आज शुक्रवार को शंख से करें यह छोटा सा काम, मां लक्ष्मी खुद चलकर आएंगी आपके द्वार!
शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से मां लक्ष्मी का अभिषेक करने से आर्थिक तंगी दूर होती है। जानिए 17 अप्रैल के शुभ मुहूर्त, सही विधि और वो महामंत्र जो ...और पढ़ें

दक्षिणावर्ती शंख से मां लक्ष्मी का अभिषेक (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज शुक्रवार है, और हम सभी जानते हैं कि यह दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। अगर आप भी अपनी आर्थिक तंगी से परेशान हैं या चाहते हैं कि घर में बरकत बनी रहे, तो आज का दिन आपके लिए बेहद खास है।
अक्सर हम मां लक्ष्मी की पूजा तो करते हैं, लेकिन कुछ छोटी-छोटी बातें भूल जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि आपके घर में रखा एक शंख आपकी किस्मत बदल सकता है? शंख का मां लक्ष्मी से बहुत गहरा रिश्ता है। दोनों ही समुद्र मंथन से निकले 'रत्न' हैं। इसीलिए शंख को लक्ष्मी जी का भाई भी कहा जाता है। आइए जानते हैं आज शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) के दिन शंख से जुड़ा वह अचूक उपाय, जो आपके घर में खुशहाली ला सकता है।
दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक
शास्त्रों के अनुसार, मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए दक्षिणावर्ती शंख (जिसका मुख दाईं ओर खुलता हो) से अभिषेक करना सबसे उत्तम माना गया है। इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और धन के रास्ते खुलते हैं।
कैसे करें अभिषेक?
पंचामृत तैयार करें: चांदी या तांबे के बर्तन में थोड़ा गंगाजल लें। इसमें गाय का कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर पंचामृत बना लें।

(Image Source: AI-Generated)
शंख में भरें: इस पंचामृत को दक्षिणावर्ती शंख में भरें।
मंत्रों के साथ अर्पण: अब इस शंख से मां लक्ष्मी की मूर्ति, यंत्र या तस्वीर पर धीरे-धीरे पंचामृत चढ़ाएं।
महामंत्र का जप: अभिषेक करते समय इस मंत्र का जप जरूर करें 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः'
शुद्धिकरण: पंचामृत के बाद मां को पुनः गंगाजल से स्नान कराएं और उन्हें लाल रंग की चुनरी व सुहाग सामग्री (बिंदी, सिंदूर आदि) भेंट करें।
आज के शुभ मुहूर्त (17 अप्रैल, 2026)
आज शुक्रवार के दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार इन समयों पर पूजा कर सकते हैं:
अमृत काल: सुबह 09:50 से 11:18 तक।
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:20 से 01:11 तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:52 से 03:43 तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग: आज यह अद्भुत योग पूरे दिन बना रहेगा, जो किसी भी कार्य की सफलता के लिए रामबाण है।
शास्त्रों के क्या नियम हैं?
इन उपायों का आधार हमारे प्राचीन शास्त्र और स्कंद पुराण जैसे ग्रंथ हैं, जहां समुद्र मंथन और 14 रत्नों (जिसमें लक्ष्मी और शंख शामिल हैं) का वर्णन मिलता है। मुहूर्तों की सटीक गणना दृक पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।