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    शिव चालीसा की ये पंक्तियां बदल सकती हैं आपकी जिंदगी, सावन सोमवार पर जरूर करें इनका पाठ

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 08:00 AM (IST)

    सावन के दूसरे सोमवार पर शिव चालीसा का पाठ विशेष फलदायी होता है, जिससे वैवाहिक सुख और मनचाहा वर मिलता है। इसकी कुछ शक्तिशाली पंक्तियां संकटों, दरिद्रता ...और पढ़ें

    शिव चालीसा के पाठ प्रसन्न होंगे महादेव (Picture Credit- AI Generated)

    शिव चालीसा के पाठ प्रसन्न होंगे महादेव (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. संकट और शत्रुओं के नाश के लिए शिव चालीसा पाठ।

    2. दरिद्रता, रोग और दुखों से छुटकारा दिलाती हैं ये पंक्तियां।

    3. पाप और नकारात्मक ऊर्जा के नाश हेतु शिव चालीसा का पाठ।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 10 अगस्त को सावन का दूसरा सोमवार है। इस दिन सुहागिन महिलाएं वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर की प्राप्ति के लिए लिए व्रत रखती हैं और विधिपूर्वक महादेव की पूजा-अर्चना करती हैं।

    इससे जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। सावन सोमवार की पूजा के दौरान शिव चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे साधक पर महादेव की कृपा बसरती है और असीम शांति मिलती है। साथ ही सभी तरह के भय से छुटकारा मिलता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव चालीसा की कुछ विशेष पंक्तियों का पाठ करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और महादेव का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं शिव चालीसा की शक्तिशाली पंक्तियां और उनके अर्थ के बारे में।

    shiv chalisa ke niyam

    (Picture Credit- AI Generated)

    1. संकट और शत्रुओं के नाश के लिए

    जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
    कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

    इस पंक्ति का अर्थ है कि हे माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र भगवान गणेश आपकी जय हो। आप सभी मंगल, कल्याण और सुखों के मूल या स्रोत हैं। अयोध्यादास जी कहते हैं कि भगवान शिव आप मेरे को निडरता का वरदान दीजिए, जिससे जीवन के सभी भय और संकट दूर हो जाएं।

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    2. दरिद्रता, रोग और दुखों से छुटकारा के लिए
    जय गिरिजपति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥
    भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुंडल नागफनी के॥

    शिव चालीसा की इस पंक्ति का अर्थ है कि हे माता पार्वती और असहायों पर दया करने वाले महादेव आपकी जय हो। आप सदैव अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं। आपके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है और कानों में नागफनी के कुंडल आपकी अलौकिक शोभा को बढ़ाते हैं।

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    3. पाप और नकारात्मक ऊर्जा के नाश के लिए
    त्रिपुरारि विनाशक मारे। शक्ति समन्विता अभिमत सारे॥
    गंगा जल पावन बहु आवे। सोहत भाल बाल छवि गावे॥

    इस पंक्ति का अर्थ है कि त्रिपुरासुर का नाश करने वाले भगवान शिव आप सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। आपके मस्तक पर गंगा का जल और चंद्रमा सुशोभित हैं, जो उनकी अधिक शोभा बढ़ाते हैं।

    इन बातों का रखें ध्यान

    • धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव चालीसा का पाठ प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है।
    • पाठ के दौरान आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए।
    • शिव चालीसा का पाठ करने से पहले देसी घी का दीपक जलाएं।
    • शिव चालीसा के दौरान किसी से वाद-विवाद न करें और किसी के बारे में गलत न सोचें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।