पंजाब में नहरों का पुनर्जीवन बना किसानों के लिए राहत, दशकों बाद राज्य के अखिरी छोर तक पहुंचा नहरी पानी
पंजाब सरकार ने रोपड़ नहरी नेटवर्क के पुनर्जीवन से सिंचित क्षेत्र में बड़ी बढ़ोतरी का दावा किया है। कई गांवों में करीब 40 वर्षों बाद नहरी पानी पहुंचा ह ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब सरकार द्वारा रोपड़ नहरी नेटवर्क के पुनर्जीवन के बाद राज्य के कई गांवों में दशकों से बंद पड़ा नहरी पानी दोबारा खेतों तक पहुंचने लगा है। सरकार का दावा है कि इससे खेती को नई मजबूती मिली है और किसानों की भूजल तथा ट्यूबवेल पर निर्भरता लगातार कम हो रही है।
जल संसाधन मंत्री बरिंद्र कुमार गोयल ने बताया कि इस पहल से खेती को नई मजबूती मिली है और किसानों की भूजल पर निर्भरता कम हो रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में रोपड़ नहरी नेटवर्क के तहत सिंचाई क्षेत्र 29,488 एकड़ से बढ़कर 85,447 एकड़ हो गया है।
साथ ही 3,882 एकड़ अतिरिक्त भूमि को भी सिंचाई के दायरे में लाया जा रहा है, जिससे कुल क्षेत्र 89,329 एकड़ तक पहुंच जाएगा। इसे सिंचाई सुधारों की दिशा में लगभग 200 प्रतिशत वृद्धि के रूप में देखा जा रहा है।
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2022 में 26.5% था नहरी पानी का प्रयोग
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार बनने के समय राज्य में नहरी पानी का उपयोग केवल 26.5 प्रतिशत था। इसके बाद सरकार ने बंद पड़ी नहरों, डिस्ट्रिब्यूटरीज़ और खालों की सफाई, मरम्मत और पुनर्जीवन का व्यापक अभियान शुरू किया। अब राज्य अपने लक्ष्य का लगभग 78 प्रतिशत कार्य पूरा कर चुका है।
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लुधियाना और मालेरकोटला क्षेत्र के रुड़का, पंडोरी, ढट्ट, बड़ूंदी, तुंगाहेड़ी और कंगनवाल सहित कई गांवों में करीब 40 वर्षों बाद खेतों तक नहरी पानी पहुंचा है। किसानों का कहना है कि इससे ट्यूबवेल और बिजली पर खर्च कम होगा।
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दायरे को बढ़ाने का प्रयास जारी
गोयल ने बताया कि समलाह, पहाड़पुर, लाखेड़ और मिधवां गांवों में लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के तहत स्टोरेज टैंक और अन्य ढांचा तैयार किया गया है। वहीं, श्री आनंदपुर साहिब क्षेत्र में अतिरिक्त भूमि को सिंचाई के दायरे में लाने का कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि यह पहल टिकाऊ कृषि, जल संरक्षण और किसानों की आर्थिक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।