मथुरा का अनोखा मंदिर, जहां श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए शिव जी बने थे 'गोपी'
मथुरा में स्थित है एक अनोखा मंदिर जहां भगवान शिव ने श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए गोपी का रूप धारण किया था। जानें इस मंदिर की पौराणिक कथा। ...और पढ़ें

शिवजी को क्यों बनना पड़ा था गोपिका? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मथुरा और वृंदावन की धरती भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के लिए जानी जाती है। यही पर एक ऐसा मंदिर भी है जो अपनी अनोखी कहानी की वजह से लोगों को बहुत आकर्षित करता है। इस मंदिर का नाम है 'गोपेश्वर महादेव मंदिर'। कहा जाता है कि यहां भगवान शिव ने खुद श्रीकृष्ण का महारास देखने के लिए गोपी का रूप धारण किया था।
महारास देखने के लिए शिवजी बने गोपी
यह कथा द्वापर युग से जुड़ी है। कथा अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण वृंदावन में गोपियों के साथ महारास कर रहे थे। इस रास की चर्चा तीनों लोक में थी। जब भगवान शिव को इस महारास के बारे में पता चला, तो वह भी दर्शन करने के लिए कैलाश से वृंदावन आ गए।
लेकिन रास में केवल गोपियों को ही जाने की अनुमति थी। इसलिए भगवान शिव ने एक योजना बनाई। उन्होनें अपना रूप बदलकर गोपी का रूप धारण कर लिया। गोपी बनकर वह रास में शामिल हो गए और श्रीकृष्ण के साथ नृत्य किया।
जब श्रीकृष्ण को पता चला कि यह गोपी कोई और नही बल्कि भगवान शिव हैं , तो वह बहुत प्रसन्न हो गए। श्रीकृष्ण ने शिवजी को 'गोपेश्वर' नाम दिया। इसका अर्थ है गोपियों के स्वामी। श्रीकृष्ण ने शिवजी से कहा कि आप हमेशा के लिए ब्रज में रहिए। तभी से भगवान शिव गोपेश्वर रूप में वृंदावन में विराजमान है।
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मंदिर की अनोखी विशेषताएं
गोपेश्वर महादेव मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां होने वाला श्रृंगार है।
दिन और शाम का अलग रूप: दिन के समय यहा शिवलिंग की पूजा सामान्य तरीके से की जाती है। लेकिन जैसे ही शाम होती है, शिवलिंग का बहुत सुंदर श्रृंगार किया जाता है। शाम की आरती के समय शिवलिंग का सोलह श्रृंगार करके गोपी के रूप में सजाया जाता है। यहां भक्ता साड़ी, गहने, बिंदी और चूड़ी से सजे शिवलिंग के दर्शन कर सकते हैं।
चार प्रहर की आरती: इस मंदिर में दिन में चार बार आरती होती है। खास त्योहारों और सावन के महीने में यहां भक्तों की बहुत भीड़ लगती है। सावन सोमवार पर तो लोग दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं।
सोलह श्रृंगार का महत्व: मान्यता है कि जो भी महिला इस मंदिर में शिवजी को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाती है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सुहागिन महिलाए खासतौर पर यहा आकर माता पार्वती और शिवजी की पूजा करती है।
कैसे पहुंचे और दर्शन का समय
यह मंदिर वृंदावन के परिक्रमा मार्ग पर स्थित है। वृंदावन बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन से आप ऑटो या ई-रिक्शा लेकर आसानी से यहा पहुच सकते है।
मंदिर सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। शाम की आरती का समय सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि उसी समय शिवजी को गोपी रूप में सजाया जाता है। अगर आप वृंदावन जाएं तो गोपेश्वर महादेव के दर्शन जरूर करें।
अत: गोपेश्वर महादेव मंदिर केवल एक मंदिर नही है। यह प्रेम, भक्ति और समर्पण की कहानी है।
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