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कान्हा की बांसुरी में छिपा है अहंकार मिटाने का संदेश, यहां पढ़ें श्रीकृष्ण के आभूषणों का गहरा आध्यात्मिक अर्थ

Updated: Sat, 29 Aug 2026 04:00 PM (GMT+05:30)

भगवान श्रीकृष्ण के आभूषणों में गहरे आध्यात्मिक रहस्य और जीवन के आदर्श छिपे हैं। बांसुरी अहंकार मिटाने, वैजयंती माला प्रेम व समर्पण और पीले वस्त्र ज्ञान का प्रतीक हैं।

बांसुरी से मुकुट तक: कृष्ण के हर आभूषण का अर्थ (AI-Generated)

बांसुरी से मुकुट तक: कृष्ण के हर आभूषण का अर्थ (AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए इस तिथि पर हर साल भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे जन्माष्टमी के रूप में जाना जाता है। इस बार जन्माष्टमी 4 सितंबर (Janmashtami 2026 Date) को मनाई जाएगी। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रभु की साधना करने से सुख-समृद्धि में अपार वृद्धि होती है। भगवान कृष्ण के स्वरूप में मौजूद सभी आभूषण गहरे आध्यात्मिक रहस्यों और जीवन के आदर्शों का प्रतीक हैं। क्या आप जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के आभूषणों का क्या अर्थ है? अगर नहीं पता, तो आइए हम इस आर्टिकल में आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।

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(AI-Generated)

भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय आभूषण

बांसुरी- भगवान श्रीकृष्ण का शृंगार बांसुरी के बिना अधूरा माना जाता है। प्रभु को बांसुरी अधिक प्रिय है। जब कृष्ण जी बांसुरी बजाते थे, तो बांसुरी की मधुर धुन से गोपियां और पशु-पक्षी मंत्रमुग्ध हो जाते थे। प्रभु की बांसुरी यह संदेश देती है कि अगर कोई व्यक्ति अहंकार और स्वार्थ को मिटा देता है, तो प्रभु उसके जीवन में दिव्य आनंद का संगीत भर सकते हैं।

वैजयंती माला- भगवान श्रीकृष्ण को वैजयंती माला अधिक प्रिय है। श्रीकृष्ण के शृंगार का मुख्य हिस्सा वैजयंती माला भी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह माला राधा रानी ने भगवान श्रीकृष्ण को दी थी। इस माला को प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसे धारण करने से व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

पीले वस्त्र- भगवान श्रीकृष्ण पीले वस्त्र धारण करते हैं। इसलिए प्रभु को 'पीतांबर' कहा जाता है। इस शब्द का अर्थ है कि पीला वस्त्र धारण करने वाला। पीले रंग को ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण अज्ञानता के अंधकार को मिटाने वाले प्रकाश हैं।

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बाजूबंद- भगवान श्रीकृष्ण बाजूबंद भी धारण करते हैं, जिसे 'रंगदा' नाम से भी जाना जाता है। बाजूबंद से भगवान श्रीकृष्ण की शोभा बढ़ती है। ऐसा माना जाता है कि बाजूबंद पहनने से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।

कुंडल- इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण को कुंडल अधिक प्रिय हैं। लड्डू गोपाल का अभिषेक करने के बाद उन्हें कुंडल भी पहनाए जाते हैं। उनके कुंडल आकर्षण और दिव्यता को दर्शाते हैं।

पायल- भगवान श्रीकृष्ण के चरणों की पायल को श्रृंगार का विशेष हिस्सा माना जाता है। कान्हा जी की पायल मोह-माया से ध्यान हटाकर मन को परमात्मा के चरणों में एकाग्र करने का संकेत देती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।