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हनुमान जी के कितने भाई थे? रामचरितमानस में नहीं मिलता वर्णन, पढ़ें पुराणों में लिखे इस रहस्य के बारे में

Published: Thu, 13 Aug 2026 05:23 PM (IST)

हमारे पुराणों में कई ऐसी बातें हैं जो हिंदू ग्रंथों में नहीं मिलती हैं। ऐसी ही बातों में से एक ...और पढ़ें

हनुमान जी के कितने भाई थे जानें पुराणों में छिपा यह अनसुना रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

हनुमान जी के कितने भाई थे जानें पुराणों में छिपा यह अनसुना रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के अनुसार कलियुग में सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले भगवानों में से एक हैं हनुमान जी। इनकी पूजा से भक्तों की समस्त बाधाएं दूर होती हैं और इसी वजह से इन्हें संकटमोचन भी कहा जाता है।

वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास की राम चरितमानस में हनुमान जी से जुड़े कई ऐसे रहस्य मिलते हैं जिनके बारे में आप नहीं जानते होंगे। उनके कई नाम हैं जैसे बजरंगबली, केसरी नंदन और उन्हें अंजनी पुत्र भी कहा जाता है।

उनका नाम अंजनी पुत्र इसलिए रखा गया क्योंकि उनकी माता का नाम अंजना था। हम सभी इस बारे में जानते हैं कि हनुमान जी अंजना माता के पुत्र थे. लेकिन इस रहस्य से सभी अनजान हैं कि हनुमान जी के कितने भाई थे? अगर हम रामायण ग्रंथ की बात करते हैं तो इसमें कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं मिलता है, लेकिन ब्रह्मांड पुराण में इसके बारे में विस्तार से बताया गया है। आइए आपको बताते हैं हनुमान जी के अन्य भाइयों के बारे में।

हनुमान जी का जन्म कैसे हुआ?

जब हम हनुमान जी के जन्म की बात करते हैं तो वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड में बताया गया है कि हनुमान जी का जन्म माता अंजना और वानर राज केसरी के घर में हुआ था।

वहीं शिव महापुराण में हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार माना गया है। हनुमान जी का जन्म विष्णु जी के अवतार प्रभु श्री राम की मदद करने के उद्देश्य से हुआ था और इसी वजह से वो राम जी के परम भक्त थे। बचपन से ही हनुमान जी को असाधारण शक्ति, बुद्धि और पराक्रम प्राप्त था और वो अपने पराक्रम के बल पर ही अपनी लीलाएं दिखाते थे।

हनुमान जी के कितने भाई थे?

हिंदुओं के सबसे प्राचीन पुराणों में से एक ब्रह्मांड पुराण में वानरों की वंशावली का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसी पुराण में यह भी बताया गया है कि हनुमान जी के पांच सगे भाई थे।

इन भाइयों के नाम थे- मतिमान, श्रुतिमान,केतुमान,गतिमान और धृतिमान। इन सभी भाइयों में हनुमान जी सबसे बड़े थे और माता अंजना के सबसे बड़े पुत्र होने के कारण अत्यंत शक्तिशाली भी थे। वहीं हनुमान जी के सभी भाइयों ने सामान्य गृहस्थ जीवन बिताया, लेकिन स्वयं बजरंगबली ने हमेशा बाल ब्रह्मचारी का ही जीवन व्यतीत किया।

रामचरितमानस में क्यों नहीं मिलता हनुमान जी के भाइयों का वर्णन?

रामायण और रामचरितमानस जैसे ग्रंथों में हनुमान जी के भाइयों का वर्णन इसलिए नहीं मिलता है क्योंकि यह ग्रंथ राम जी की महिमा को उजागर करते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य ही प्रभु श्री राम की गाथाओं का बखान करना है। इसी वजह से इन ग्रंथों में केवल हनुमान जी की कुछ ही लीलाओं का वर्णन विस्तार से मिलता है और उनके परिवार की बातें नहीं लिखी हैं।

हनुमान जी के भाइयों का जिक्र भले ही किसी ग्रंथ में नहीं मिलता है, लेकिन प्राचीन पुराणों में इनके बारे में कई ऐसी बातें लिखी हैं जो आज भी सभी के लिए किसी रहस्य से कम नहीं हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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