Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    क्या आप भी चरणामृत और पंचामृत को समझते हैं एक? आज ही जान लें ये अंतर

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 09:38 AM (IST)

    कई लोग चरणामृत और पंचामृत को एक ही समझते हैं, लेकिन सनातन शास्त्रों में इनका अलग-अलग महत्व है। यह लेख दोनों के बीच के अंतर, सामग्री, धार्मिक महत्व और ...और पढ़ें

    चरणामृत और पंचामृत में अंतर (Picture Credits - AI image)

    चरणामृत और पंचामृत में अंतर (Picture Credits - AI image) 

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। घर या मंदिर में प्रभु की पूजा-अर्चना के दौरान विशेष चीजों का भोग लगाया जाता है। जैसे- फल, मिठाई और हलवा आदि। भोग लगाने के बाद लोगों में प्रसाद का वितरण किया जाता है। प्रसाद के रूप में भक्तों को चरणामृत या पंचामृत दिया जाता है, लेकिन बहुत से लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं।

    सनातन शास्तों में चरणामृत और पंचामृत का अलग-अलग महत्व है। क्या आप जानते हैं कि चरणामृत और पंचामृत में क्या अंतर है। अगर नहीं पता, तो चलिए बिना देर किए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं कि चरणामृत और पंचामृत में क्या अंतर है।

    चरणामृत और पंचामृत में अंतर

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चरणामृत और पंचामृत को बनाने की सामग्री अलग है। साथ ही इन दोनों का धार्मिक महत्व भी अलग-अलग है। चरणामृत का अर्थ होता है कि भगवान के चरणों का अमृत। चरणामृत में जल, गंगाजल, तुलसी के पत्तों को मिलाया जाता है। साथ ही चंदन को शामिल किया जाता है। चरणामृत को तांबे के बर्तन में रखना शुभ माना जाता है।

    धर्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान के चरणों का जल यानी चरणामृ का सेवन करने से साधक को शुभ परिणाम देखने को मिलते हैं और जीवन में बड़े बदलाव आते हैं। साथ ही सकारात्मक ऊर्जा के संचार को बढ़ाता है।

    Difference between Charanamrit and Panchamrit

     

    पंचामृत का अर्थ

    पंचामृत का अर्थ है कि पांच अमृत। पंचामृत बनाने के लिए जल, गाय का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का प्रयोग किया जाता है। इसको बनाने के बाद देवी-देवताओं का विधिपूर्वक अभिषेक किया जाता है, जिसके बाद भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरण किया जाता है। इससे भक्तों पर देवी-देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है। यह स्वाद में मीठा छोटा है। पंचामृत को चांदी, कांसे या मिट्टी के बर्तन में रखना शुभ माना जाता है।

    खबरें और भी

    बचे हुए चरणामृत और पंचामृत का क्या करें- पूजा के दौरान अगर चरणामृत या पंचामृत बच गया है, तो भूलकर भी सिंक या नाली में न बहाएं। ऐसा माना जाता है कि इस तरह की गलती को करने से साधक को अशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। बचे हुए चरणामृत या पंचामृत को आप तुलसी के पौधे में डाल दें।

    यह भी पढ़ें- घर के मंदिर में क्यों नहीं लगानी चाहिए बड़ी या छोटी घंटी? वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके प्रभाव

    यह भी पढ़ें- शादी में गठबंधन की परंपरा: शास्त्रों के आधार पर किसे बांधना चाहिए वर-वधू का गठबंधन?

    यह भी पढ़ें- नए घर के निर्माण के बाद आखिर क्यों कराई जाती है बेटियों से चौखट की पूजा? इस रस्म का जानें महत्व

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।