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    वैशाख पूर्णिमा 2026: आखिर क्यों इस व्रत को करने से धुल जाते हैं जन्मों के पाप? पढ़ें पौराणिक रहस्य

    Updated: Thu, 30 Apr 2026 11:30 AM (IST)

    वैशाख पूर्णिमा 1 मई 2026 को मनाई जाएगी। जानें इस पावन तिथि का पौराणिक महत्व, इससे कटने वाले पापों की जानकारी और व्रत के जरूरी नियम। ...और पढ़ें

    वैशाख पूर्णिमा 2026 का पौराणिक महत्व

    वैशाख पूर्णिमा 2026 का पौराणिक महत्व

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में वैशाख महीने की पूर्णिमा का दिन बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है। इस साल यह पावन पर्व 1 मई, दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। वैशाख मास की यह पूर्णिमा दान-पुण्य और आत्म-चिंतन (खुद को समझने) के लिए सबसे उत्तम मानी गई है।

    वैशाख पूर्णिमा का पौराणिक महत्व

    ज्ञान की प्राप्ति: पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान बुद्ध ने सत्य की खोज करते हुए इसी पावन दिन पर ज्ञान (निर्वाण) प्राप्त किया था।

    युधिष्ठिर का विशेष व्रत: भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर धर्मराज युधिष्ठिर ने इसी दिन व्रत रखा था। इसके प्रभाव से उन्हें राजसूय यज्ञ के बराबर महान पुण्य की प्राप्ति हुई थी।

    vaishakh purnima niyam

    (Image Source: AI-Generated)

    मोक्ष की प्राप्ति: शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन गंगा स्नान करने और दान देने से मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र (बंधन) से मुक्ति मिल जाती है।

    सुख-समृद्धि का वास: इस शुभ तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने और रात में चंद्र देव को अर्घ्य (जल) देने से घर में सुख-शांति और खुशहाली आती है।

    इस व्रत से कौन-कौन से पाप कटते हैं?

    वैशाख पूर्णिमा का व्रत व्यक्ति के कई जन्मों के पापों को नष्ट करने की दिव्य शक्ति रखता है:

    अनजाने पापों से मुक्ति: विधि-विधान से पूजा और दान करने से झूठ बोलने, किसी का दिल दुखाने या अनजाने में हुए गलत कार्यों के दोष खत्म हो जाते हैं।

    नकारात्मकता का अंत: यह व्रत ‘पाप विमोचनी’ (पापों से मुक्त करने वाली) तिथि के समान फल देता है। यह हमारे अंदर से नकारात्मकता को मिटाकर कोमलता लाता है।

    दरिद्रता से छुटकारा: मानसिक अशांति और गरीबी जैसे दोषों को दूर करने के लिए यह व्रत एक रामबाण उपाय माना जाता है।

    व्रत और पूजा के जरूरी नियम

    सात्विक भोजन और व्यवहार: इस दिन अपना खान-पान एकदम सात्विक रखें। अपनी वाणी में मधुरता रखें और तामसिक चीजों से पूरी तरह दूर रहें।

    जल और फलों का दान: गर्मी का मौसम होने के कारण इस दिन जरूरतमंदों को ठंडे जल और मौसमी फलों का दान करना भगवान विष्णु की सबसे बड़ी सेवा मानी गई है।

    चंद्रमा की रोशनी में ध्यान: रात के समय चांदनी में बैठकर ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है और तनाव दूर होता है।

    पारण के नियम: व्रत पारण (खोलने) के समय बिल्कुल सादा भोजन लें ताकि व्रत की सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।