Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    उज्जैन के महाकाल मंदिर में भस्म आरती ब्रह्म मुहूर्त में ही क्यों होती है? जानिए इसके पीछे का रहस्य

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 04:30 PM (IST)

    सावन के महीने में उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का खास महत्व है। जानें बाबा महाकाल की आरती सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ही क्यों होती है। ...और पढ़ें

    ब्रह्म मुहूर्त में ही क्यों होती है भस्म आरती? (AI-Generated Image)

    ब्रह्म मुहूर्त में ही क्यों होती है भस्म आरती? (AI-Generated Image)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का पवित्र महीना शिव भक्तों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होता। इन दिनों देश भर के शिव मंदिरों में हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देती है। लेकिन, जब बात उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की हो, तो वहां की सुबह सबसे अलौकिक होती है।

    बाबा महाकाल के दरबार में हर दिन तड़के होने वाली 'भस्म आरती' में शामिल होने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालु आते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि यह आरती हमेशा 'ब्रह्म मुहूर्त' में ही क्यों की जाती है?

    ब्रह्म मुहूर्त का खास महत्व

    सनातन धर्म में सूर्योदय से करीब डेढ़ घंटे पहले के समय को 'ब्रह्म मुहूर्त' कहा जाता है, जिसे दिन का सबसे पवित्र पहर माना गया है। मान्यता है कि रात के बाद जब पूरी प्रकृति नींद से जाग रही होती है, तब वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा अपने चरम पर होती है। इसी पावन बेला में बाबा महाकाल को भस्म अर्पित कर उन्हें जगाया जाता है। इसी भस्म स्नान के बाद भगवान का पहला और सबसे भव्य श्रृंगार होता है।

    Bhasm aarti

    (AI-Generated Image)

    राक्षस दूषण की कथा

    शिव पुराण के कोटिरुद्र संहिता के सत्रहवें अध्याय के मुताबिक, प्राचीन काल में उज्जैन नगरी में दूषण नाम के एक खूंखार राक्षस ने भयंकर आतंक मचा रखा था। उसके जुल्मों से तंग आकर नगरवासियों ने भगवान शिव से अपनी रक्षा की गुहार लगाई। भक्तों की पुकार सुनकर महादेव तुरंत 'महाकाल' के उग्र रूप में प्रकट हुए और उस राक्षस का वध कर दिया। कहा जाता है कि वध के बाद भगवान शिव ने उसी राक्षस की राख (भस्म) को अपने शरीर पर रमा लिया था। तभी से महाकाल के स्वरूप में भस्म आरती की यह अनोखी परंपरा चली आ रही है।

    खबरें और भी

    क्या है भस्म का असली संदेश?

    शिव जी के शरीर पर सजी भस्म हमें जीवन का सबसे बड़ा और कड़वा सच बताती है। यह सिखाती है कि दुनिया का मोह, धन-दौलत, रिश्ते और हमारा यह शरीर, सब कुछ एक दिन राख में बदल जाना है। यह भस्म वैराग्य का प्रतीक है। इसलिए, भस्म आरती सिर्फ एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के परम सत्य का आईना है। सावन के महीने में इसके दर्शन मात्र से मन को असीम शांति मिलती है और सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

    यह भी पढ़ें- शिवलिंग पर कौन सी सामग्री चढ़ाने से क्या लाभ मिलता है? बेलपत्र से लेकर धतूरे तक, जानें हर वस्तु के अर्पण का महत्व

    यह भी पढ़ें- क्या आपको पता हैं भगवान शिव के ये 3 विशेष नाम? सावन में जल चढ़ाते वक्त इनका उच्चारण करना बेहद फलदायी

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।