दशा माता व्रत 2026: घर की दशा और किस्मत बदलने वाला व्रत, जानें कब है और क्या हैं इसके नियम
दशा माता व्रत 2026 कब है? पढ़ें 13 मार्च को घर की दशा सुधारने वाले इस विशेष व्रत की सही तारीख, पूजा विधि, पीपल पूजा का महत्व और नल-दमयंती की कथा। ...और पढ़ें

दशा माता व्रत 2026 (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेक्स, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एक ऐसा व्रत है, जो सीधे तौर पर घर की 'दशा' (स्थिति) को सुधारने के लिए किया जाता है। इसे 'दशा माता व्रत' कहते हैं। माना जाता है कि यह व्रत न केवल घर की दरिद्रता दूर करता है, बल्कि सोई हुई किस्मत को भी जगा देता है।
दशा माता व्रत 2026 कब है?
साल 2026 में दशा माता का व्रत और पूजा 13 मार्च, शुक्रवार को है। हर साल चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। होली दहन (Holika Dehan) के ठीक दसवें दिन महिलाएं पूरे विधि-विधान से दशा माता की पूजा करती हैं।
क्यों किया जाता है यह व्रत?
दशा माता को भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही हो, बनते काम रुक रहे हों या घर में कलेश रहता हो, तो यह व्रत 'कायाकल्प' कर सकता है। महिलाएं अपने घर की उन्नति, बरकत और बच्चों की सलामती के लिए यह उपवास रखती हैं।

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व्रत के जरूरी नियम और पूजा विधि
कच्चे सूत का डोरा: इस दिन महिलाएं कच्चे सूत का एक डोरा लेती हैं, जिसमें 10 गांठें लगाई जाती हैं। इसे 'दशा माता का डोरा' कहा जाता है।
पीपल की पूजा: इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा का सबसे ज्यादा महत्व है। महिलाएं सूत का डोरा लेकर पीपल की 10 बार परिक्रमा करती हैं और डोरी को पेड़ पर लपेटती हैं।
एक समय का भोजन: इस व्रत में पूरे दिन में सिर्फ एक बार ही भोजन किया जाता है, वह भी बिना नमक का। खाने में मुख्य रूप से गेहूं का इस्तेमाल किया जाता है।
घर की सफाई: इस दिन घर की साफ-सफाई का खास ख्याल रखा जाता है। पुराने झाड़ू या बेकार कचरे को घर से बाहर निकाल दिया जाता है ताकि लक्ष्मी जी का वास हो सके।
नल-दमयंती की कथा: बिना दशा माता की कथा (Dasha Mata ki Katha) सुने यह व्रत अधूरा माना जाता है। राजा नल और रानी दमयंती की कहानी इस दिन विशेष रूप से सुनी जाती है।
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