पवनपुत्र हनुमान का जन्म कैसे हुआ? पढ़ें माता अंजना की तपस्या की कथा
पवनपुत्र हनुमान के जन्म की दो प्रमुख पौराणिक कथाएं हैं, जिनमें से एक माता अंजना की तपस्या और अग्नि देव से मिली खीर से जुड़ी है। दूसरी कथा भगवान शिव के ...और पढ़ें

कैसे हुआ हनुमान का जन्म? (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार माने जाते हैं
माता अंजना ने महादेव की तपस्या कर पुत्र प्राप्ति का वरदान पाया
पवन देव ने शिव के तेज को अंजना के गर्भ में स्थापित किया
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है। इस दिन बजरंगबली की पूजा-अर्चना करने का अधिक महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रभु की साधना करने से साधक के जीवन में आने वाले सभी संकट दूर होते हैं और बिगड़े काम पूरे होते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान हनुमान को भगवन शिव का 11वां रुद्रावतार माना जाता है। बजरंगबली के जन्म की कथा भगवान शिव और पवन देव जुड़ी हुई है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर कैसे हुआ हनुमान जी का जन्म। अगर ही पता, तो ऐसे में आइए आपको बताते हैं पवनपुत्र हनुमान का जन्म कैसे हुआ।
कैसे हुआ हनुमान जी का जन्म?
पौराणिक कथा के अनुसार, दुर्वासा ऋषि के श्राप के श्राप से मुक्ति पाने के लिए मां अंजना ने महादेव की तपस्या की। उनकी तपस्या के द्वारा भवगान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने माता अंजनी की कोख से जन्म लेने का वरदान दिया।
इसके बाद एक दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना माता अंजना कर रही थीं। इस दौरान माता अंजना के सामने अग्नि देव प्रकट हुए और उन्हें खीर का पात्र दिया। साथ ही उनसे तीनों रानियों को खिलाने के लिए कहा। इस दौरान एक पक्षी आया और अपने पंजे में खीर को फंसाकर ले गया। वहीं, माता अंजना तपस्या में लीन थी, जिसकी वजह से उनके हाथ में से कटोरी गिर गई। गिरी हुई खीर को माता अंजना ने भगवान शिव का प्रसाद समझकर उसे ग्रहण किया, जिससे हनुमान जी का जन्म हुआ।
यह भी पढ़ें- भारत का एक ऐसा अनोखा मंदिर, जहां एक ही मूर्ति में दिखते हैं आधे गणेश और आधे हनुमान
एक अन्य कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के बाद महादेव ने जगत के पालनहार भगवान विष्णु से उनके मोहिनी अवतार की दर्शन की इच्छा जाहिर की। इसके बाद भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। उनके आकर्षक रूप से महादेव प्रसन्न हुए और उनका तेज अवतरित हुआ। पवन देव ने उस तेज को माता अंजना के गर्भ में स्थापित किया। इसलिए हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां रुद्रावतार माना जाता है।
खबरें और भी
शास्त्रों में मिलता है वर्णन
हनुमान जी के जन्म की कथा का वर्णन आनंद रामायण में मिलता है। इसके अलावा हनुमान जी के 11वें रुद्रावतार से जुड़ी कथा का वर्णन शिव पुराण की शतरुद्र संहिता में मिलता है।
यह भी पढ़ें- हनुमान जी को क्यों कहा जाता है 'बाला जी' ? बहुत रोचक है पौराणिक कथा
यह भी पढ़ें- बल ही नहीं बुद्धि के भी सागर हैं बजरंगबली, चिरंजीवी हनुमान से जुड़े 5 मिथक
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।