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    शनि की वक्र दृष्टि लाती है तबाही! ढैय्या और साढ़ेसाती के भयंकर प्रकोप से बचने के ये हैं सरल नियम

    Updated: Wed, 03 Jun 2026 07:36 PM (IST)

    शनि की साढ़े साती और ढैय्या को अक्सर कष्टदायी माना जाता है, पर शनि देव वास्तव में एक निष्पक्ष शिक्षक हैं। ...और पढ़ें

    शनि की साढ़े साती और ढैय्या में अंतर (Picture Credit- AI Generated)

    शनि की साढ़े साती और ढैय्या में अंतर (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. शनि देव निष्पक्ष शिक्षक, कर्मों का फल देते हैं

    2. साढ़े साती और ढैय्या के प्रभावों को समझें

    3. शनि के बुरे प्रभाव कम करने के उपाय अपनाएं

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ग्रहों की चाल हमारे जीवन पर गहरा असर डालती है। यही वजह है कि लोग अक्सर अपने ग्रह मजबूत करने के लिए तरह-तरह के काम करते हैं। नवग्रहों में हर एक ग्रह का अपना अलग असर होता है, लेकिन कर्मफलदाता शनिदेव का नाम सुनते ही लोग डर से कांपने लगते हैं। 

    खासकर जब बात 'शनि की साढ़े साती' या 'ढैय्या' की हो, तो अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। लोग अक्सर इन्हें कष्टदायी और बुरा मानते हैं, लेकिन क्या सच में शनि देव सिर्फ कष्ट देने आते हैं? वैदिक ज्योतिष के अनुसार, शनि देव क्रूर नहीं बल्कि एक निष्पक्ष और कड़क शिक्षक हैं, जो हमें जीवन को निखारने और सही रास्ता दिखाने में मदद करते हैं। आइए जानते इस आर्टिकल से जानते हैं साढ़ेसाती और ढैय्या के बीच प्रमुख अंतर- 

    आखिर क्या है साढ़े साती और ढैय्या का गणित?

    जब शनि देव आपकी जन्म राशि (चंद्र राशि) से एक घर पहले, आपकी खुद की राशि में, और उसके ठीक अगले घर में गोचर यानी राशि परिवर्तन करते हैं, तो उसे साढ़े साती कहते हैं। शनि एक राशि में करीब ढाई साल रुकते हैं, इसलिए इन तीन राशियों का यह सफर कुल साढ़े सात साल में पूरा होता है। इसलिए इस अवधि को साढ़े साती कहा जाता है। 

    वहीं, जब शनि आपकी जन्म राशि से चौथे या आठवें स्थान पर आते हैं, तो उसे 'ढैय्या' कहा जाता है, जिसकी अवधि साल ढाई साल की होती है।

    साढ़े साती और ढैय्या का असर 

    शनि की साढ़े साती और ढैय्या होने पर व्यक्ति पर अच्छे और बुरे दोनों प्रभाव देखने को मिलते हैं। इस दौरान अक्सर व्यक्ति को मानसिक तनाव, करियर में रुकावट, अनचाहे खर्चे, सेहत में गड़बड़ी और अपनों से अनबन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। 

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    असल में, यह समय हमारे पुराने कर्मों का ही फल होता है। अगर हमने अतीत में कोई गलतियां की हैं, तो यह समय हमें उन गलतियों का एहसास कराता है। हालांकि, यह दौर हमेशा बुरा नहीं होता है। जो लोग अपनी जिंदगी में ईमानदार, न्यायप्रिय और मेहनती होते हैं, शनि देव उन्हें बड़ी सफलता, स्थिरता और तरक्की का वरदान भी देते हैं।

    शनि देव की कृपा पाने के अचूक उपाय

    अगर आपकी कुंडली में भी अभी यह समय चल रहा है, तो आप कुछ आसान उपाय अपनाकर इसके बुरे प्रभाव को कम कर सकते हैं- 

    • शनिवार को शनि मंदिर जाकर सरसों का तेल अर्पित करें और शनि चालीसा का पाठ करें। 
    • इसके अलावा आप शनिवार के लिए हनुमान जी की आराधना भी कर सकते हैं। ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। 
    • झूठ, आलस और धोखेबाजी से पूरी तरह दूरी बना लें। किसी को मानसिक या शारीरिक दुख न पहुंचाएं।
    • शनि देव की कृपा पाने के लिए मजदूरों, बुजुर्गों और जरूरतमंदों का सम्मान करें और शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल या काले कपड़ों का दान करें।
    • मुश्किल और परीक्षा की घड़ी में गुस्सा करने के बजाय शांत मन और विनम्रता से काम लें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।