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    जुगाड़ रिक्शा/रेहड़ी पर रोक के खिलाफ जनहित याचिका खारिज; कोर्ट ने कहा- कानून में प्रविधान ही नहीं

    Updated: Thu, 29 Jan 2026 05:45 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जुगाड़ रिक्शा, रेहड़ी आदि संशोधित वाहनों को चलाने की अनुमति मांगने वाली यूनियन की जनहित याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा ...और पढ़ें

    मोटर वाहन कानून में ऐसे मोडिफाइड वाहनों को चलाने का कोई प्रविधान ही नहीं है।

    मोटर वाहन कानून में ऐसे मोडिफाइड वाहनों को चलाने का कोई प्रविधान ही नहीं है।

    HighLights

    1. हाईकोर्ट ने जुगाड़ रिक्शा/रेहड़ी पर जनहित याचिका खारिज की।

    2. कोर्ट ने कहा, मोटर वाहन कानून में ऐसे वाहनों का प्रावधान नहीं।

    3. यूनियन ने हजारों परिवारों की आजीविका का हवाला दिया था।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मोडिफाइड यानी जुगाड़ रिक्शा, रेहड़ी, घोड़ा-तांगा और ठेला जैसे अवैध रूप से बदले गए वाहनों को चलाने की अनुमति दिलाने की मांग करने वाली यूनियन को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने पंजाब रेहड़ा, घोड़ा तांगा ठेला रिक्शा मजदूर यूनियन की ओर से दाखिल जनहित याचिका को सख्त टिप्पणी के साथ खारिज कर दिया।

    मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष हुई। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब मोटर वाहन कानून में ऐसे मोडिफाइड वाहनों को चलाने का कोई प्रविधान ही नहीं है, तो उन्हें सड़क पर उतारने की इजाजत कैसे दी जा सकती है। पीठ ने याचिकाकर्ताओं को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि या तो वे अपनी याचिका वापस ले लें, अन्यथा अदालत भारी जुर्माना लगाकर इसे खारिज करेगी।

    कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद यूनियन ने अपनी याचिका वापस ले ली, जिसके पश्चात हाईकोर्ट ने उसे औपचारिक रूप से खारिज कर दिया।

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    परिवारों की रोजी-रोटी का दिया गया था हवाला

    यूनियन की ओर से दायर याचिका में दलील दी गई थी कि हाईकोर्ट के एक अन्य आदेश के बाद सरकार और पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जिससे हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। याचिका में कहा गया था कि करीब दो लाख लोग इन मोडिफाइड वाहनों के जरिए जीवनयापन कर रहे हैं। अगर इन्हें सड़क से हटा दिया गया तो वे भुखमरी की स्थिति में पहुंच जाएंगे।

    याचिकाकर्ता यूनियन ने यह भी कहा कि पंजाब सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में विफल रही है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण कई पढ़े-लिखे युवा, जिनमें बीटेक और ग्रेजुएट भी शामिल हैं, मजबूरी में जुगाड़ रेहड़ी/रिक्शा चला रहे हैं। पुलिस कार्रवाई के चलते उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।

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    पुनर्वास की उठाई गई थी मांग

    याचिका में मांग की गई थी कि ऐसे लोगों को राहत दी जाए, उनका पुनर्वास किया जाए और उन्हें मुआवजा भी दिया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि कानून के खिलाफ चल रहे वाहनों को किसी भी सूरत में संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

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