पावरकाम की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और बिजली व्यवस्था के सुधार के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। फिलहाल मई 2026 तक बठिंडा जिले के सरकारी विभागों पर 40.10 करोड़ रुपये की बकाया राशि यह संकेत देती है कि सरकारी विभागों में भी बिजली बिल भुगतान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

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