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हाथ में कहां होती है भाग्य रेखा, सफलता और करियर से इसका क्या संबंध है?

Updated: Wed, 10 Jun 2026 03:32 PM (IST)

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार भाग्य रेखा का क्या महत्व है? जानिए यह हथेली में कहां होती है, कैसी भाग्य रेखा शुभ मानी जाती है।

हाथों में कहां होती है भाग्य की रेखा? (AI-Generated Image)

हाथों में कहां होती है भाग्य की रेखा? (AI-Generated Image)

HighLights

  1. भाग्य रेखा को करियर, सफलता और जीवन की प्रगति से जोड़कर देखा जाता है

  2. यह आमतौर पर कलाई से शुरू होकर शनि पर्वत तक जाती है

  3. लंबी और स्पष्ट भाग्य रेखा शुभ मानी जाती है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की रेखाओं का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि हाथ की रेखाएं व्यक्ति के स्वभाव, कर्म और जीवन की संभावनाओं के बारे में कई संकेत देती हैं। इन्हीं रेखाओं में से एक है भाग्य रेखा, जिसे सफलता, करियर और आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखा जाता है।

हथेली में प्रमुख रूप से जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा होती हैं। लेकिन, इनके अलावा भाग्य रेखा भी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, यह रेखा व्यक्ति के जीवन में मिलने वाले अवसरों, संघर्षों और उपलब्धियों की ओर संकेत करती है।

हथेली पर भाग्य रेखा कहां होती है?

भाग्य रेखा आमतौर पर कलाई के पास से शुरू होकर मध्यमा उंगली के नीचे स्थित शनि पर्वत तक जाती है। हालांकि, हर व्यक्ति के हाथ में इसका प्रारंभ एक जैसा नहीं होता। कई लोगों की भाग्य रेखा जीवन रेखा, चंद्र पर्वत, शुक्र पर्वत या हृदय रेखा से भी शुरू हो सकती है। लेकिन, इसका अंत शनि पर्वत पर या उसके आसपास माना जाता है।

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, अगर भाग्य रेखा सीधी, गहरी और बिना किसी रुकावट के शनि पर्वत तक पहुंचती है, तो इसे शुभ माना जाता है। ऐसी रेखा वाले लोगों के बारे में कहा जाता है कि वे अपने जीवन में मेहनत के साथ अच्छी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। उन्हें करियर, व्यवसाय या सामाजिक क्षेत्र में सम्मान मिलने की संभावना अधिक रहती है।

अगर बीच में टूटी हो भाग्य रेखा तो...

वहीं, अगर भाग्य रेखा बीच में टूट जाए या उस पर कई कटाव दिखाई दें, तो इसे जीवन में आने वाली चुनौतियों और उतार-चढ़ाव का संकेत माना जाता है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति सफल नहीं होगा। हस्तरेखा शास्त्र में अन्य रेखाओं और पर्वतों की स्थिति भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

एक विशेष स्थिति तब मानी जाती है जब भाग्य रेखा शनि पर्वत तक पहुंचकर दो शाखाओं में विभाजित हो जाए और उनमें से एक रेखा गुरु पर्वत की ओर बढ़े। ऐसी स्थिति को शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसे लोगों को सम्मान, नेतृत्व क्षमता और आर्थिक उन्नति के अवसर मिल सकते हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि हस्तरेखा शास्त्र एक पारंपरिक विद्या है। जीवन में सफलता का आधार केवल रेखाएं नहीं, बल्कि व्यक्ति की मेहनत, निर्णय क्षमता और कर्म भी होते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।