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हस्‍तरेखा शास्‍त्र: हथेली पर इस स्थान पर मछली बनना नहीं होती सामान्य बात, ऐसे लोगों को मिलता है मोक्ष और अपार धन

Updated: Sat, 22 Aug 2026 08:00 PM (IST)

हस्तरेखा शास्त्र में हथेली पर मछली का चिह्न अत्यंत शुभ माना जाता है, जो धन, मान-सम्मान, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति ...और पढ़ें

हथेली पर मछली का चिह्न कहां होता है। (Picture Credit- AI Generated)

हथेली पर मछली का चिह्न कहां होता है। (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. हथेली पर मछली का चिह्न धन और मोक्ष दिलाता है।

  2. गुरु पर्वत पर मछली बुद्धिमान और सम्मानित व्यक्ति बनाती है।

  3. केतु क्षेत्र पर मछली आध्यात्मिक सोच और साधना से जोड़ती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हस्तरेखा शास्त्र में हथेली पर बने अलग-अलग चिह्नों का विशेष महत्व बताया गया है। इन्हीं में से एक है मछली का चिह्न। माना जाता है कि हथेली पर मछली का स्पष्ट और सही आकार में बना होना बेहद शुभ संकेत माना जाता है। ऐसे लोगों को जीवन में धन, मान-सम्मान, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति मिल सकती है। खासतौर पर यदि यह चिह्न हथेली के कुछ विशेष स्थानों पर बना हो, तो इससे मोक्ष भी मिल सकता है। चलिए जानते हैं इस चिन्‍ह का महत्‍व।

गुरु पर्वत पर मछली का निशान

तर्जनी उंगली के ठीक नीचे वाले हिस्से को गुरु पर्वत कहा जाता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, यदि यहां मछली का चिह्न स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसे लोग बुद्धिमान, ज्ञानी और धार्मिक विचारों वाले होते हैं। ऐसे लोगों में नेतृत्व करने की क्षमता भी अच्छी हो सकती है। इन्हें समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा मिलने की संभावना रहती है।

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केतु क्षेत्र या मणिबंध के पास मछली

हथेली के निचले हिस्से में मणिबंध के आसपास या केतु से जुड़े क्षेत्र में मछली का निशान होना भी विशेष माना जाता है। हस्तरेखा शास्‍त्र के अनुसार इसे ऐसे लोग गहरी आध्यात्मिक सोच और साधना से जुड़े होते हैं।

ऐसे लोगों को जीवन भौतिक सुखों की कमी नहीं होती है। उनका झुकाव पूजा-पाठ, ध्यान, साधना और जरूरतमंद लोगों की मदद करने की ओर हो सकता है।

जीवन रेखा या भाग्य रेखा के अंत में मछली

यदि मछली जैसा चिह्न जीवन रेखा या भाग्य रेखा के अंतिम हिस्से में बनता है, तो इसे भी शुभ संकेत माना जाता है। मान्यता के अनुसार, जीवन के अंतिम चरण में व्यक्ति को मानसिक शांति और संतोष प्राप्त हो सकता है। ऐसे व्यक्ति अपने जीवन के अनुभवों से बहुत कुछ सीखते हैं और धीरे-धीरे आध्यात्मिकता की ओर बढ़ने लगते हैं। जीवन के अंतिम पड़ाव में आकर ये लोगो मोह माया से दूर हो जाते हैं।

 

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।