मोगा-मुक्तसर में वकीलों ने सरकार के खिलाफ बजाया बिगुल; तीन दिन रहेंगे हड़ताल पर, मानसिक परेशान करने के आरोप
मोगा-मुक्तसर में वकीलों ने सरकार की कथित वकील विरोधी नीतियों के खिलाफ तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। बार एसोसिएशन मोगा के प्रधान सुखविंदर सिंह सिद्ध ...और पढ़ें
HighLights
वकील मुफ्त कानूनी सहायता नीति का विरोध कर रहे हैं।
एलएडीसी प्रणाली के दुरुपयोग पर गंभीर आरोप लगाए गए।
अदालतों के एक्शन प्लान से वकीलों पर दबाव बढ़ रहा।
जागरण संवाददाता, मोगा। सरकार की कथित वकील विरोधी नीतियों के खिलाफ पंजाब भर में चल रही तीन दिवसीय हड़ताल के तहत मोगा व मुक्तसर में भी वकीलों ने वीरवार को अदालतों का कामकाज पूरी तरह ठप रखा। बार एसोसिएशन मोगा के प्रधान एडवोकेट सुखविंदर सिंह सिद्धू की अगुवाई में वकीलों ने एकजुट होकर अपना रोष व्यक्त किया और सरकार से नीतियों पर पुनर्विचार की मांग की।
इस मौके पर एडवोकेट सुखविंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने की मौजूदा नीति के खिलाफ बार एसोसिएशन को सख्त आपत्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में नियुक्त लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी) प्रणाली के कारण न केवल कानूनी पेशे की गरिमा प्रभावित हुई है, बल्कि इसके नैतिक मानकों को भी नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में एलएडीसी से जुड़े कुछ लोग पीड़ितों या ग्राहकों से निजी फीस वसूल रहे हैं, जबकि उन्हें सरकार की ओर से वेतन दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, कुछ एलएडीसी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पीड़ितों को अनौपचारिक रूप से अपने सहयोगियों या पारिवारिक सदस्यों के पास भेज रहे हैं। आरोप लगाया गया कि जेलों और घरों में जाकर पीड़ितों से संपर्क किया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है।
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वकीलों पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा
एडवोकेट सिद्धू ने कहा कि अदालतों की ओर से एक्शन प्लान के नाम पर जल्द-जल्द तारीखें लगाकर वकीलों पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। इससे वकील अपने मुवक्किलों को प्रभावशाली और गुणवत्तापूर्ण कानूनी सेवा देने में असमर्थ हो रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामलों में देरी का कारण वकील नहीं, बल्कि अदालतों में पहले से लंबित मामलों की अधिकता है।
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बहस की तैयारी के लिए प्रयाप्त समय की मांग
उन्होंने मांग की कि एक्शन प्लान में बदलाव कर वकीलों को केस और बहस की तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। साथ ही ग्रामीण न्यायालय खोलने की योजना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले से स्थापित अदालतों में बुनियादी और तकनीकी ढांचे की कमी को दूर किया जाना चाहिए, क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में पंजाब में ग्रामीण न्यायालयों की आवश्यकता नहीं है।
इस अवसर पर जनरल सेक्रेटरी राजीव मित्तल, उप प्रधान परमिंदर सिंह, फाइनेंस सेक्रेटरी अंकित गुप्ता, ज्वाइंट सेक्रेटरी गुरप्रीत सिंह चाहल सहित बड़ी संख्या में वकील उपस्थित रहे।
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