27 जुलाई से मीन राशि में शनि वक्री: 11 दिसंबर तक परेशानियों से बचना है, तो जरूर करें अपनी राशि के मंत्र का जाप
द्रिक पंचांग के अनुसार, शनि देव 27 जुलाई 2026 को मीन राशि में वक्री हो चुके हैं और 11 दिसंबर 2026 तक इसी स्थिति में रहेंगे। इस दौरान मेष से मीन राशि क ...और पढ़ें

शनि मीन राशि में वक्री राशि अनुसार जानें मंत्र (Picture Credits- AI Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। द्रिक पंचांग के मुताबिक, न्याय और कर्म के देवता शनि ग्रह आज यानी 27 जुलाई 2026, सोमवार के दिन मीन राशि में वक्री हो चुके हैं। इस भाव में शनि देव 11 दिसंबर 2026 तक बने रहेंगे। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि का संबंध अनुशासन और जीवन के सबक से जुड़ा माना जाता है।
ऐसे में यह समय नई शुरुआत से ज्यादा अपने कर्मों और प्रयासों को परखने के लिए बेहद खास माना जाता है। शनि व्रकी के दौरान मेष से मीन राशि के जातकों को रोजाना खास मंत्रों का कम से कम 11 या 21 बार जाप जरूर करना चाहिए। आइए जानते हैं राशि अनुसार शनि से जुड़े मंत्रों के बारे में।
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मेष राशि (Aries)
- ऊं हं हनुमते नम:
वृषभ राशि (Taurus)
- ऊं शं शनैश्चराय नम:
मिथुन राशि (Gemini)
- ऊं बुं बुधाय नम:
कर्क राशि (Cancer)
- ऊं सोम सोमाय नम:
सिंह राशि (Leo)
- ऊं घृणि सूर्याय नम:
कन्या राशि (Virgo)
- ऊं बुं बुधाय नम:
तुला राशि (Libra)
- ऊं शं शनैश्चाराय नम:
वृश्चिक राशि (Scorpio)
- ऊं अं अंगारकाय नम:
धनु (Sagittarius)
- ऊं बृं बृहस्पतये नम:
मकर राशि (Capricorn)
- ऊं शं शनैश्चराय नम:
कुंभ राशि (Aquarius)
- ऊं शं शनैश्चराय नम:
मीन राशि (Pisces)
- ऊं बृं बृहस्पतये नम:
प्रत्येक व्यक्ति को अपनी राशि अनुसार श्रद्धा और विश्वास के साथ इन मंत्रों का जाप 108 बार जरूर करना ही चाहिए। ये सिर्फ मंत्र नहीं हैं, बल्कि धैर्य, कर्म और शनि देव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम है। हमें भूलना नहीं चाहिए कि, शनि देव दंड देने नहीं, बल्कि कर्मों का सही फल प्रदान करते हैं। सच्चे मन से किया गया जाप आपको अंदर से मजबूत बनाता है और जीवन में सही दिशा प्रदान करता है।
शनि वक्री के दौरान किन कार्यों से बचना चाहिए?
जब शनि वक्री हो तो उस दौरान व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति सचेत होना चाहिए, क्योंकि आपके द्वारा किए गए कर्म ही भविष्य के परिणामों को तय करते हैं। कोशिश करें कि, शनि वक्री के दौरान झूठ, गुस्सा, निंदा, लोभ और ईर्ष्या जैसी भावनाओं से बचें।
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कोई भी ऐसा करें नहीं करें, जो सामाजिक, आध्यात्मिक और व्यवहारिक नजरिए से गलत माना जाता हो। माता-पिता का सम्मान करने के साथ जानवरों की सेवा करना से शनि देव प्रसन्न हो जाते हैं।
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