Chanakya Niti: इन जगहों पर भूलकर भी न बनाएं अपना आशियाना, वरना जिंदगीभर रहेंगे परेशान
आचार्य चाणक्य की नीति (Chanakya Niti in hindi) बताती है कि व्यक्ति को किन जगहों पर निवास नहीं करना चाहिए, वरना आपकी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। निवास चुनते ...और पढ़ें
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Chanakya Slokas in hindi चाणक्य नीति के श्लोक
HighLights
जीवन में जरूर अपनाएं चाणक्य की नीति
चाणक्य के अनुसार इन स्थानों पर निवास से बचें
बढ़ सकती हैं आपके जीवन की समस्याएं
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आचार्य चाणक्य की नीति जीवन को सफल और सरल बनाने में आपकी मदद करत सकती है। बस जरूरत है इन बातों को अपने जीवन में उतारने की। आज हम आपके लिए लाए हैं चाणक्य नीति के कुछ ऐसे श्लोक (Chanakya Niti Slokas), जो आपको बताते हैं कि किन जगहों पर निवास नहीं करना चाहिए, वरना आपके जीवन की समस्याएं कभी खत्म नहीं होंगी।
श्लोक 1 - लोकयात्रा भयं लज्जा दाक्षिण्यं त्यागशीलता।
पञ्च यत्र न विद्यन्ते न कुर्यात्तत्र संगतिम् ॥
इस श्लोक में आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) कहते हैं कि जिस स्थान पर आजीविका यानी रोजगार न मिले, लोगों में भय (कानून या ईश्वर का भय) लज्जा (लोक-लाज), उदारता तथा दान देने की प्रवृत्ति न हो, ऐसी पांच जगहों को भी अपने निवास के लिए कभी नहीं चुनना चाहिए। क्योंकि इस तरह के स्थान पर आपका जीवन संकट में पड़ सकता है।

श्लोक 2 - धनिकः श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पञ्चमः।
पञ्च यत्र न विद्यन्ते न तत्र दिवसे वसेत ॥
इस श्लोक का भावार्थ कि जहां कोई सेठ अर्थात धनी लोग, वेदपाठी विद्वान, राजा (समाज को व्यवस्थित रखने के लिए एक सक्षम शासक) और इलाज के लिए वैद्य न हो, जहां कोई नदी न हो, इन पांच स्थानों पर एक दिन भी नहीं रहना चाहिए।
श्लोक 3 - कः कालः कानि मित्राणि को देशः कौ व्ययागमौ ।
कश्चाहं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुहुः ॥

(AI Generated Image)
चाणक्य नीति के इस श्लोक का अर्थ है कि मनुष्य को हमेशा यह सोचकर अपने लिए निवास स्थान ढूंढना चाहिए कि समय कैसा है, मेरे मित्र कौन हैं, कौन-सा देश या स्थान मेरे लिए सही है, मेरी आय-व्यय का संतुलन क्या है और मेरी असली शक्ति क्या है। यदि आप इन सभी बातों का मूल्यांकन करके अपने लिए निवास स्थान का चयन करते हैं, तो यह आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
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