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    कर्ण के 3 बड़े श्राप: जो महाभारत युद्ध में बने उसकी मौत का सबसे बड़ा कारण

    Updated: Fri, 29 May 2026 01:00 PM (IST)

    महाभारत के महान योद्धा कर्ण की मृत्यु के पीछे तीन प्रमुख श्राप थे, जो उन्हें परशुराम, एक ब्राह्मण और धरती माता ने दिए थे। इन्हीं श्रापों के कारण युद्ध ...और पढ़ें

    कर्ण को मिले 3 श्रापों की पूरी कहानी (Picture Credit- AI Generated)

    कर्ण को मिले 3 श्रापों की पूरी कहानी (Picture Credit- AI Generated)  

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत में कर्ण को बेहद शक्तिशाली योद्धा माना जाता है। कर्ण माता कुंती और सूर्य देव के पुत्र थे। कर्ण को अटूट वफादारी और दानवीरता के लिए जाना जाता है। कर्ण का नियम था कि सूर्यदेव की आराधना के बाद जो भी उनसे मांगता है। उसकी सभी मुरादें पूरी होती हैं।

    महान योद्धा कर्ण की मृत्यु उनको मिले 3 श्रापों की वजह से हुई थी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कर्ण को 3 श्राप किसने दिए थे। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए आपको बताते हैं महाभारत के इस प्रसंग के बारे में।

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    (Picture Credit- AI Generated)  

    1. भगवान परशुराम का श्राप

    पौराणिक कथा के अनुसार, कर्ण ने परशुराम जी से ब्रह्मास्त्र और अन्य दिव्य अस्त्रों की शिक्षा प्राप्त की। एक दिन परशुराम कर्ण की गोद में सिर रखकर सो रहे थे। उस दौरान एक कीड़ा आया और कर्ण की जांघ को काट लिया। कर्ण दर्द का सामना करता रहा, क्योंकि परशुराम जी की नींद न टूटे।
    जब परशुराम जी ने कर्ण को इस हालत में देखा, तो वे समझ गए कि इतनी सहनशक्ति किसी क्षत्रिय में हो सकती है। उन्होंने क्रोध में आकर कर्ण को श्राप दिया कि जिस छल से तुमने विद्या सीखी है। जीवन के सबसे संकट के समय में तुम इसे भूल जाओगे। इसी वजह से युद्ध के दौरान कर्ण ब्रह्मास्त्र नहीं चला सका।

    2. ब्राह्मण का श्राप

    एक बार कर्ण शब्दभेदी बाण का अभ्यास कर रहे थे, तो इस दौरान उनका बाण गलती से एक बछड़े को लगा गया और उसकी मौत हो गई। इससे ब्राह्मण ने क्रोध में आकर कर्ण को श्राप दिया कि जिस तरह से तुमने असहाय और निर्दोष पशु को मारा है। उसी तरह युद्ध के समय रथ का पहिया दलदल में फंस जाएगा और तुम असहाय होकर मारे जाओगे।

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    3. धरती माता का श्राप

    एक बार कर्ण ने देखा कि एक छोटी बच्ची रो थी, क्योंकि उसका घी मिट्टी में गिर गया था। बच्ची को रोता हुआ देख कर्ण ने मिट्टी को अपने हाथ में लिया और उसे निचोड़कर घी को बर्तन में निकाल दिया। इससे धरती माता को बेहद पीड़ा हुई। धरती मां ने क्रोध में आकर कर्ण को श्राप दिया कि जिस तरह से तुमने मुझे निचोड़ा है। उसी तरह से युद्ध में मैं तुम्हारे रथ के पहिए को जकड़ लूंगी और बाहर नहीं निकलने दूंगी।

    जब महाभारत के युद्ध के 17वें दिन अर्जुन और कर्ण के बीच युद्ध चल था, तो कर्ण को मिले 3 श्रापों को ने एक साथ असर दिखाया। अर्जुन ने कर्ण पर तीर चला दिया और श्रापों में फंसकर महान योद्धा का अंत हो गया। कर्ण के 3 बड़े श्राप का वर्णन महाभारत के कर्ण और शांति पर्व मिलता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।