करियर में आ रही रुकावट को दूर कर देगी नवरत्न अंगूठी, आज ही जान लें इसके नियम
हिंदू धर्म में नवरत्न अंगूठी को नौ पवित्र रत्नों का समूह और नवग्रहों का प्रतीक माना गया है। यह करियर, व्यापार में आ रही बाधाएं दूर कर धन लाभ कराती है ...और पढ़ें

नवरत्न अंगूठी पहनने के नियम (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में नवरत्न अंगूठी का अधिक महत्व है। यह अंगूठी नौ पवित्र रत्नों का समूह है। इसलिए नवरत्न अंगूठी को ब्रह्मांड की शक्तियों और नवग्रहों का प्रतीक माना गया है। रत्न शास्त्र के अनुसार, इस अंगूठी को पहनने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
करियर और बिजनेस में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि नवरत्न अंगूठी किन राशियों के लिए शुभ मानी जाती है और इसको पहनने की विधि के बारे में।
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(Picture Credit- AI Generated)
नवरत्न अंगूठी पहनने से मिलते हैं ये लाभ
- नवरत्न अंगूठी पहनने से अशुभ ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव दूर होता है। इससे व्यक्ति के रुके हुए काम पूरे होते हैं। साथ ही शुभ फल की प्राप्ति होती है।
- इसके अलावा नवरत्न अंगूठी धारण करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और मन एकाग्र होता है। साथ ही करियर में सफलता मिलती है।
- रत्न शास्त्र के अनुसार, नवरत्न अंगूठी को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस अंगूठी को पहनने से व्यक्ति को जीवन में कभी भी धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और धन लाभ के योग बनते हैं।
- अगर आप कारोबार में वृद्धि चाहते हैं, तो इसके लिए नवरत्न अंगूठी बेहद फलदायी मानी जाती है। नवरत्न अंगूठी को पहनने से काम के नए असवर मिलते हैं।
नवरत्न अंगूठी किसे पहननी चाहिए?
नवरत्न अंगूठी की सबसे खास बात यह है कि इसे कोई भी पहन सकता है। इसे पहनने से शुभ फल मिलता है, लेकिन अंगूठी से जुड़े नियम का पालन जरूर करना चाहिए।
इन बातों का रखें ध्यान
- नवरत्न अंगूठी को पहनने के लिए शुक्रवार और रविवार का दिन शुभ माना जाता है।
- नवरत्न अंगूठी को दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में पहनना उत्तम माना जाता है।
- शुक्रवार या रविवार के दिन सुबह स्नान करें।
- एक कटोरी में कच्चा दूध,गंगाजल और तुलसी के पत्ते डालें।
- इसके बाद कटोरी में कुछ समय के लिए नवरत्न अंगूठी को रखें।
- इसके बाद अंगूठी को जल से साफ कर कपड़े से पोंछ लें।
- अंगूठी को भगवान के चरणों में रखें।
- इसके बाद "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:" या साधारण "ॐ सूर्याय नम:" मंत्र का जप करते हुए अंगूठी को धारण करें।
- अंगूठी पहनने के बाद रत्नों के नीचे गंदगी जमा न होने दें। इसलिए इसे समय-समय पर साफ करते रहें।
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