लुधियाना के जगराओं नगर कौंसिल में त्रिशंकु जनादेश, कांग्रेस और AAP बराबरी पर; अब शुरू होगा जोड़तोड़ का खेल
जगराओं नगर कौंसिल चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने नौ-नौ ...और पढ़ें

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HighLights
जगराओं नगर कौंसिल में त्रिशंकु जनादेश।
कांग्रेस और AAP ने जीतीं 9-9 सीटें।
सत्ता गठन के लिए अब जोड़तोड़ शुरू।
जागरण संवाददाता, जगराओं। जगराओं नगर कौंसिल की 23 सीटों के लिए हुए चुनाव के परिणामों ने राजनीतिक तस्वीर को बेहद दिलचस्प बना दिया है। मतगणना पूरी होने के बाद घोषित नतीजों में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया। परिणामस्वरूप नगर कौंसिल में त्रिशंकु स्थिति बन गई है और अब सत्ता गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
चुनाव परिणामों के अनुसार कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ने नौ-नौ सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं भारतीय जनता पार्टी चार सीटें जीतने में सफल रही है, जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने बाजी मारी है। दूसरी ओर शिरोमणि अकाली दल इस चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल सका, जो पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
नगर कौंसिल में बहुमत हासिल करने के लिए 12 सीटों की आवश्यकता है। ऐसे में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ही बहुमत के आंकड़े से तीन सीट पीछे रह गई हैं। यही कारण है कि अब निर्दलीय और अन्य निर्वाचित सदस्यों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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निर्दलीय की भूमिका सत्ता समिकरण तय करेगी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में नगर कौंसिल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद को लेकर जोड़तोड़ और बैठकों का दौर तेज हो सकता है। दोनों प्रमुख दल बहुमत जुटाने के लिए प्रयास करेंगे। भाजपा के चार निर्वाचित सदस्यों और निर्दलीय उम्मीदवार की भूमिका सत्ता के समीकरण तय करने में अहम साबित हो सकती है।
पिछले नगर कौंसिल चुनाव में कांग्रेस ने कौंसिल पर अपना कब्जा जमाया था। ऐसे में कांग्रेस इस बार भी सत्ता बरकरार रखने का प्रयास करेगी। वहीं आम आदमी पार्टी राज्य में सत्तारूढ़ होने के कारण स्थानीय निकाय में भी अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए पूरी ताकत लगाएगी।
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अब बैठकों का दौर होगा शुरू
चुनावी नतीजों के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थकों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने से नगर कौंसिल की सत्ता का फैसला अब केवल चुनावी परिणामों से नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीतियों और गठजोड़ों से तय होगा।
फिलहाल जगराओं की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर कौंसिल की सत्ता किसके हाथ जाएगी। आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों, समर्थन जुटाने की कोशिशों और संभावित गठबंधनों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। नगर कौंसिल का यह त्रिशंकु जनादेश स्थानीय राजनीति को नए मोड़ पर ले जा सकता है।
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