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    साढ़ेसाती से परेशान हैं मेष राशि के जातक? यह खास रत्न पहनने से शनि के बुरे प्रभाव से मिलेगी राहत

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 12:40 PM (IST)

    ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है, जिससे मानसिक तनाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव हो सकते हैं। इस दौरान नीलम धारण क ...और पढ़ें

    साढ़ेसाती में नीलम पहनकर पाएं शनि के बुरे प्रभाव से राहत (Picture Credit- AI Generated)

    साढ़ेसाती में नीलम पहनकर पाएं शनि के बुरे प्रभाव से राहत (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्‍योतिष गणनाओं के आधार पर वर्तमान समय में मेष राशि पर पहले चरण की शनि की साढ़ेसाती चल रही है। यह चरण मानसिक तनाव, आर्थिक उतार-चढाव और कार्यक्षेत्र में आ रही परेशानियों का दौर होता है। जातक को छोटी-छोटी बातों पर चिंता होने लगती है। चुनौतियों से भय लगता है और बाधाओं से निपटने का रास्‍ता खोजने में दिक्‍कतें आती हैं।

    इस चरण में ही अगर एक ऐसा उपाय कर लिया जाए, जो आगे के 2 चराणों में भी आपको राहत पहुंचा सके और शनि के प्रभाव को कम कर दें, तो इसमें कोई बुराई नहीं है।

    रत्‍न शास्‍त्र के अनुसार मेष राशि के जातकों को इस दौरान नीलम धारण कर अपने दुखों को कम कर सकते हैं। चलिए हम आपको बताते हैं रत्‍न शास्‍त्र में नीलम को धारण करने के क्‍या नियम बताए गए हैं।

    मेष राशि वालों को कब धारण करना चाहिए नीलम ?

    मेष राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण बहुत ही मुश्किल होता है। इस चरण में यदि चांदी की अंगूठी में नीलम जड़वाकर पहन लिया जाए, तो बहुत फायदे मिलते हैं। यह रत्न शनि के स्वामित्व में आता है और इसे पहनने से जीवन में चल रही उथल-पुथल शांत हो जाती है। नीलम को धारण करने के लिए शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार का दिन सबसे अच्छा रहता है।

    मेष राशि वाले कैसे धारण करें नीलम?

    नीलम को धारण करने के लिए सबसे आसान तरीका है कि इसे पहले कच्चे दूध में डुबो दें और फिर इसे अंगूठी में जड़वाएं। इसे पहनने के लिए शनिवार का दिन चुनें और हमेशा इसे प्रदोष काल में ही धारण करें। ध्यान रखें शनि देव को साफ-सफाई अति प्रिय है, अगर आप नीलम धारण कर रहे हैं, तो अपने शरीर को साफ-सुथरा रखें।

    sade sati ka ratan mesh rashi ke liye(Picture Credit- AI Generated)

    नीलम धारण करते वक्‍त मंत्र का जाप

    मेष राशि वाले जब भी नीलम धारण करें, उस दौरान शनि देव के मंत्र 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का जाप जरूर करें। यह जाप आपको मानसिक शांति देगा। आपको सही और गलत में फर्क करना भी सिखाएगा।

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    नीलम धारण किया है तो इन बातों का ध्यान रखें

    • नीलम एक बहुत ही ऊर्जावान पत्‍थर है। जिसने इसे धारण किया हुआ है, उसे इस बात का ध्‍यान रखना है कि अन्‍य व्‍यक्ति इसे टच न करें। ऐसा करने पर पत्‍थर की ऊर्जा किसी अन्‍य को प्राप्‍त होने लग जाती है।
    • अपनी अंगूठी को भूल से भी किसी और को पहनने के लिए न दें। यदि आप ऐसा करते हैं, तो फिर वापस से इस अंगूठी को पहनने पर आपको इसके फायदे प्राप्‍त नहीं होंगे।
    • हफ्ते या 10 दिन में एक बार अंगूठी को उतारें और गंगाजल से साफ करें। इसकी सफाई बहुत जरूरी है, वरना इसका प्रभाव कम हो जाता है।

    अतः आपको बता दें कि शनि देव अनुशासनप्रिय होते हैं। यदि नीलम आप पहन रहे हैं, तो ऊपर बताए गए नियमों को कभी नजरअंदाज न करें, तभी आप शनि की साढ़े साती के प्रभाव से बच पाएंगे।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।