बच्चे का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ है तो क्या होता है? यहां पढ़ें दोष शांति के उपाय
ज्योतिष के अनुसार, मूल नक्षत्र में जन्मे बच्चों पर कुछ विशेष प्रभाव पड़ सकते हैं। इन प्रभावों को कम करने और बच्चे के जीवन को सकारात्मक दिशा देने के लि ...और पढ़ें

मूल नक्षत्र में जन्मे बच्चे: स्वभाव और दोष शांति के प्रभावी उपाय (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। बच्चे के जन्म के समय और नक्षत्रों से कई बार उसके जीवन में अलग तरह के प्रभाव हो सकते हैं। ज्योतिष में मुख्य रूप से 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नक्षत्र के अलग-अलग स्वभाव होते हैं।
जहां कुछ नक्षत्र कठोर होते हैं, तो वहीं कुछ निर्मल स्वभाव के होते हैं। यही नहीं कुछ ऐसे भी नक्षत्र हैं जो ज्यादा उग्र माने जाते हैं उनमें से मूल नक्षत्र भी एक होता है।
अक्सर ऐसा सुना जाता है कि अगर बच्चे का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ है तो उसके जीवन में कुछ गलत प्रभाव भी हो सकते हैं। 27 में से 6 नक्षत्र मूल होते हैं जिनमें से मूल ज्येष्ठा, मूल आश्लेषा अश्वनी, रेवती और मघा प्रमुख हैं।
ऐसा कहा जाता है कि मूल में जन्में बच्चे सेहत से कमजोर हो सकते हैं और थोड़े गुस्सैल भी होते हैं। अगर आपके बच्चे का जन्म भी इस नक्षत्र में हुआ है तो उसके प्रभावों और उपाय के बारे में जानें।
बच्चे का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ है तो क्या होता है?
मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चों का स्वभाव अत्यंत आवेगी होता है, जिसका परिणाम जीवन में आगे चलकर संघर्षों के रूप में सामने आ सकता है। हलांकि, अपनी उच्च बौद्धिक क्षमता के कारण मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चे शिक्षा और करियर में हमेशा आगे रहते हैं। यह तभी संभव हो सकता है जब उनकी ऊर्जा को सही दिशा-निर्देश मिले। ऐसे बच्चों का मन अक्सर भटकावों की ओर आकर्षित होता है और कई बार सही दिशा न मिलने की वजह से इन्हें सफलता नहीं मिल पाती है।
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अगर बच्चे का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ है तो सबसे पहले ये देखना है कि मूल नक्षत्र में जन्म लेने के कारण कहीं उसमें कोई सेहत से जुड़ी समस्या तो नहीं आ रही है।
आपको माता-पिता की कुंडली भी जरूर देखनी चाहिए। अगर बच्चे के जन्म के समय से ही उसका बृहस्पति और चंद्रमा मजबूत है तो सेहत की समस्याएं नहीं होती हैं। माता-पिता के ग्रह ठीक हैं तो बच्चे के जन्म को लेकर कोई चिंता नहीं करनी चाहिए।
मूल शांति के लिए क्या करना चाहिए
- सबसे पहले आपको इस बात का ध्यान रखना है कि बच्चे के जन्म के 27 दिन बाद जब फिर से वही मूल नक्षत्र आए तब आप उस नक्षत्र की शांति कराएं जिसमें उसका जन्म हुआ है।
- बच्चे के माता-पिता को बच्चे की उम्र के 8 साल तक ॐ नमः शिवाय का जाप करना चाहिए।
- अगर बच्चे के स्वभाव में मूल नक्षत्र का प्रभाव बहुत ज्यादा दिख रहा है और बच्चा बहुत ज्यादा हठी है तो उसे नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ कराएं।
- यदि बच्चा नियमित रूप से सूर्य नमस्कार करेगा या सूर्य को अर्घ्य देगा तो मूल का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।
- बच्चे को गायत्री मंत्र का जाप कराएं जिससे बच्चे के दोष दूर हो सकते हैं।
- मूल में जन्में बच्चे को नियमित भगवान शिव की आराधना कराएं और सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़वाएं।
- बच्चे के लिए गणपति की उपासना करना भी विशेष रूप से फलदायी है। ऐसे बच्चे की माताओं को प्रत्येक बुधवार को गणपति पर दूर्वा चढ़ानी चाहिए।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।