कब से शुरू हो रहा वैशाख माह? इस एक गलती से आपको झेलना पड़ सकता है भारी नुकसान
चैत्र पूर्णिमा के बाद वैशाख माह 3 अप्रैल से 1 मई तक चलेगा। हिंदू धर्म में यह माह भगवान विष्णु की साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ...और पढ़ें

वैशाख माह का धार्मिक महत्व (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज चैत्र पूर्णिमा का त्योहार मनाया जा रहा है। इसके अगले दिन से वैशाख माह की शुरुआत होती है। हिंदू कैलेंडर का वैशाख दूसरा महीना है। सनातन धर्म में वैशाख को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस माह में भगवान विष्णु की साधना करने से साधक को जीवन में सभी सुख मिलते हैं। साथ ही बिगड़े काम पूरे होते हैं।
दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। आइए आपको बताते हैं कि कब से शुरू हो रहा है वैशाख और इस माह में क्या करें एवं क्या न करें।
इस दिन से शुरू हो रहा वैशाख माह (Vaishakh 2026 Month Start and End Date)
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की शुरुआत 3 अप्रैल से हो रही है। वहीं, इस माह का समापन 1 मई को होगा।
वैशाख माह की प्रतिपदा तिथि के शुभ योग
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 37 मिनट से 05 बजकर 23 मिनट तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 20 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 39 मिनट से 07 बजकर 02 मिनट तक
अमृत काल- दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से 02 बजकर 15 मिनट तक
वैशाख माह में क्या करें? (What to do during the month of Vaishakh)
- इस माह में दान करने का विशेष महत्व है। वैशाख में गर्मी रहती है, तो ऐसे में लोगों के लिए प्याऊ लगवाएं।
- इसके अलावा पक्षियों के लिए मिट्टी के बर्तन में पानी रखें।
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें।
- रोजाना भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें।
- तुलसी के पास देसी घी का दीपक जलाएं।
- पूजा के दौरान शिवलिंग का अभिषेक करें।
वैशाख माह में क्या न करें? (What not to do during the month of Vaishakh)
- वैशाख में मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
- रात को रसोई में जूठे बर्तन नहीं छोड़ने चाहिए।
- किसी से वाद-विवाद न करें।
- किसी के बारे में गलत न सोचें।
- इस माह में जल दान का विशेष महत्व है। इसलिए जल की बर्बादी करना पाप माना जाता है।
- किसी बड़े का अपमान न करें।
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