Chaitra Navratri 2026: खरमास और पंचक के बीच कैसे करें घटस्थापना? यहां देखें पूजा की सही विधि और समय
चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) 19 मार्च 2026 से खरमास और पंचक के अशुभ संयोग में शुरू हो रहे हैं। ...और पढ़ें

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र से जुड़ी बातें। (Ai Generated Image)
HighLights
चैत्र नवरात्र का दिन बेहद शुभ माना जाता है
यह मां दुर्गा को समर्पित है
इस दौरान व्रत और पूजा का विधान है
दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) का पावन पर्व 19 मार्च 2026 से शुरू हो रहा है। इस साल नवरात्र की शुरुआत कुछ विशेष ज्योतिषीय स्थितियों के बीच हो रही है। पंचांग के अनुसार, इस समय खरमास और पंचक का अशुभ संयोग बना रहेगा। इन स्थितियों में शुभ कार्यों को लेकर मन में संशय रहता है, लेकिन शास्त्रों और विद्वानों के अनुसार, मां दुर्गा की साधना और घटस्थापना पर इनका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस दौरान हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि हमारे कार्यों का संचालन सही ढंग से हो सके।
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खरमास और पंचक के बीच घटस्थापना: क्या बरतें सावधानी?
खरमास और पंचक के कारण भले ही मांगलिक कार्यों के सफल होने में बाधा की आशंका रहती है, लेकिन देवी पूजन इन दोषों से मुक्त है। 19 मार्च को नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना पूरी तरह निर्विघ्न संपन्न होगी। हालांकि, मां का आगमन इस बार डोली पर हो रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से समाज में अस्थिरता, भय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का संकेत माना जाता है।
ऐसे समय में हमें अधिक धैर्य और सहजता के साथ व्यवहार करना चाहिए। ईश्वर का शुक्रिया अदा करते हुए की गई पूजा मानसिक शांति प्रदान करेगी और आने वाले समय की चुनौतियों से लड़ने की शक्ति देगी।
घटस्थापना के लिए सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त
पूजा की सफलता के लिए सही समय का चुनाव करना बहुत जरूरी है। 19 मार्च 2026 को घटस्थापना के लिए दो विशेष मुहूर्त मिल रहे हैं:
- प्रातः काल मुहूर्त: सुबह 06:09 से 08:06 तक का समय सबसे उपयुक्त है। इस समय पूजा शुरू करना घर में बरकत लेकर आता है।
- अभिजीत मुहूर्त: यदि आप सुबह पूजा नहीं कर पाते हैं, तो दोपहर 11:49 से 12:38 के बीच कलश स्थापित कर सकते हैं।
14 अप्रैल तक मांगलिक कार्यों पर रहेगी रोक
भले ही नवरात्र में घटस्थापना और देवी पूजन वर्जित नहीं है, लेकिन अन्य बड़े मांगलिक कार्यों पर 14 अप्रैल 2026 तक रोक रहेगी। खरमास के कारण विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य इस दौरान नहीं किए जा सकेंगे। यह समय नई शुरुआत के बजाय आत्म-चिंतन और भक्ति के लिए अधिक उत्तम है।
यदि आप पिता की संपत्ति से जुड़ा कोई बड़ा सौदा या नया व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो 14 अप्रैल के बाद का समय अधिक अनुकूल होने की संभावना है। संयम के साथ इस समय का सदुपयोग करना ही समझदारी है।
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लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।