भगवान की नाभि की आरती क्यों और कितनी बार करनी चाहिए?
हिंदू धर्म में आरती का विशेष महत्व है, जो भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। भगवान की नाभि पर ...और पढ़ें
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आरती के नियम । (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
भगवान की नाभि पर दो बार आरती घुमाएं।
नाभि को महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र माना जाता है।
आरती करते समय श्रद्धा और भक्तिभाव रखें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान आरती का विशेष महत्व माना गया है। आरती केवल भगवान के सामने दीपक घुमाने की विधि नहीं है, बल्कि इसे श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। शास्त्रों और पारंपरिक पूजा में आरती करने के कुछ नियम बताए गए हैं। इसमें भगवान के अलग-अलग अंगों के सामने आरती घुमाने की संख्या भी बताई गई है।
भगवान की नाभि पर कितनी बार आरती करें?
हरिभक्ति विलास जैसी हिंदू धार्मिक पुस्तकों के अनुसार भगवान की आरती करते समय उनके चरणों, नाभि, मुख और पूरे शरीर के सामने दीपक घुमाने की अलग-अलग संख्या बताई गई है। मान्यता के अनुसार भगवान की नाभि पर आरती 2 बार घुमानी चाहिए। वहीं बाकी अंगे के सामने क्रमश: चरणों के सामने 4 बार, नाभि के सामने 2 बार, मुख के आगे 1 बार और पूरे शरीर के सामने 7 बार। कुल मिलाकर 14 बार भगवान की आरती उतारनी चाहिए।
भगवान की नाभि को क्यों माना जाता है खास?
हिंदू धर्म में नाभि को शरीर का महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र माना गया है। सबसे ज्यादा भगवान विष्णु की नाभि का धार्मिक महत्व बताया गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की नाभि से निकले कमल पर ब्रह्मा जी प्रकट हुए थे। इसी कारण विष्णु जी की नाभि को सृष्टि की उत्पत्ति से जोड़कर देखा जाता है।
नाभि को ऊर्जा और जीवन शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए भगवान की नाभि के सामने दीपक घुमाना शुभ होता है।
आरती करते समय रखें श्रद्धा का भाव
आरती में संख्या का महत्व बताया गया है, लेकिन इसके साथ भक्तिभाव भी उतना ही जरूरी माना जाता है। भगवान की आरती करते समय मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा से अपने इष्टदेव का ध्यान करें।
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