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    पंजाब में भाजपा की बदली रणनीति: अमित शाह ने धर्मांतरण रोकने और ड्रग्स खत्म करने का किया वादा

    Updated: Sun, 15 Mar 2026 04:14 PM (IST)

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मोगा की 'बदलाव रैली' में पंजाब के लिए भाजपा की नई रणनीति पेश की। उन्होंने धर्मांतरण रोकने के लिए कानून लाने, दो साल मे ...और पढ़ें

    मोगा रैली में बोलते हुए गृ़ह मंत्री अमित शाह।

    मोगा रैली में बोलते हुए गृ़ह मंत्री अमित शाह।

    HighLights

    1. धर्मांतरण रोकने के लिए कानून लाने का वादा।

    2. पंजाब से दो साल में ड्रग्स खत्म करने का संकल्प।

    3. सिख पहचान की सुरक्षा और नानकशाही कैलेंडर का सम्मान।

    कैलाश नाथ, चंडीगढ़। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मोगा के किल्ली चहलां में बदलाव रैली के दौरान पंजाब को लेकर भाजपा के नजरिए को बेहद बारीकी से उभारा। भाजपा ने रैली स्थल के बाहर महाराजा रणजीत सिंह का कटआउट लगाया। जो इस बात का संकेत था कि भाजपा पंजाब में महाराजा रणजीत सिंह का शासन लाना चाहती है।

    वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री ने नानकशाही कलेंडर के अनुसार पंजाब के लोगों को नव वर्ष की बधाई देकर सिखों की अलग पहचान जैसे मुद्दे को भी छुआ। ड्रग्स-गैंगेस्टरवाद के साथ-साथ पंजाब में बढ़ रहे धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून बनाने का मुद्दा उठाकर अमित शाह ने लोग और खासकर सिखों हितों की रक्षा करने का संदेश दिया।

    पंजाब में धर्मांतरण होने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही है। इसे लेकर निहंग सिंहों और मिशनरी के बीच अक्सर ही लड़ाइयों की घटनाएं सामने आ रही है। सिख संगठन भी धर्मांतरण का मुद्दा एसजीपीसी के पास उठा रहे हैं। क्योंकि धर्मांतरण सबसे अधिक अनुसूचित जाति से संबंधित लोग व सिखों के बीच हो रहा है। जिससे पंजाब का धार्मिक संतुलन भी गड़बड़ा रहा है।

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    पहला बिल धर्मांतरण को रोकने के लिए

    आरएसएस के विभिन्न विंग भले ही धर्मांतरण के खिलाफ काम कर रही हो लेकिन यह पहला मौका था जब किसी राजनीतिक पार्टी ने इसे राजनीतिक मंच से उभारा। केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा यह कहना कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी वोट बैंक के कारण इसे नजरंदाज करते हो लेकिन पंजाब वह धरती हैं जहां पर धर्मांतरण के खिलाफ गुरु तेग बहादुर जी ने अपनी शीश को कुर्बान किया।

    खबरें और भी

    अमित शाह ने सरकार बनने के बाद भाजपा पंजाब में पहला बिल धर्मांतरण को रोकने के लिए लेकर आएगी, इससे साफ हो गया हैं कि आने वाले समय में पार्टी का यह बड़ा एजेंडा होगा।

    ड्रग्स पर दो साल में खत्म करने की बात कही

    वहीं, ड्रग्स को खत्म करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री ने 2 साल का समय निर्धारित करके पंजाब की सबसे बड़ी समस्या पर राजनीतिक चोट की। क्योंकि दस वर्षों में दो बार ऐसे मौके आए जब नशे को खत्म करने का वादा करने वाली पार्टियों को लोगों ने फतवा दिया। 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 4 सप्ताह में ड्रग्स की कमर तोड़ने की बात की जबकि 2022 में अरविंद केजरीवाल ने 4 माह में नशा खत्म करने की बात की।

    हालांकि 9 वर्ष बीत जाने के बावजूद पंजाब की धरती से ड्रग्स खत्म नहीं हुआ है। पंजाब पुलिस एक साल से अधिक समय से नशे के विरुद्ध अभियान चला रही है।

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    सिख धर्म को साथ लेकर चलने की बात की

    14 मार्च नानकशाही कलेंडर के हिसाब से नए की शुरूआत पर अमित शाह ने पंजाब के लोगों को बधाई देकर खुद को सिखों की भावनाओं के सा जोड़ा। चूंकि हिंदू राष्ट्र की बात आगे आने पर सिख समुदाय अपनी अलग पहचान को लेकर हमेशा ही भाजपा को आशंकित नजर से देखता रहा है। सिख बुद्धिजीवी अक्सर ही अपनी अलग पहचान को लेकर चिंता जताते रहे हैं।

    जबकि अमित शाह ने नानकशाही कलेंडर को आगे बढ़ा कर इस बात के संकेत दिए कि अगर पंजाब में भाजपा की सरकार बनती हैं तो सिखों की अलग पहचान को कोई खतरा नहीं होगा। इसे भाजपा की बदली रणनीति ही माना जा रहा हैं। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हो या अमित शाह गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को इतिहास की सबसे बड़ी कुर्बानी बताते आ रहे हैं।

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