कानपुर का 'खेरेपति मंदिर' है बेहद चमत्कारी, नाग पंचमी पर असली नागों से होता है भगवान विष्णु का दिव्य शृंगार
कानपुर का खेरेपति मंदिर बेहद चमत्कारी माना जाता है। नाग पंचमी पर यहां भगवान विष्णु का दिव्य श्रृंगार असली नागों ...और पढ़ें

खेरेपति यानी भगवान श्री हरि विष्णु का मंदिर । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना आने में बस कुछ ही दिन बचे हैं। इस महीने, कई महत्वपूर्ण पर्व आते हैं, जिनमें से एक है नागपंचमी का त्योहार। उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में इस त्योहार को बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। शहर में खेरेपति मंदिर है, जहां हर वर्ष इस पर्व के दिन नाग मेला लगता है और तरह-तरह के नाग मंदिर लाए जाते हैं।
इससे भी अनोखी बात यह है कि नागपंचमी के दिन यहां पर पूजे जाने वाले खेरेपति यानी भगवान श्री हरि विष्णु का विशेष श्रृंगार होता है। चलिए हम आपको इस मंदिर के बारे में कुछ बहुत ही रोचक जानकारी बताते हैं।
कहां है यह मंदिर?
कानपुर शहर में यह मंदिर शहर का दिल कहे जाने वाले माल रोड में स्थित है। इस मंदिर में जो भी पहली बार आएगा, उसे यह साधारण मंदिर ही लगेगा, मगर नागपंचमी के दिन इस मंदिर की पूरी छवि ही बदल जाती है। यहां पर विशाल नाग मेला लगता है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।
क्या है खेरेपति बाबा मंदिर से जुड़ी कथा?
यह मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है। मंदिर में वैसे तो सभी देवी-देवताओं की पूजा होती है, मगर विशेष पूजा केवल भगवान श्री हरि विष्णु की होती है। बताया जाता है कि यह मंदिर जिस स्थान पर बना है, वहां पहले एक कुआं होता था। इस मंदिर का निर्माण करवाने वाले कानपुर के ही एक सेठ थे, उनकी मां को सपने में शेषनाग ने दर्शन दिए थे और इस मंदिर की स्थापना का आदेश दिया था।
जब मंदिर के लिए जगह की खुदाई हुई, तो वहां एक प्राचीन कुआं निकला और उसमें सांप मिले।माना जाता है कि मंदिर में शेषनाग का वास है। आज भी यहां पर हर वर्ष नाग पंचमी के मेले में देश भर से नाग लाए जाते हैं और उनकी प्रदर्शनी लगती है। यहां इच्छाधारी नाग-नागिन का जोड़ा भी लाया जाता है, जिसका विशेष महत्व है।
सांप से होता है श्री विष्णु का श्रृंगार
इस मंदिर की सबसे अनोखी प्रथा है कि यहां हर नाग पंचमी के दिन असली नाग-नागिन के जोड़े से श्री हरी विष्णु का श्रृंगार किया जाता है। इस श्रृंगार के लिए सांपों को श्री हरी विष्णु भगवान के शीशे में बने कक्ष में छोड़ दिया जाता है और फिर जो नजारा दिखता है , वह अद्भुत होता है।
अत: यह मंदिर बहुत प्राचीन है और कानपुर में बहुत अधिक लोकप्रिय है। सावन के महीने में लोग श्रद्धालुओं की यहां काफी भीड़ होती है।
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