बुरे कर्म आपको भेज सकते हैं नरक, इन योनियों में हो सकता है 'पुनर्जन्म'
गरुड़ पुराण और शास्त्रों के अनुसार बुरे कर्म करने पर व्यक्ति को नरक की यातनाएं झेलनी पड़ सकती हैं और अगला जन्म नीच योनियों में हो सकता है। जानें कौन स ...और पढ़ें

गरुड़ पुराण के अनुसार बुरे कर्मों का फल

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमने कई बार अपने बड़े बुजुर्गों के मुंह से यह बात सुनी है कि 'बुरे कर्म करोगे, तो नरक में जाओगे', मगर गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प के अंतर्गत 5वें और 6वें अध्याय में आपको इसके साक्ष्य भी मिल जाएंगे। गरुड़ पुराण में साफ-साफ बताया गया है कि कौन सा बुरा कर्म करने पर कौन सा नरक प्राप्त होता है और पुनर्जन्म किस योनि में मिलता है। तो चलिए जानते हैं कि किस बुरे कर्म का क्या फल है।
तामिस्र
जो व्यक्ति दूसरों का धन, संपत्ति या पत्नी को छल से हड़प लेता है, उसे तामिस्र नरक का दंड मिलता है। ऐसे लोगों अगला जन्म या तो कीड़े-मकौड़े, पशु का मिलता है या फिर मनुष्य जीवन में ही हीन योनि मिलती है।
अंधतामिस्र
अपने ही लोगों के साथ धोखा, विश्वासघात और छल करने वालों के लिए अंधतामिस्र नरक बताया गया है। पुराण के अनुसार ऐसे लोग अगले जन्म में नेत्रहीन या किसी गंभीर शारीरिक या मानसिक विकलांगता के साथ पैदा होते हैं।
रौरव
जो लोग निर्दोष और निहत्थे जीवों को सताते हैं तथा उन्हें कष्ट देते हैं, वे रौरव नरक में जाते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार इन्हें अगले जन्म में हिंसक पशु, सांप या कीट पतंगे की योनि मिलती है।
महारौरव
क्रूर स्वभाव वाले और दूसरों को अत्यधिक पीड़ा देने वाले लोगों को महारौरव नरक मिलता है। इस नरक से निकलकर अगले जन्म में ये लोग कीट-पतंगों की अड़तालीस हजार योनियों के चक्र में फंस जाते हैं और बार-बार जन्म लेते हैं और मरते हैं।
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कुम्भीपाक
जो व्यक्ति जानवरों या जीवों की निर्दयता से हत्या करता है, उसे कुम्भीपाक नामक घोर नरक भेजा जाता है। यहां उसे खौलते तेल में डाल देने का दंड मिलता है। इसके बाद इन्हें अगला जन्म कोई कष्टदायी पशु या पक्षियों के रूप में मिलता है।
कालसूत्र
माता-पिता, गुरु और संतों का अपमान करने वालों के लिए पुराण में कालसूत्र नरक बताया गया है। ऐसे पापियों को अगले जन्म में कछुए की योनी मिलती है। ऐसे लोग जन्म लेने के बाद लंबे समय तक कष्ट झेलते रहते हैं।
असिपत्रवन
जो लोग धर्म का त्याग कर बुरे रास्ते पर चलते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद कांटेदार वृक्षों वाले असिपत्रवन नरक में कष्ट सहना पड़ता है। ऐसे लोगों को अगला जन्म मनुष्य का ही मिलता है, मगर उनका जीवन दरिद्रता से भरा होता है। कभी कोई सुख उनके नसीब में नहीं होता है।
सूकरमुख
निर्दोष लोगों को अन्यायपूर्ण दंड देने वाले शासक या अधिकारी को यह नरक भुगतना पड़ता है। ऐसे लोग अगले जन्म में सुअर बनकर पैदा होते हैं।
अंधकूप
जो लोग असहाय और कमजोर जीवों को बेवजह सताते हैं, उनके लिए गरुड़ पुराण में अंधकूप नरक बताया गया है। ऐसे लोगों की आत्मा नरक की सजा पूरी करने के बाद सीधे चौरासी लाख योनियों के चक्र में प्रवेश कर जाती है और उनका जन्म नीच योनियों में होता है।
कृमिभोजन
जो व्यक्ति भोजन साझा नहीं करता और केवल स्वार्थ में जीता है, उसे कृमिभोजन नरक मिलता है। ऐसे लोगों अगला जन्म कीड़े, मकोड़े के रूप में होता है, जिन्हें पेट भरने के लिए भटकना पड़ता है।
संदंश
चोरी, लूट और दूसरों का धन हड़पने वालों के लिए यह नरक बताया गया है। गरुड़ पुराण के हिसाब से जो व्यक्ति सोना या रत्न चोरी करता है उसे कीड़े-मकौड़े, जो अन्य चोरी करता है वो चूहा, जो वस्त्र चुराता है उसे तोता, जल की चोरी करने वाले को चातक पक्षी और इत्र चुराने वाले को छछूंदर का जन्म मिलता है।
तप्तसूर्य
परस्त्री गमन और अनैतिक संबंध बनाने वाले इस नरक में दंड पाते हैं और अगले जन्म में वे नपुंसकता का सामना करते हैं।
केवल 12 ही नहीं, पुराणों में लगभग 28 नरकों जैसे- पूयोद, प्राणरोध, विशसन, लालाभक्ष, सारमेयादन, अवीचि, अयःपान, क्षारकर्दम, रक्षोगण, शूलप्रोत, दण्डशूक, अवटरोध, पर्यावर्तन और सूचीमुख जैसे नरकों का उल्लेख भी मिलता है। इन नरकों में सजा पूरी करने के बाद आत्मा को अशुद्ध जीवन ही प्राप्त होता है, जिसमें उसे विभिन्न प्रकार की यातनाएं सहनी पड़ती हैं।
अत: इन नरकों के बारे में बता कर हमारा उद्देश्य लोगों में भय उत्पन्न करना नहीं, बल्कि उन्हें अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करना है।
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