नौकरी की तलाश हो या करियर की रुकावट, बप्पा का यह 'गणेश स्तोत्र' हर मुश्किल का अचूक समाधान!
भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय माना जाता है और गणेश स्तोत्रम का पाठ आंतरिक सुख व सुरक्षा प्रदान करता है। यह पाठ जीवन की बाधाएं दूर कर सुख-समृद्धि लाता है, ...और पढ़ें

गणेश स्तोत्रम पाठ का आध्यात्मिक महत्व (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के मुताबिक, भगवान गणेश सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय हैं, जिन्हें विघ्नहर्ता यानी बाधाओं को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि, जो भक्त पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ उनकी पूजा और उपासना करते हैं, उन्हें सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
भगवान गणेश ज्ञान, बुद्धि, सफलता और धन के भी देवता हैं। वैसे तो शास्त्रों में उन्हें खुश करने के अनेक उपायों के बारे में बताया गया है, लेकिन मंत्र जाप और स्तोत्रम का पाठ करने से बप्पा की आशीर्वाद सदैव बना रहता है। गणेश स्तोत्रम का पाठ एक शक्तिशाली पाठ है, जो भक्तों को आंतरिक सुख और सुरक्षा प्रदान करता है।
गणेश स्तोत्रम का प्रत्येक श्लोक उनके गुणों का गुणगान करता है, जैसे कि उनका ज्ञान, करुणा, शक्ति और विघ्नहर्ता के रूप में उनकी अहम भूमिका। जो भी भक्त इस स्तोत्रम का पाठ भक्तिपूर्वक करता है, उसका मन, शरीर और आत्मा तीनों ही संतुलित हो जाते हैं।
संस्कृत में गणेश स्तोत्रम
प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम्। भक्तवासं स्मेर् नित्यमयः कामार्थसिद्धये ॥1॥
प्रथमं वक्रतुदं च एकदंत द्वितीयकम्। तृतीयं कृष्णपिघत्क्षं गजवत्रं चतुर्थकम् ॥2॥
लंबोदरं पंचम च पष्ठं पीड़ितमेव च। सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ॥3॥
नवमं भाल चन्द्रं च दशमं तु विनायकम्। एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन ॥4॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंज्ञन्यः पठेन्नरः। न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥5॥
शिष्यं लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्। पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥
प्रणम्य शिरसा देवं गौरी पुत्रं विनायकम् ! भक्तवसं स्मरेत्रित्यमायुः काम अर्थ सिद्धये..!!
प्रथमं वक्रतुंडं च, एकदंतं द्वितीयकम् ! तृतीयं कृष्ण पिंगक्षम, गजवक्त्रम चतुर्थकम्..!!
लम्बोदरं पंचमं च, षष्ठं विकटमेव च ! सप्तमं विज्ञानराजं च, धूम्रवर्णं तथाष्टमम्..!!
नवमं भालचन्द्रं च, दशमं तु विनायकम् ! एकादशम गणपतिम्, द्वादशम तु गजानन..!!
द्वादसैथानि नामानि, त्रिसंध्यम् यः पथेनरा ! न च विघ्न भयं तस्य, सर्वसिद्धि करं परम..!!
विधार्थी लभते विद्ध्यम्, दानार्थी लभते धनम् ! पुत्रार्थी लभते पुत्रन्, मोक्षार्थी लभते गतेम्..!!
जपेत गणपति स्तोत्रं, षडभिर्मसै फलं लभेत्! संवत्सरेण सिद्धिं च, लभते नात्र संशयः..!!
अष्टाभ्यो ब्रह्मोयश्र लिखित्वा यः समर्पयेत् ! तस्य विद्या भवेत्सर्व गणेशस्य प्रसादतः..!!
!!..इति श्री नारद पुराणे संकट नाशनम् गणेश स्तोत्रम् सम्पूर्णम्..!!
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गणेश स्तोत्रम पाठ की पूजा-विधि
शास्त्रों में बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इसलिए इस दिन शांत जगह ढूंढे, पूर्व दिशा की ओर मुंह करके फर्श पर बैठें और मंत्रों का जाप करें।
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भगवान गणेश स जुड़े मंत्रों का उच्चारण करने से पहले एक वेदी की स्थापना करें। उसपर भगवान गणेश की प्रतिमा रखकर देसी घी का दीया जलाएं।
भक्तों को सलाह दी जाती है कि, वे भगवान गणेश को उनकी प्रिय दू्र्वा घास की 21 पत्तियां जरूर अर्पित करें।
अपनी सुविधा के अनुसार आप 1/3/5/7/11/21 बार गणेश स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।

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गणेश स्तोत्रम पाठ के लाभ
गणेश स्तोत्रम पाठ करने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं।
अगर आप हर बुधवार को पूरी श्रद्धा के साथ गणेश स्तोत्रम का पाठ करते हैं, तो इससे नौकरी पाने में सहायता मिलती है।
जिन भी लोगों को अपने पेशेवर जीवन में किसी भी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें गणेश स्तोत्रम का पाठ जरूर करना चाहिए।
जो भी छात्र अपने प्रदर्शन में सुधार की इच्छा रखते हैं, उन्हें बुधवार के दिन कम से कम एक बार इस पाठ का अध्ययन जरूर करना चाहिए।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।